नौकरी के इंटरव्यू में ऐसे बदलाव आ रहे हैं जिन्हें कई युवा अभी तक समझ नहीं पा रहे हैं. सभी क्षेत्रों में इंटरव्यूअर AI से जुड़ी स्किल को बेहद अहम मान रहे हैं. आज के बदलते दौर में सवाल ये नहीं है कि आपको क्या आता है या क्या नहीं बल्कि यह है कि आप AI की मदद से उस काम को और कितना बेहतर कर सकते हैं.
बड़ी कंपनियों ने शुरू किया AI का यूज
जब खबर आई कि मशहूर कंसल्टिंग कंपनी McKinsey ने अपने लास्ट दौर के कुछ इंटरव्यू में AI टूल्स के इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है, तो यह कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, मैकिन्ज़ी की प्रतिद्वंद्वी कंसल्टिंग कंपनी केर्नी ने भी अपनी हायरिंग में बदलाव शुरू कर दिया है. कंपनी भारत में शुरुआती इंटरव्यू राउंड के दौरान AI बेस्ड स्क्रीनिंग का टेस्ट किया जा रहा है, ताकि उम्मीदवारों के चयन में किसी तरह का पक्षपात न रहे.
उम्मीदवारों को नहीं होती है जानकारी
AI के जरिए भर्ती को लेकर सबसे बड़ी परेशानी ये है कि कई बार उम्मीदवारों को पहले से नहीं बताया जाता कि इंटरव्यू में AI की समझ को लेकर भी सवाल किया जा सकता है. कई उम्मीदवारों का कहना है कि बाद में उन्हें इसी आधार पर रिजेक्ट कर दिया जाता है. इसपर हायरिंग एक्सपर्ट अंकुर अग्रवाल मानना हैं कि आज कई कंपनियां इंटरव्यू के दौरान चुपचाप यह देख रही हैं कि उम्मीदवार AI का इस्तेमाल कर पाते हैं या नहीं, लेकिन यह बात जॉब पोस्ट में साफ नहीं लिखी जाती. उनका कहना है कि दिक्कत यह नहीं है कि कंपनियां AI की जांच कर रही हैं बल्कि यह है कि उम्मीदवार अभी तक इस बदलाव को समझ नहीं पाए हैं.
सारी चीजें होनी चाहिए क्लियर
अंकुर का मानना है कि हायरिंग डिटेल्स में सारी चीजों को सही तरह से लिखना बेहद जरूरी होता है. इससे कंपनियों और उम्मीदवारों दोनों को फायदा मिलता है. डिटेल्स में ये साफ लिखा होना चाहिए कि AI स्किल्स की जरूरी है या नहीं.
इंटर्नशाला में AI ऑपरेशंस के प्रमुख बिशाल गुहा मल्लिक कहते हैं कि हायरिंग की असली स्थिति अक्सर प्लानिंग से काफी अलग होती है. कई बार कंपनियां जॉब पोस्ट में लिख देती हैं कि AI आना जरूरी है, लेकिन असल में वे सिर्फ इतना जानना चाहते हैं कि उम्मीदवार को ChatGPT जैसे टूल चलाने आते हैं कि नहीं. उनका कहना है कि अभी इंटरव्यूअर खुद यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि किस नौकरी में कितनी AI जानकारी चाहिए.
कितना जरूरी है AI?
कंपनियां कहती हैं कि AI सिर्फ एक टूल है, इंसान की जगह नहीं लेता. लेकिन जो उम्मीदवार AI का इस्तेमाल नहीं करते, उन्हें धीरे-धीरे नौकरी पाने में मुश्किल हो रही है. अंकुर अग्रवाल कहते हैं कि AI किसी की नौकरी नहीं छीन रही, बल्कि काम को आसान और तेज बनाने में मदद कर रही है. जैसे टाइपराइटर की जगह कंप्यूटर ने काम बेहतर किया. उदाहरण देते हुए उन्होंने आगे बताया कि जो लोग AI का इस्तेमाल नहीं करते, उनके काम में फर्क पड़ता है और यह कई बड़े परिणाम ला सकता है.
लाइव AI का बढ़ा चलन
आजकल इंटरव्यू में लाइव AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. जैसे केस स्टडी, घर के असाइनमेंट या सिमुलेशन. इससे समान अवसर और टूल तक पहुंच पाना एक बड़ी चिंता बन गई है. अंकुर अग्रवाल कहते हैं कि फर्क सिर्फ इस बात में है कि उम्मीदवार AI को कैसे इस्तेमाल करता है, न कि टूल कितनी जानकारी जानता है. वे कहते हैं कि सभी उम्मीदवारों को समान टूल और मौके मिलने चाहिए.
वहीं, बिशाल मल्लिक का मानना है कि AI ने सभी के लिए खेल बराबर कर दिया है, क्योंकि अब ज्यादातर लोग आसानी से इन टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं और अपना काम आसान बना सकते हैं.