उत्तर प्रदेश पुलिस की हथियार चलाने की ट्रेनिंग मज़ाक बनकर रह गई है. दंगे जैसे हालात को काबू करने के लिए जब आईजी ने पुलिस अफसरों का टेस्ट लिया, तो सब के सब फेल हो गए. आईजी साहब ने जब हथियारों के मामले में पुलिस वालों की ट्रेनिंग देखी, तो सब कुछ टांय-टांय फिस्स निकला.
यूपी के लोगों की सुरक्षा जिन पुलिस वालों के हवाले है, उनमें से कई को हथियार चलाना तो दूर उन्हें ठीक से पकड़ना भी नहीं आता. यह चौंकाने वाला खुलासा उस वक्त हुआ, जब कानपुर के आईजी ज़ोन ज़की अहमद कन्नौज जिले में पुलिस लाइन का निरीक्षण करने पहुंचे.

आईजी ने दंगा नियंत्रण के लिए पुलिस वालों को दी गई ट्रेनिंग का टेस्ट लिया. उस टेस्ट में एक-एक करके यूपी पुलिस के कई अफसर हथियार चलाने के मामले में फेल होते चले गए. आईजी ज़की अहमद ने कन्नौज ज़िले के तीनों पुलिस उपाधीक्षकों को दंगा नियंत्रण के वक्त इस्तेमाल होने वाले हथियार चलाने के लिए कहा. लेकिन तीनों अधिकारी फेल हो गए.

पुलिस लाइन में जमीन पर एंटी राइट और रिपीटर गन रखी थीं. मगर छिबरामऊ के सीओ बीपी सिंह सोलंकी तो हथियारों की पहचान भी नहीं कर पाए. यह सब देखकर आईजी का गुस्सा बढ़ता जा रहा था. उन्होंने सीओ तिर्वा सुरेंद्र पाल सिंह को बुलाया. मगर सीओ साहब बंदूक में कारतूस तक नहीं डाल सके. और बंदूक को उल्टा-पुल्टा करके कारतूस डालने की कोशिश करने लगे.

जब दंगा नियंत्रण हथियारों के इम्तिहान में पुलिस के अफसर फेल हो गए, तो आईजी ज़ोन जकी अहमद ने उन अफसरों को पुलिस लाइन में रखी थ्री नॉट थ्री राइफल चलाने को कहा. मगर उसका नतीजा भी ठीक नहीं रहा. पुलिस अफसर उस राइफल को भी ठीक से नहीं चला सके.

ज़िले के पुलिस अफसरों की हालत देखकर एसपी दिनेश कुमार को आईजी के सामने शर्मिंदा होना पड़ा. आईजी ज़की अहमद ने बाद में कहा कि मौजूदा दौर में यूपी के पुलिसकर्मियों और अफसरों को आधुनिक और दंगा नियंत्रण करने वाले हथियार चलाने की ट्रेनिंग नियमित रूप से दी जानी चाहिए.