'असली मसाले सच-सच, MDH....' इस ऐड को हर भारतीय ने जरूर देखा होगा. MDH मसाला कंपनी के मालिक धर्मपाल गुलाटी की आज (शनिवार) पुण्यतिथि है. धर्मपाल गुलाटी का निधन 3 दिसंबर 2020 को 97 साल की उम्र में हुआ था. मसाला किंग के नाम से मशहूर गुलाटी को 2019 में देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से नवाज़ा गया था. धर्मपाल गुलाटी ने तांगे वाले से एक कामयाब बिजनेस मैन बनने तक का सफर तय किया. आइए जानते हैं मसाला किंग धर्मपाल गुलाटी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें...
धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1923 को सियालकोट (अब पाकिस्तान में) में हुआ था. धर्मपाल गुलाटी की पढ़ाई में रुचि नहीं थी, इसलिए उन्होंने महज कक्षा पांचवीं तक ही पढ़ाई की और 1933 में स्कूल छोड़ दिया. साल 1937 में उन्होंने अपने पिता (महाशय चुन्नी लाल गुलाटी) की मदद से व्यापार शुरू किया. उसके बाद साबुन, कपड़ा, हार्डवेयर, चावल आदि का कारोबार भी किया. धर्मपाल गुलाटी के पिता ने चुन्नी लाल गुलाटी ने महाशियां दी हट्टी (MDH) की स्थापना की थी. उस समय उन्हें देगी मिर्च वाले (Deggi Mirch Wale) के नाम से पहचाना जाता था.
भारत-पाकिस्तान विभाजन के वक्त वह 1947 में दिल्ली आ गए थे. पढ़ाई में उनकी खास रुचि नहीं थी लेकिन उन्होंने भारत में एक बड़े कारोबारी के तौर पर अपनी एक पहचान बनाई. जानकारी के मुताबिक, 1947 में देश के बंटवारे के बाद जब गुलाटी भारत आए तो उनके पास सिर्फ 1,500 रुपये थे. उन्होंने परिवार के पालन-पोषण के लिए 650 रुपये का तांगा खरीदा और उसे चलाकर जब उनके पास पैसे जमा हुए तो उन्होंने दिल्ली के करोल बाग स्थित अजमल खां रोड पर मसाले की एक छोटी दुकान खोली.
इस दुकान से मसाले का कारोबार धीरे-धीरे इतना फैल गया कि आज कई फैक्ट्रियां हैं, जहां मसाला बनता है. भारत का MDH मसाला पूरी दुनिया में निर्यात होता है. धर्मपाल गुलाटी ने भले ही किताबी ज्ञान हासिल नहीं किया लेकिन कारोबार में ऐसी कामयाबी हासिल करके दिखाई कि आज भी कारोबार में बड़े-बड़े दिग्गज उनसे प्रेरणा लेते हैं.
कारोबारी होने के साथ ही, धर्मपाल गुलाटी एक धार्मिक और मानवीय इंसान भी थे. वे अपनी कमाई का कुछ हिस्सा दान भी करते थे. बुढ़ापे में भी गुलाटी अपने उत्पादों का प्रमोशन खुद ही करते थे. धर्मपाल गुलाटी को एमडीएच के दादा के नाम से भी जाना जाता है.