भारत अपनी अगली जनगणना के साथ एक नए युग में कदम रख रहा है. साल 2021 में टली जनगणना अब 2027 में होगी, जो पूरी तरह से डिजिटल होगी. यह भारत की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना है. मतलब यह है कि अब सरकारी कर्मचारी आपके दरवाजे पर मोटे रजिस्टर और पेन लेकर नहीं बल्कि स्मार्टफोन और टैबलेट के साथ नजर आएंगे.
इस बार सरकार ने एक बहुत बड़ी सुविधा दी है. इस सुविधा का नाम है सेल्फ इन्यीमरेशन. इसका साफ मतलब है कि अब आपको जनगणना वाले बाबू के घर आने का इंतजार नहीं करना होगा. आप घर बैठे ही इसे पूरा कर सकते हैं. केंद्र सरकार ने इस बड़े अभियान के लिए कमर कस ली है जो न केवल डेटा पर काम करेगी बल्कि युवाओं के लिए नौकरी के बड़े मौके देगी.
जनगणना का काम दो चरणों में पूरा किया जाएगा.
पहला चरण (अप्रैल-सितंबर 2026): इस चरण में हाउस लिस्टिंग (मकानों की सूची) तैयार की जाएगी. इसमें घरों की स्थिति, वहां की सुविधाएं और संसाधनों का डेटा जुटाया जाएगा.
दूसरा चरण (फरवरी 2027): यह मुख्य जनसंख्या गणना का चरण होगा. इसमें जाति, धर्म, शिक्षा और आर्थिक स्थिति जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े दर्ज किए जाएंगे.
इस बार क्या होगा नया?
मोबाइल ऐप का जादू
डेटा संग्रह के लिए एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया गया है. प्रगणक सीधे ऐप पर जानकारी देगा, जिससे डेटा रीयल-टाइम में सर्वर पर अपडेट होगा.
सेल्फ-एन्युमरेशन
इसके अलावा नागरिकों के पास खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करने का भी ऑप्शन होगा. इसके लिए 16 भाषाओं में पोर्टल उपलब्ध कराया जाएगा.
सटीकता और स्पीड
डिजिटल होने के कारण मानवीय गलतियों की गुंजाइश कम होगी और जनगणना के नतीजे पुराने तरीकों के मुकाबले कहीं जल्दी घोषित किए जा सकेंगे.
युवाओं के लिए नौकरियों का अवसर
जनगणना के तहत युवाओं को भी फायदा होगा. इससे उन्हें नौकरी के मौके मिलेंगे. रिपोर्ट बताती हैं कि इस पूरे अभियान के लिए लगभग 30 लाख फील्ड फंक्शनरीज की जरूरत होगी.
इन पदों पर मिल सकते हैं मौके
लोकल यूथ सर्वेयर
कई राज्यों में स्थानीय युवाओं को सहायक के रूप में नियुक्त करने की योजना है. ये युवा घर-घर जाकर डेटा कलेक्शन में मदद करेंगे.
डाटा एंट्री और तकनीकी सहायक
डिजिटल जनगणना होने के कारण ब्लॉक और जिला स्तर पर तकनीकी सहायकों की भारी मांग रहेगी जो सॉफ्टवेयर और ऐप से जुड़ी दिक्कतों को दूर कर सकें.
प्रशिक्षक
जो युवा तकनीक और संचार में माहिर हैं, उन्हें सरकारी कर्मचारियों (जैसे शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं) को डिजिटल टूल्स चलाने का प्रशिक्षण देने के लिए नियुक्त किया जा सकता है.
डेटा विश्लेषक
राज्य और केंद्र स्तर पर एकत्रित डेटा को प्रोसेस और एनालाइज करने के लिए प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी.
मिल सकती है इतनी सैलरी
| पोस्ट | सैलरी | अवधि |
| प्रगणक | 15,000 से 25,000 रुपये | 45 से 60 दिन |
| सुपरवाइजर | 25,000 से 35,000 रुपये |
पूरे चरण के दौरान |
| डाटा एंट्री/IT सहायक | 12,000 से 20,000 रुपये | प्रोजेक्ट की अवधि तक |