नौकरी की दुनिया में अक्सर पिंक कॉलर, ब्लू कॉलर, व्हाइट कॉलर और ग्रे कॉलर जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इनका असल मतलब क्या होता है? दरअसल, ये शब्द अलग-अलग तरह की नौकरियों और काम करने के तरीकों को बताने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. किसी नौकरी में ऑफिस का काम ज्यादा होता है, तो कहीं मैदान में मेहनत वाला काम होता है और कुछ नौकरियां सेवा या तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी होती हैं.
आखिर पिंक, ब्लू, व्हाइट और ग्रे कॉलर जॉब्स क्या होती हैं और इनमें क्या फर्क होता है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.
क्या होता है कॉलर नौकरी का मतलब?
कॉलर नौकरी एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल नौकरी के प्रकार और काम की प्रकृति को बताने के लिए किया जाता है.
ब्लू कॉलर जॉब
ब्लू कॉलर जॉब कैटेगरी में वह लोग आते हैं, जो दिहाड़ी पर काम करते हैं. इसका मतलब है कि जो लोग शारीरिक श्रम करते हैं जैसे वेल्डर, मैकेनिक, मजदूर या फैक्ट्री वर्कर.
व्हाइट कॉलर जॉब
व्हाइट कॉलर जॉब में उन लोगों को शामिल किया गया है जो लोग ऑफिस में बैठकर काम करते हैं. इस जॉब की कैटेगरी में स्किल्ड प्रोफेशनल काम करते हैं जैसे कि मैनेजर, इंजीनियर या बैंक कर्मचारी. ज्यादा इसका मतलब साफ है कि इस कैटेगरी के लिए सूट और टाई वाले होते हैं जिनके शर्ट की कॉलर का रंग व्हाइट होता है.
गोल्ड कॉलर जॉब
इस जॉब की कैटेगरी में उन लोगों को शामिल किया गया है जिनके पास बहुत ज्यादा स्किल है जैसे डॉक्टर, वैज्ञानिक या वकील. इसमें काम करने वाले लोग कंपनी को चलाने के लिए मुख्य भूमिका निभाते हैं और अपने फील्ड के एक्सपर्ट होते हैं.
पिंक कॉलर जॉब
इस कैटेगरी के लोग सेवा क्षेत्र से जुड़े होते हैं जैसे नर्स या टीचर. इन नौकरियों में अक्सर महिलाओं को हायर किया जाता है, इसलिए इन्हें पिंक कॉलर जॉब के नाम से जाना जाता है.
ग्रे कॉलर जॉब
ग्रे कॉलर जॉब एक ऐसा शब्द है, जो उन वर्कर्स को दर्शाता है, जो व्हाइट और ब्लू कॉलर जॉब्स के बीच आते हैं. इनमें तकनीकी एक्सपर्ट, सुरक्षा गार्ड और हेल्थकेयर सेक्टर के लोग शामिल होते हैं.