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बच्चे पसंद हैं तो खोल सकते हैं किंडरगार्टन, नहीं है कोई पेच... आसान हैं इसके नियम

शिक्षा का क्षेत्र आज के समय में म केवल एक सामाजिक सेवा है, बल्कि एक बेहद सफल बिजनेस मॉडल भी बन चुका है. भारत में प्ले-स्कूल इंडस्ट्री जिस तेजी से बढ़ रही है. उसने नए उद्यमियों के लिए मुनाफे के नए दरवाजे खोल दिए हैं. अगर आप भी कम निवेश में एक सम्मानजनक और हाई-रिटर्न बिजनेस की तलाश में हैं, तो किंडरगार्टन खोलना आपके लिए सबसे सही फैसला हो सकता है. 

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Kindergarten Business India (Photo : Pexels)
Kindergarten Business India (Photo : Pexels)

भारत में किंडरगार्टन यानी प्रीस्कूल या प्ले स्कूल खोलना एक बेहतरीन अवसर है, खासकर नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के बाद से जिसने शुरुआती बचपन की शिक्षा को अनिवार्य बना दिया है. प्रीस्कूल खोलने के लिए अभी तक कोई एकल राष्ट्रीय लाइसेंसिंग व्यवस्था नहीं है, लेकिन आपको राज्य और स्थानीय स्तर पर कुछ नियमों का पालन करना होता है. अगर आप भी कम निवेश में एक सम्मानजनक और हाई-रिटर्न बिजनेस की तलाश में हैं, तो किंडरगार्टन खोलना आपके लिए सबसे सही फैसला हो सकता है. 

इन बातों पर दें ध्यान

सबसे पहले आपको अपनी संस्था को एक प्रोपराइटरशिप, LLP, ट्रस्ट या सोसायटी के रूप में रजिस्टर करना होगा. कम से कम 1,000 से 1,500 वर्ग फुट जगह की आवश्यकता होती है. 

इसके साथ हवादार कक्षाएं, बच्चों के लिए अनुकूल शौचालय, इनडोर/आउटडोर खेलने की जगह होने के साथ-साथ खेल क्षेत्र और सुरक्षित वातावरण होना चाहिए. 

प्रिस्कूल खोलने के लिए स्थानीय दमकल विभाग से अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र लेना भी अनिवार्य है. इसके बाद स्थानीय निकाय से ट्रेड लाइसेंस या व्यावसायिक उपयोग की अनुमति होनी चाहिए. 

इसके अलावा नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग से स्वच्छता प्रमाण पत्र लेना भी जरूरी होता है. शिक्षकों के पास NTT या मोंटेसरी प्रशिक्षण होना चाहिए. 

क्या सिखते हैं बच्चे?

किंडरगार्टन असल में बच्चों के लिए घर और बड़े स्कूल के बीच का एक खूबसूरत पुल है. यहां पर बच्चे केवल पढ़ाई नहीं करते हैं बल्कि जिंदगी जीने के छोटे-छोटे सलीके सीखने जाता है. जब एक बच्चा पहली बार घर की चारदीवारी से बाहर निकलता है, तो यहां उसे सबसे पहले यह समझ आता है कि उसके अलावा भी एक दुनिया है. वह दूसरे बच्चों के साथ अपने खिलौने शेयर करना, साथ मिलकर खेलना और नए दोस्त बनाना सीखते हैं. वहीं, लेकिन अगर पढ़ाई की बात करें, तो यहां कोई भारी-भरकम बैग या रटने वाला बोझ नहीं होता. बच्चों को कहानियों, कविताओं और गानों के जरिए शब्दों और अक्षरों की पहचान कराई जाती है. खेल-खेल में उन्हें रंगों की पहचान कराई जाती है, आकृतियों और गिनती सिखाया जाता है.
 

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प्रीस्कूल खोलना आपके शहर पर करता है निर्भर 

एक प्रीस्कूल शुरू करने का खर्च आपके शहर और ब्रांड पर निर्भर करता है. छोटा मॉडल करीब 5 से 10 लाख रुपये में खोला जा सकता है. फ्रेंचाइजी के लिए लगभग 10 से 25 लाख रुपये होते हैं. बड़े शहरो में प्रीमियम मॉडल के लिए करीब 30 लाख या उससे अधिक लग सकता है. प्रीस्कूल एक रिसेशन-प्रूफ बिजनेस माना जाता है क्योंकि शिक्षा की मांग हमेशा बनी रहती है. वहीं, अगर आपके पास 80-100 बच्चे हैं और औसत फीस 2,000–4,000 रुपये प्रति माह है, तो आपकी मासिक कमाई 2 से 4 लाख रुपये हो सकता है.

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