देश के सबसे बड़े मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 पेपर लीक के बाद CBI पूरे देश में जांच कर रही है. पर ये पहली बार नहीं हो रहा है. साल 2024 में भी नीट परीक्षा में गड़बड़ी की खबरें सामने आई थीं. नीट के अलावा अन्य परीक्षाओं को लेकर भी लगातार ऐसी खबरें सामने आती रही हैं. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा गाओकाओ जिसका आयोजन चीन में होता है उसका पेपर कभी लीक होता है या नहीं. माना जाता है कि तीन दिनों तक चलने वाली परीक्षा का आयोजन आमतौर पर 7 से 10 जून के बीच होता है.
लाखों छात्र होते हैं शामिल
चीन की राष्ट्रीय कॉलेज परीक्षा गाओकाओ में हर साल लाखों छात्र शामिल होते हैं. इस परीक्षा के आधार पर छात्रों को चीन की टॉप यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलता है. ये केवल एक परीक्षा नहीं है बल्कि भविष्य की फैसला करने के लिए माना जाता है.
कैसा होता है परीक्षा का आयोजन?
गाओकाओ परीक्षा में चीनी भाषा, मैथ्य, विदेशी भाषा और स्ट्रीम बेस्ड सब्जेक्ट्स के पेपर होते हैं. इस परीक्षा के आयोजन के दौरान कड़ी सुरक्षा रखी जाती है. परीक्षा केंद्रों पर फेस रिकॉग्निशन, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, मेटल डिटेक्टर, मोबाइल जैमर और AI बेस्ड निगरानी रखी जाती है. गाओकाओ के पेपर तैयार करने की प्रक्रिया काफी गोपनीय होती है. माना जाता है कि इसके पेपर को सेट करने वाले एक्सपर्ट्स को कुछ दिनों से बाहरी दुनिया से अलग कर दिया जाता है. फोन का यूज, इंटरनेटऔर बाहरी संपर्क पूरी तरह से बंद होता है. प्रश्नपत्रों को मल्टी-लेयर एन्क्रिप्शन और हाई सिक्योरिटी प्रिंटिंग सिस्टम के जरिए तैयार किया जाता है.
क्या लीक होते हैं ये पेपर?
टॉप सीक्रेट ऑपरेशन-चीनी सरकारी मीडिया हाउस सीसीटीवी के मुताबिक परीक्षा से तीन महीने पहले सेकेंडरी स्कूलों और यूनिवर्सिटी के कुछ टीचरों को टेस्ट पेपर डिजाइन करने के लिए चुना जाता है. इसके बाद उन्हें दूर-दराज और सूनसान इलाकों यानी मिलिट्री कैंपों में भेज दिया जाता है.
यहां पर प्रिंट होता है पेपर
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, प्रश्नपत्र शिक्षा मंत्रालय और नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ स्टेट सीक्रेट्स प्रोटेक्शन की निगरानी में जेलों में प्रिंट कराए जाते हैं. हर प्रिंट वर्कशॉप में कैमरे और गार्ड की निगरानी में रखी जाती है. पेपर प्रिंट करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग जगहों पर रखा जाता है और उनकी सख्त निगरानी होती है. पेपर की सुरक्षा बैंकों और कैश कैरी करने वाली गाड़ियों से भी अधिक होता है. इसके अलावा इन वाहनों में सैटेलाइट नेविगेशन और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम होते हैं. वाहनों के ड्राइवर एग्जाम अथॉरिटी के अधिकारी और पुलिस-मिलिट्री के लोग होते हैं.