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मैथ पेपर QR कोड से खुला ‘Never Gonna Give You Up’ गाना, हंगामे के बाद CBSE ने दी ये सफाई

बोर्ड के अनुसार प्रश्नपत्रों में कई तरह के सुरक्षा फीचर होते हैं, जिनमें QR कोड भी शामिल है. इन कोड में विषय, परीक्षा की तारीख, प्रश्नपत्र का सेट और प्रिंटिंग बैच जैसी जानकारी छिपी होती है. इनकी मदद से जरूरत पड़ने पर यह पता लगाया जा सकता है कि प्रश्नपत्र किस चैनल से परीक्षा केंद्र तक पहुंचा.

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कक्षा 12 की गणित परीक्षा के प्रश्नपत्र में छपे QR कोड को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है. दावा किया गया कि प्रश्नपत्र पर मौजूद एक QR कोड स्कैन करने पर अंग्रेजी गायक रिक एश्ले के मशहूर गाने नेवर गॉन... (Never Gonna Give You Up) का यूट्यूब वीडियो खुल रहा है. इस घटना के बाद परीक्षा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे और सोशल मीडिया पर मीम्स और चर्चाओं की बाढ़ आ गई.

सोमवार को हुई कक्षा 12 की गणित परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र की तस्वीरें X, इंस्टाग्राम और रेड‍िट जैसे प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल होने लगीं. कई यूजर्स ने इसे 'रिकरोलिंग' से जोड़ते हुए मजाक भी किया. इंटरनेट पर 'रिकरोलिंग' उस मजाक को कहा जाता है, जिसमें अचानक Never Gonna Give You Up का वीडियो सामने आ जाता है.

मामला बढ़ने के बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (CBSE) ने सफाई जारी की है. 10 मार्च को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बोर्ड ने कहा कि प्रश्नपत्र पूरी तरह असली हैं और उनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हुआ है.

बोर्ड के अनुसार प्रश्नपत्रों में कई तरह के सुरक्षा फीचर होते हैं, जिनमें QR कोड भी शामिल है. इन कोड में विषय, परीक्षा की तारीख, प्रश्नपत्र का सेट और प्रिंटिंग बैच जैसी जानकारी छिपी होती है. इनकी मदद से जरूरत पड़ने पर यह पता लगाया जा सकता है कि प्रश्नपत्र किस चैनल से परीक्षा केंद्र तक पहुंचा.

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सीबीएसई ने बताया कि 9 मार्च 2026 को कक्षा 12 की गणित की परीक्षा आयोजित की गई थी. कुछ प्रश्नपत्र सेट में ऐसा सामने आया कि एक QR कोड स्कैन करने पर वह यूट्यूब वीडियो से जुड़ रहा है, जिससे छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई.

हालांकि बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इससे प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता या परीक्षा की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा है. सीबीएसई ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

सीबीएसई ने प्रश्नपत्रों पर QR कोड छापने की व्यवस्था 2019 में शुरू की थी. यह फैसला 2018 में कक्षा 12 के अर्थशास्त्र और कक्षा 10 के गणित के पेपर लीक होने के बाद लिया गया था, ताकि प्रश्नपत्रों की निगरानी और ट्रैकिंग बेहतर तरीके से की जा सके.

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