भारत में इंजीनियरिंग पढ़ने वाले हजारों छात्रों की तरह अमन गोयल का भी एक सपना था कि वह सिलिकॉन वैली में इंटर्नशिप करने जाए. अच्छी सैलरी, बड़ा स्टार्टअप, कैलिफोर्निया का ऑफिस और अमेरिका में करियर बनाने का मौका अधिकतर युवाओं को आकर्षित करता है. करीब 10 साल पहले, IIT बॉम्बे के 20 साल के छात्र के रूप में अमन पहली बार सैन फ्रांसिस्को पहुंचे थे. उन्हें पालो ऑल्टो की कंपनी रूब्रिक में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग इंटर्नशिप मिली थी, जहां वे हर महीने 8,000 डॉलर कमा रहे थे.
हाल ही में X पर साझा की गई अपनी पोस्ट में अमन ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि उस समय यह सब किसी सपने जैसा लगता था. लेकिन धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि जिंदगी सिर्फ बड़ी सैलरी या विदेश में बस जाने तक सीमित नहीं है. इसी सोच ने उन्हें उस रास्ते से अलग दिशा चुनने के लिए प्रेरित किया.
पोस्ट में इन बातों का जिक्र
अमन गोयल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह किसी सपने जैसा लग रहा था. सिलिकॉन वैली की इस इंटर्नशिप ने उन्हें स्टार्टअप्स की तेज रफ्तार दुनिया से करीब से परिचित कराया. वहां उन्होंने बड़े स्तर पर प्रोडक्ट बनाने वाली इंजीनियरिंग टीमों को काम करते देखा, बैकएंड सिस्टम्स पर गहरी चर्चाएं सुनीं और ऐसी वर्क कल्चर को महसूस किया जहां हर दिन कुछ नया बनाने और तेजी से प्रयोग करने पर जोर था. अमन ने बताया कि IIT बॉम्बे के एक सीनियर, जो उनके मेंटर भी थे ने उन्हें डेटाबेस और स्केलेबल सिस्टम्स की दुनिया से इस तरह परिचित कराया कि टेक्नोलॉजी को देखने का उनका नजरिया ही बदल गया.
उस समय रूब्रिक तेजी से बढ़ रही एक स्टार्टअप कंपनी थी. बाद के वर्षों में कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट भी हुई, लेकिन अमन को आज भी याद है कि वह उस सफर के शुरुआती दौर का हिस्सा थे. हालांकि, असली बदलाव उनके अंदर आया. अमन कहते हैं कि इस इंटर्नशिप ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया, लेकिन मन की शांति नहीं दी. उनके आसपास कई लोग अपना भविष्य बनाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि वे भारत लौटकर अपना कुछ बनाना चाहते हैं. यही वह सोच थी जिसने उन्हें साल 2016 में उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी.
लौट आए भारत
अमन ने पोस्ट में आगे बताया कि उन्होंने कॉलेज में रहते हुए लास्ट ईयर में कई ऐसी चीजें सीखीं जो उनके मुताबिक इंजीनियरिंग की क्लास में नहीं सिखाया जाता है. जैसे सेल्स, प्रोडक्ट सोच, हायरिंग, मार्केटिंग और बिजनेस बनाना. उन्होंने लिखा कि इंजीनियरिंग कभी मेरी सीमा नहीं थी. बिजनेस खड़ा करना मेरा जुनून बन गया. धीरे-धीरे इसी सोच ने उन्हें स्टार्टअप्स की दुनिया में ले गई. आगे चलकर उन्होंने Cogno AI की सह-स्थापना की, जिसे बाद में अधिग्रहित कर लिया गया. अब वह Greylabs AI पर काम कर रहे हैं.
अमन की पोस्ट किसी चमकदार स्टार्टअप सक्सेस स्टोरी जैसी नहीं थी, जहां सिर्फ फंडिंग और बड़े आंकड़ों की बात हो. यह ज्यादा एक ऐसे इंसान की सोच थी, जो अपने करियर, अपनी जगह और अपने समय को लेकर ईमानदारी से विचार कर रहा था. उनकी पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दी. किसी ने इसे शांत लेकिन बड़ा दांव कहा, तो किसी ने लिखा कि अब भारत में कुछ बनाना सिर्फ बैकअप प्लान नहीं रहा. लेकिन सबसे ज्यादा लोगों के दिल में जो बात रह गई वह थी मैं भारत वापस जाकर अपना कुछ बनाना चाहता था.
(नोट- यह खबर सोशल मीडिया पोस्ट में शेयर किए गए दावों के मुताबिक है. aajtak.in इसकी पुष्टि नहीं करता है.)