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भारत की हाइपरसोनिक छलांग... 12 मिनट की आग जो बदल देगी 12 मिसाइल प्रोजेक्ट की स्पीड

DRDO ने हैदराबाद में फुल-स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कम्बस्टर का 12 मिनट (720+ सेकंड) लंबा सफल ग्राउंड टेस्ट किया. यह भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोग्राम का बड़ा मील का पत्थर है. अब हाइपरसोनिक स्पीड वाली मिसाइलें रडार से बचकर दुश्मन को चुनौती देंगी. DRDO इस समय 12 हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है.

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ये तस्वीर है भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल LRAsHM की. (File Photo: PTI)
ये तस्वीर है भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल LRAsHM की. (File Photo: PTI)

भारतीय रक्षा तकनीक में एक बड़ा चमत्कार हुआ है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की हैदराबाद स्थित लैब DRDL ने एक फुल-स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कम्बस्टर का 12 मिनट से ज्यादा लंबा ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक किया है. यह टेस्ट भारत के भविष्य के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM) का दिल है.

जहां दुनिया के ज्यादातर टेस्ट 100 सेकंड से कम चलते हैं, वहां भारत ने 720 सेकंड (12 मिनट) का रिकॉर्ड बनाया है. यह सिर्फ एक टेस्ट नहीं है, बल्कि भारत को हाइपरसोनिक हथियारों की दौड़ में आगे ले जाने वाला कदम है. 

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स्क्रैमजेट क्या है और हाइपरसोनिक मिसाइल क्या होती है?

India Hypersonic Missile

  • हाइपरसोनिक स्पीड: ध्वनि की गति से 5 गुना ज्यादा तेज यानी 6100 किमी/घंटा या ज्यादा. इतनी स्पीड पर हवा का घर्षण धातु को पिघला सकता है.
  • स्क्रैमजेट इंजन: यह एक एयर-ब्रीदिंग इंजन है, जो हवा से ऑक्सीजन लेकर ईंधन जलाता है. सामान्य जेट इंजन से अलग, यह सुपरसोनिक स्पीड पर काम करता है. स्क्रैमजेट का मतलब है Supersonic Combustion Ramjet.
  • एक्टिव कूलिंग: Mach 6-7 पर तापमान हजारों डिग्री पहुंच जाता है. यह सिस्टम ईंधन या कूलेंट को इंजन की दीवारों से गुजारकर ठंडा रखता है, ताकि इंजन न पिघले. 

यह टेस्ट हैदराबाद के अत्याधुनिक SCPT (Scramjet Connect Pipe Test) फैसिलिटी में हुआ, जहां इंजन ने 12 मिनट से ज्यादा लगातार जलन (कम्बशन) बनाए रखी. 

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यह क्यों महत्वपूर्ण है?

  • बैलिस्टिक vs हाइपरसोनिक: बैलिस्टिक मिसाइलें ऊंची उड़ान भरती हैं. आसानी से ट्रैक हो जाती हैं. हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें नीचे उड़ती हैं. तेज और घुमावदार रास्ता लेती हैं, जिससे रडार से बचना आसान होता है. 
  • डिफेंस सिस्टम्स पर असर: S-400 या पैट्रियट जैसे सिस्टम इन तेज मिसाइलों को ट्रैक करने में मुश्किल होती है.
  • आत्मनिर्भर भारत: 100% घरेलू तकनीक, भारतीय इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ. कोई विदेशी प्रतिबंध नहीं रोक सकता.
  • ग्लोबल रेस: चीन और अमेरिका इस रेस में हैं. भारत अब तेजी से आगे बढ़ रहा है. 

DRDO ने कहा है कि वह 12 हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है. आइए हर एक प्रोजेक्ट को समझते हैं... 

LRAShM (Long Range Anti-Ship Missile या Hypersonic Glide Missile): रेंज 1500 किमी. सॉलिड बूस्टर से शुरू होती है, फिर क्रूज और ग्लाइड मोड में जाती है. चलते हुए जहाजों को भी मार सकती है.

ET-LDHCM (Extended Trajectory-Long Duration Hypersonic Cruise Missile): ग्राउंड लॉन्च (GL-HCM). बूस्टर से हाइपरसोनिक ग्लाइड फेज, फिर स्क्रैमजेट से लंबी क्रूज. अंत में सुपरसोनिक स्पीड पर टारगेट हिट. Mach 6-8 की स्पीड.  

AL-HCM (Air-Launched Hypersonic Cruise Missile): हवा से लॉन्च. DCR (Dual Combustion Ramjet) से वजन कम और एयर-ब्रीदिंग बेहतर. रैमजेट से स्क्रैमजेट में हॉट फ्यूल इंजेक्ट. ET-LDHCM का हिस्सा हो सकता है. 

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HSTDV (Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle): स्क्रैमजेट डेमो प्रोजेक्ट. कई बदलावों से गुजरा, अब LDHCM में विकसित हो रहा है. 

BrahMos-II (या BrahMos-K): BAPL (BrahMos Aerospace) का प्रोजेक्ट. सॉलिड बूस्टर और LFDSR (Liquid Fuel Dual Stage Ramjet) के साथ हाइपरसोनिक.

Agni-1P: 2 स्टेज मिसाइल, सॉलिड प्रोपेलेंट. री-एंट्री व्हीकल C-HGB जैसा, बूस्ट ग्लाइड मैन्यूवर. रेंज 1500 किमी. 

BM-04: 3 स्टेज प्लेटफॉर्म, Agni-P बेस पर. एडवांस C-HGB 4 कंट्रोल फिन्स के साथ. रेंज 1500 किमी. 

India Hypersonic Missile

CB-HGB (Common Boost Glide Hypersonic Glide Body): प्रोजेक्ट ध्वनि के तहत टेस्ट. हाइपरसोनिक स्टेज में मैन्यूवर.

DWB-HGB (Dual Warhead Boost Glide): लंबी स्ट्राइक के लिए. दुश्मन की BMD (बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस) से बचाव.

BB-HGB (Boost Bomb Hypersonic Glide Body): बूस्ट ग्लाइड, स्किप ग्लाइड और स्किप री-एंट्री से बचाव. प्रोजेक्ट ध्वनि का हिस्सा. 

AD-AH (Advanced Defence Against Hypersonics): AD-AM के साथ नेक्स्ट जेन BMD प्रोजेक्ट. दुश्मन की हाइपरसोनिक और MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंट री-एंट्री व्हीकल) से रक्षा. GPI (Glide Phase Interceptor) जैसा.

अन्य प्रोजेक्ट: DRDO के 12 प्रोजेक्ट्स में कुछ गुप्त हैं, लेकिन ये आक्रामक और डिफेंसिव दोनों रूपों में हैं. प्रोजेक्ट विष्णु ET-LDHCM को सपोर्ट करता है. 

यह टेस्ट भारत को हाइपरसोनिक क्लब में मजबूत बनाता है. अब भारत विदेशी हथियारों पर निर्भर नहीं रहेगा. आने वाले सालों में ये मिसाइलें भारत की रक्षा को अजेय बनाएंगी.

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