भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) ने करगिल युद्ध के समय टाइगर हिल (Tiger Hill) पर किए गए हमले का Video जारी किया है. 26 सेकेंड के इस वीडियो में दखिया गया है कि कैसे Mirage-2000 फाइटर जेट से लेजर गाइडेड बम मार कर आतंकियों की धज्जियां उड़ा दी गईं. ये वीडियो ऑपरेशन सफेद सागर का है.
Operation Safed Sagar करगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना का मिशन था, ताकि पाकिस्तानी फौजियों की मदद से जिन आतंकियों ने टाइगर हिल पर कब्जा किया था, उसे मुक्त कराया जाए. ये वीडियो है 24 जून 1999 का है. जिसमें एक मिराज फाइटर जेट टाइगर हिल के ऊपर मंडरा रहा है. उसकी स्क्रीन पर दुश्मन दिख रहा है.
इसके बाद लेजर गाइडेड बम मारकर उस पाकिस्तान कब्जे वाले पोस्ट को तबाह कर दिया जाता है. इस वीडियो को रिलीज करने का मकसद है, बेंगलुरू स्थित IAF एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम टेस्टिंग इस्टैबलिशमेंट (ASTE) की उपलब्धियों को बताना. यह संस्थान विमानों की तकनीक बनाने और उन्हें जरूरत के हिसाब से बदलने के लिए काम करता है. इसके अलावा वायुसेना की जरूरतों के हिसाब से विमानों, हथियारों में कई तरह के बदलाव करता है.
तीन साल पहले से विमानों में लगाए जा रहे थे नए बम
ASTE ही भारतीय वायुसेना के लिए नए हथियारों की टेस्टिंग करता है. नए सिस्टम की जांच-पड़ताल करता है. यहीं पर टेस्ट पायलट स्कूल भी है. 1996 में मिराज-2000 और जगुआर एयरक्राफ्ट में लेजर गाइडेड बम लगाए गए थे. ये जनरल परपज 1000 lb MK 83 बम थे. बाद में मिराज में Matra LGB बम भी लगाए गए.

मिराज-2000 में Litening LDP पॉड्स लगाए गए. इन पॉड्स में इंफ्रारेड सीकर भी लगे थे. ताकि रात में हमला कर सकें. कई टेस्ट फ्लाइट्स और परीक्षणों के बाद इन्हें आखिरकार फाइटर जेट्स में लगा दिया गया. 5 मई 1999 को मिराज-2000 की इन नए हथियारों के साथ करगिल वाले इलाके में टेस्ट फ्लाइट्स हुए. 16 जून को पहली सफलता मिली, जब मुंथो ढालो पर पॉड्स ने लॉजिस्टिक कैंप खोजा.
16 जून को दुश्मन के टारगेट्स पर हमला करने का आदेश मिला. 17 जून को कई टारगेट्स पर हमला किया गया. उस समय 4 मिराज फाइटर जेट्स 250 किलोग्राम के बम लेकर उड़ान भर रहे थे. 24 जून को पहली बार टाइगर हिल पर दुश्मन के पोस्ट पर हमला करने के लिए LGB का इस्तेमाल किया गया.
आइए जानते हैं करगिल युद्ध में इस्तेमाल किए गए फाइटर जेट्स की ताकत
Mirage 2000 फाइटर जेट
करगिल युद्ध हो या बालाकोट पर हमला. ये ही था. यह 2336 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से उड़ता है. इसकी रेंज 1550 किलोमीटर है. अधिकतम 55,970 फीट तक जा सकता है. इसमें 30 mm के दो रिवॉल्वर कैनन लगे हैं. ये हर मिनट 125 राउंड फायर करते हैं. कुल 9 हार्ड प्वाइंट्स होते हैं. यानी इतनी मिसाइलें, रॉकेट या बम का मिश्रण लगा सकते हैं. इसके अलावा 68 mm के Matra अनगाइडेड रॉकेट पॉड्स लगे होते हैं. हर पॉड्स में 18 रॉकेट होते हैं.

MiG-29 फाइटर जेट
पूरा नाम मिकोयान मिग-29. इसे एक ही पायलट उड़ाता है. 56.10 फीट लंबे फाइटर जेट में दो इंजन होते हैं. जो इसे ताकत देते हैं. इंटरनल फ्यूल कैपेसिटी 3500 किलोग्राम होती है. अधिकतम स्पीड 2450 KM प्रतिघंटा है. एक बार में 1430 KM की दूरी तक जा सकता है. मिग-29 फाइटर जेट में 7 हार्डप्वाइंट होते हैं. यानी सात अलग-अलग तरह के बम, रॉकेट और मिसाइल लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा इसमें एक 30 mm का ऑटोकैनन लगा होता है.
MiG-27 फाइटर जेट
एक ही पायलट उड़ाता है. अधिकतम स्पीड 1885 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है. कॉम्बैट रेंज 780 किलोमीटर है. 46 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसमें एक रोटनी कैनन और एक ऑटोकैनन लगा होता है. इसके अलावा सात हार्डप्वाइंट्स हैं. जिसमें चार तरह के रॉकेट्स, तीन तरह के मिसाइलें और सात तरह के बम लगाए जा सकते हैं. या फिर इनका मिश्रण बनाया जा सकता है.

लेजर गाइडेड बम
इजरायल के मदद से मिराज फाइटर जेट्स को लेजर गाइडेड बमों से लैस किया गया था. ये बम टारगेट को खुद ट्रैक करते हैं. वह इंफ्रारेड स्पेक्ट्रम या लेजर प्वाइंट के जरिए सीधा हमला कर सकते हैं. जहां लेजर पड़ा वहीं पर ये बम जाकर भारी तबाही करते हैं. पाकिस्तानियों के कब्जे वाले चोटियों पर इन बमों ने भारी तबाही मचाई थी.
Mi-8 हेलिकॉप्टर
2017 इन हेलिकॉप्टरों के सेवामुक्त कर दिया गया. लेकिन करगिल युद्ध में इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसमें तीन पायलट बैठते थे. यह 24 यात्रियों या 12 स्ट्रेचर या 1400 किलोग्राम वजन ढो सकता था. अधिकतम 250 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ता था. इसकी रेंज 495 किलोमीटर थी. इसमें छह हार्डप्वाइंट्स थे. जिसमें रॉकेट्स, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, बम या मशीन गन लगा सकते थे.

Mi-17 हेलिकॉप्टर
अब भी भारतीय वायुसेना इस्तेमाल करती है. तीन पायलट मिलकर उड़ाते हैं. यह 24 यात्रियों या 12 स्ट्रेचर या 1400 किलोग्राम वजन ढो सकता है. अधिकतम गति 280 किलोमीटर प्रतिघंटा है. 800 किलोमीटर की रेंज है. अधिकतम 20 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. छह हार्डप्वाइंट्स हैं. जिस पर रॉकेट्स, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, बम या मशीन गन लगा सकते थे.