नौसेना के कप्तान ब्रूस मैककैंडलेस सेकेंड बिना किसी सहारे के स्पेसवाक करने वाले पहले इंसान थे. 7 फरवरी 1984 को यानी आज ही के दिन उन्होंने ये इतिहास रचा था. पृथ्वी से 170 मील ऊपर वो बिना किसी सहरे के स्पेस में चलते रहे थे. पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे स्पेस शटल चैलेंजर से निकलकर वो स्पेस में काफी दूर तक चले गए थे.
नाइट्रोजन से चलने वाले, हाथ से नियंत्रित किए जाने वाले बैकपैक जैसे उपकरण का इस्तेमाल कर उन्होंने यह कीर्तिमान रचा था. जब वह अमेरिकी अंतरिक्ष शटल चैलेंजर से बाहर निकले और अपने खुद के डिजाइन किए गए एक भारी सफेद जेट पैक का इस्तेमाल करके स्वतंत्र रूप से पैंतरेबाजी की, तो यह इतिहास में दर्ज होने वाली घटना थी और जब ये हो रहा था वो दिन भी इतिहास बन गया.
मैककैंडलेस ने शटल के साथ पृथ्वी की परिक्रमा 17,500 मील प्रति घंटे से अधिक की गति से की - जो कि उपग्रहों की पृथ्वी की परिक्रमा की सामान्य गति है. उन्होंने चैलेंजर से 320 फीट की दूरी तक उड़ान भरी. डेढ़ घंटे तक जेट-चालित बैकपैक का टेस्ट और उड़ान भरने के बाद, मैककैंडलेस सुरक्षित रूप से शटल में वापस प्रवेश कर गए. चैलेंजर में सवार उनके साथी चालक दल के सदस्यों ने स्पेसवॉक करते हुए उनकी तस्वीर खींची, जो इतिहास बन गई.
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उसी दिन बाद में, सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल रॉबर्ट स्टीवर्ट ने जेट पैक का टेस्ट किया था, जिसे परिक्रमा करने वाले उपग्रहों की मरम्मत और रखरखाव तथा बड़े अंतरिक्ष स्टेशनों के निर्माण और रखरखाव के लिए भविष्य के अभियानों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है. यह स्पेस शटल चैलेंजर का चौथा ओरबिटल मिशन था. इस घटना के बाद से स्पेस में इस जेटपैक के सहारे अंतरिक्ष यात्री स्पेस में विचरण कर सैटेलाइट की मरम्मती और मिशन के अन्य जरूरी काम को आसानी से कर सकते थे. इसलिए यह न सिर्फ पहला फ्री स्पेसवॉक था, बल्कि स्पेस साइंस के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी शुरुआत भी थी.