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संदिग्ध आतंकी का खुलासा- इराक में ISIS के लिए किया काम, 7 हजार मिलती थी सैलरी

दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के लिए काम कर चुका आतंकी सुबहानी हाजा मोइद्दीन भारत आकर आतंकी साजिश रच रहा था. तमिलनाडु के रहने वाले 31 साल के इस आतंकी को एनआईए ने गिरफ्तार कर लिया है. उसने पूछताछ के दौरान कई अहम और बड़े खुलासे किए हैं.

कुख्यात आतंकी संगठन आईएसआईएस कुख्यात आतंकी संगठन आईएसआईएस

दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के लिए काम कर चुका आतंकी सुबहानी हाजा मोइद्दीन भारत आकर आतंकी साजिश रच रहा था. तमिलनाडु के रहने वाले 31 साल के इस आतंकी को एनआईए ने गिरफ्तार कर लिया है. उसने पूछताछ के दौरान कई अहम और बड़े खुलासे किए हैं.

जानकारी के मुताबिक, करीब दो साल पहले हाजा सोशल मीडिया के जरिए आईएसआईएस के सरगना बगदादी की ब्रेनवॉश ब्रिगेड के संपर्क में आया था. इसके बाद उनके बहकावे में आकर वह पिछले साल अप्रैल में चेन्नई से इस्तांबुल चला गया. उसने घरवालों को बताया कि उमराह के लिए विदेश जा रहा है.

इस्तांबुल से हाजा अपने ही जैसे अफगानिस्तानी और पाकिस्तानी साथियों के साथ इराक गया. वहां मौसूल में उसने आईएसआईएस कैंप में शरिया और लड़ाकू ट्रेनिंग हासिल की थी. यहां उसे हाईटेक हथियारों को चलाने की ट्रेनिंग दी गई. दो हफ्ते के बाद उसने ISIS की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया था.

बर्बरता और हिंसा देख भरा मन
इस लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए से उसे खाना-पीना और 100 डॉलर हर महीने बतौर सैलरी दी जाती थी. कहा जाता है कि युद्ध की बर्बरता और हिंसा देखकर वह ऊब गया. उसने अपने ISIS के आकाओं से संगठन छोड़ने के बात कही, जिसके बाद आतंकियों ने उसको बुरी तरह प्रताड़ित करना शुरू कर दिया.

ISIS ने फिर किया उससे संपर्क
इसके बाद किसी तरह ISIS के चंगुल से छूटकर मोइद्दीन ने इस्तांबुल में भारतीय दूतावास से संपर्क साधा. करीब 6 महीने बाद सितंबर में घर वापस आ गया. वह तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में पिछले एक साल से रह रहा था. वहां एक ज्वैलरी की दुकान पर काम कर रहा था. इसी बीच ISIS ने उससे फिर संपर्क किया.

आतंक की साजिश हुई नाकाम
इस तरह सुबहानी हाजा मोइद्दीन ISIS के एजेंडे की तहत अपने जैसे युवाओं को जोड़ने के किए चेन्नई, कोयम्बटूर और देश कई जगहों पर गया. उसका मकसद आतंक की घटना को अंजाम देने के लिए पैसा और बाकी सामान का बंदोबस्त करना था. उसका प्लान शिवकाशी जाकर केमिकल और बारूद खरीने का था.

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