8 महीने की बेरोजगारी, 847 नौकरियों के लिए आवेदन, 31 इंटरव्यू और अनगिनत रिजेक्शन ईमेल्स... इसके बाद जब आज जॉब ऑफर हाथ में आया, तो मैं अपनी कार में बैठकर बच्चों की तरह फूट-फूटकर रोया. यह दर्द और उसके बाद मिली बेहिसाब खुशी की दास्तान आज के उस टूटे हुए जॉब मार्केट का सच बयां करती है, जिससे हर दूसरा युवा जूझ रहा है. इस समय की होड़ केवल अच्छी नौकरी पाने की नहीं है बल्कि उसे सुरक्षित रखने की भी है.
जब हर रास्ता बंद हुआ, तो अपनाया सीधा रास्ता
नौकरी ढूंढने के शुरुआती 5 महीनों तक लगातार पोर्टल पर धक्के खाने और हर तरफ से सन्नाटा मिलने के बाद, इस उम्मीदवार ने कुछ अलग करने का फैसला किया. उन्होंने ट्रेडिशनल जॉब एप्लिकेशन्स और लिंक्डइन रिक्वेस्ट भेजने के घिसे-पिटे तरीके को छोड़ दिया और कुछ नया ट्राई किया.

नया फॉर्मूला: उन्होंने सीधे उन कंपनियों के हायरिंग मैनेजर्स और डिपार्टमेंट हेड्स को ढूंढा, जहां वे काम करना चाहते थे. उन्हें कोई रिज्यूमे नहीं भेजा, बल्कि उनके पर्सनल ईमेल पर एक छोटा, साफ और सच्चा मैसेज भेजा कि वे उनके साथ क्यों जुड़ना चाहते हैं. इसका असर यह रहा कि उसे 3 हफ्ते में करीब 6 इंटरव्यू के कॉल्स आए. जिस जॉब मार्केट से महीनों तक कोई जवाब नहीं आ रहा था, वहां इस नई तरकीब ने जादू की तरह काम किया. इन्हीं में से एक बातचीत रेफरल में बदल गई. इसके बाद इंटरव्यू हुआ और आखिरकार एक शानदार जॉब ऑफर हाथ में आ गया.
युवाओं के नाम संदेश
अपनी इस सफलता के बाद उन्होंने नौकरी की तलाश में भटक रहे लाखों युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि अगर आप भी इस वक्त नौकरियों के रिजेक्शन से टूट रहे हैं, तो याद रखिए कि कमी आप में नहीं है. आज का पूरा हायरिंग सिस्टम ही खराब हो चुका है. लेकिन हिम्मत मत हारिए, इस टूटे हुए सिस्टम के इर्द-गिर्द भी रास्ते मौजूद हैं.
लोग कर रहे हैं रिएक्ट
इस पोस्ट को देखने के बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कई यूजर्स ने शख्स को बधाई भी दी है. कुछ यूजर्स इस तरीके के सही बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि बड़े पद पर बैठे लोग इसे नहीं देखते.