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JPSC मेंस परीक्षा के विरोध में अभ्यर्थियों ने दी आंदोलन की चेतावनी, प्रीलिम्स में धांधली का आरोप

अभ्यर्थियों ने विरोध करते हुए प्रीलिम्स में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि प्रीलिम्स एग्जाम में एक ही कमरे में आगे पीछे बैठने वाले 33 उम्मीदवार कैसे पास हो गए. इसके अलावा अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि परीक्षा के बाद कट ऑफ मार्क्स क्यों नहीं जारी किया गया.

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JPSC Mains exam protest JPSC Mains exam protest
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 28 से 30 जनवरी के बीच आयोजित होगी मेंस परीक्षा
  • अभ्यर्थियों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) मेंस एग्जाम 28, 29 एवं 30 जनवरी 2022 को आयोजित की जाएगी. परीक्षा के आयोजन से पहले एक बार फिर इसका विरोध शुरू हो गया है.  झारखंड स्टेट स्टूडेंट यूनियन ने इस परीक्षा के खिलाफ आंदोलन करने की तैयारी शुरू कर दी है. 

अभ्यर्थियों ने विरोध करते हुए प्रीलिम्स में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि प्रीलिम्स एग्जाम में एक ही कमरे में आगे पीछे बैठने वाले 33 उम्मीदवार कैसे पास हो गए. इसके अलावा अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि परीक्षा के बाद कट ऑफ मार्क्स क्यों नहीं जारी किए गए. उनका कहना है कि आंदोलन के बाद प्रीलिम्स में पास कई अभ्यर्थियों को जेपीएससी (JPSC) ने फेल कर दिया है. 

अभ्यर्थी सातवीं से लेकर दसवीं सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं. बता दें कि पीटी परीक्षा में धांधली का आरोप लगाते हुए आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की ओर से जोरदार आंदोलन भी किया गया था. वहीं, जेपीएससी मुख्य परीक्षा का विरोध भी लगातार हो रहा है.

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो और मनोज यादव ने कहा कि जेपीएससी आयोग झारखंड सरकार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण विभाग के गाइड लाइन का भी उल्लंघन कर रही है.  SOP ये है कि कोई भी फिजिकल क्लास या एग्जाम नहीं होंगे. बावजूद इसके झारखंड सरकार के निर्देश का उल्लंघन करते हुए जेपीएससी ने 28 जनवरी से मुख्य परीक्षा लेने का निर्णय लिया है. 

अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि तत्काल जेपीएससी पर संज्ञान लेते हुए मुख्य परीक्षा पर रोक लगाई जाए. अभ्यर्थियों ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की बात कही है. इसके अलावा  फिर से उग्र आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है. 

देवेंद्र का आरोप है कि जेपीएससी भ्रष्टाचार का अड्डा और कचड़े का डब्बा बन चुका है. बता दें इस मामले पर 25 जनवरी को हाई कोर्ट का फैसला आने वाला है. ऐसे में अगर फैसला अभ्यर्थियों के हक में नहीं आया तो 26 जनवरी को आंदोलनकारी छात्रों बैठक का आयोजन करेंगे और बड़े आंदोलन की घोषणा करेंगे. 

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