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कोई उठाता है कूड़ा तो कोई सड़क पर पिता के साथ लगाती है फेरी, हाईस्कूल में इन लड़कियों ने किया कमाल

किसी के पिता रिक्शा चलाते हैं तो किसी के पिता सब्जी बेचकर घर का गुजारा करते हैं. कोई कूड़ा बीनता है तो कोई होटल में छोटा-मोटा काम कर अपना पेट पालता है. इनकी बेटियों ने कड़ी मेहनत के बल पर 10वीं की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की.

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स्लम एरिया में रहने वाली लड़कियों ने हाईस्कूल में अर्जित किए अच्छे नंबर स्लम एरिया में रहने वाली लड़कियों ने हाईस्कूल में अर्जित किए अच्छे नंबर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • स्लम एरिया में रहने वाली लड़कियों का धमाल
  • हाईस्कूल में अर्जित किए बेहतरीन नंबर

प्रयागराज में स्लम बस्तियों में रहने वाली 6 लड़कियों ने हाईस्कूल में अच्छे नंबर लाकर अपना लोहा मनवाया है. यूपी बोर्ड की परीक्षा में इन लड़कियों ने बेहतरीन नंबर हालिस किए. किसी के पिता रिक्शा चलाते हैं तो किसी के सब्जी बेचकर घर चलाते हैं तो कोई कूड़ा बीनता है. आलम ये है कि अगर इनके पिता एक दिन भी काम पर न जाए तो घर पर खाना बनना मुश्किल हो जाता है. लेकिन इनकी बेटियों ने कड़ी मेहनत के बल पर 10वीं की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की. इन सभी बच्चियों का सपना है अपने परिवार को आर्थिक तंगी से उभारना.  

नंदिनी और कोमल कूड़ा बीनने का काम करती हैं. प्रयागराज चुंगी परेड ग्राउंड के पास बस्ती में रहने वाली दोनों बहनों को जोड़कर 5 बहन और दो भाई हैं. हालत ये है कि एक कमरे में पूरा परिवार सोता है और एक चारपाई पर चार लोग सोते हैं. घर में पूरे परिवार के लिए ओढ़ने के लिए एक ही चादर है. हाईस्कूल की परीक्षा में कोमल ने 64 और नंदनी ने  62 प्रतिशत नंबर हासिल किए.  दोनों  बहनें भारतीय सेना में जाना चाहती हैं, नंदिनी कबड्डी की स्टेट लेवल की प्लेयर भी है. 

परीक्षा से पहले नंदनी को चिकनपॉक्स हो गया था बावजूद इसके उसने एग्जाम में देने का फैसला किया और अच्छे नंबर अर्जित किए. इनके घर के हालत इतने खराब हैं कि इनकी छोटी बहन को भीख मांगने जाना पड़ता है. इसके अलावा स्लम बस्ती की रहने वाली अन्य लड़कियों के हालत भी ऐसे ही हैं. जिन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा में 70 से 80 प्रतिशत नंबर अर्जित किए. सना ने 81, खुश्बू विश्वकर्मा 84, आंचल 80, खुशबू बानो 70,  सनी केसरवानी ने 71 प्रतिशत नंबर हासिल कर शानदार प्रदर्शन किया. 

आंचल बताती हैं कि उनके पिता नशे के आदि हैं और घर पर मारपीट करते हैं. आंचल घर में तब तक नही पढ़ पाती. जब तक उसके पिता सो नहीं जाते. आंचल पढ़ लिख कर डॉक्टर बनना चाहती थी. 81 प्रतिशत नंबर लेने वाला सना के अब्बू फेरी लगाकर घर चलाते हैं सना भी पढ़ लिखकर डॉक्टर बनना चाहती है. 

 

 

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