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UPSC उम्मीदवारी कैंसिल करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 6 हफ्ते बाद

याचिका में कहा गया है कि UPSC नियम, 2020 के अनुसार छात्रों के द्वारा शैक्षिक योग्यता का अपेक्षित प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया था जिसके चलते उसकी अभ्यर्थिता रद्द कर दी गई है जिसके लिए वो जिम्मेदार नही हैं. 

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प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • छात्रों का तर्क: हमारी कोई गलती नहीं, एग्जाम ही हुए लेट
  • छात्रों का कहना है कि उनकी अंतिम वर्ष की परीक्षा परिणाम में देरी की वजह से वो अपना प्रमाणपत्र प्रस्तुत नही करा सके

UPSC CSE 2021: लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में शामिल उम्मीदवारों की अभ्यर्थिता रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने छह हफ्ते के लिए सुनवाई टाल दी है. न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि परिचालित पत्र को देखते हुए, पक्ष अभी तक एक सौहार्दपूर्ण निर्णय पर नहीं पहुंच पाया है.

इस मामले में UPSC का कहना है कि इन अभियर्थियों ने समय पर अपनी शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्र दाखिल नही किया था इसलिए उनकी उम्मीदवारी को रद्द किया गया है. जबकि छात्रों का कहना है कि उनकी अंतिम वर्ष की परीक्षा परिणाम में देरी की वजह से वो अपना प्रमाणपत्र प्रस्तुत नही करा सके. इसमे उनकी कोई गलती नही है इसलिए उनकी उम्मीदवारी को रद्द न किया जाए. आज कोर्ट ने इस बात को रिकॉर्ड पर लिया कि सभी पक्ष इस मामले को निपटाने पर विचार कर रहे हैं. 

पिछली बार UPSC की तरफ से कहा गया था कि अलग अलग अभ्यर्थी को अलग अलग ग्राउंड पर एलिजिबिलिटी के लिए छूट नहीं दी जा सकती. साथ ही UPSC ने यह भी कहा था कि समय पर सकर्टिफिकेट ना जमा कर पाने के लिए कोरोना का बहाना नहीं हो सकता. दरअसल बीटेक के छात्रों ने याचिका दाखिल करके अपनी UPSC में उम्मीदवारी रद्द नही किए जाने की मांग की है.

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याचिका में कहा गया कि UPSC नियम, 2020 के अनुसार छात्रों के द्वारा शैक्षिक योग्यता का अपेक्षित प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया था जिसके चलते उसकी अभ्यर्थिता रद्द कर दी गई है जिसके लिए वो जिम्मेदार नही हैं. वहीं इस मामले में यूपीएससी ने पिछली सुनवाई में कहा था समय पर सर्टिफिकेट ना जमा कर पाने के लिए कोरोना बहाना नहीं हो सकता है. साथ ही UPSC ने कहा था कि अलग-अलग अभ्यर्थी को अलग-अलग ग्राउंड पर एलिजिबिलिटी के लिए छूट नहीं दी जा सकती है.

 

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