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15 अधिकार मिलने के बाद भी आर्म्स लाइसेंस देने की पावर डीएम के पास

जिले के विकास का काम जिलाधिकारी ही करेंगे. आला अफसरों के मुताबिक आने वाले समय में कलेक्ट्रेट विकास योजनाओं का मुख्य केन्द्र होगा. जबकि धरना-प्रदर्शन और शांति भंग जैसे मामलों के निपटारे और सुनवाई का अधिकार अब पुलिस कमिश्नर के पास होगा.

यूपी के दो शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाणी लागू हो गई है यूपी के दो शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाणी लागू हो गई है

  • नोएडा और लखनऊ में अब पुलिस कमिश्नर सबसे बड़ा अफसर
  • आलोक सिंह को नोएडा का पहला पुलिस कमिश्नर बनाया गया है

नोएडा और लखनऊ जिले में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद कई अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास चले जाएंगे. लेकिन शस्त्र लाइसेंस बनाने, देने और निरस्तीकरण समेत एक्साइज के मामले डीएम यानी जिलाधिकारी के पास ही रहेंगे. साथ ही जिले के विकास का काम जिलाधिकारी ही करेंगे. आला अफसरों के मुताबिक आने वाले समय में कलेक्ट्रेट विकास योजनाओं का मुख्य केन्द्र होगा. जबकि धरना-प्रदर्शन और शांति भंग जैसे मामलों के निपटारे और सुनवाई का अधिकार अब पुलिस कमिश्नर के पास होगा.

नोएडा और लखनऊ में अब पुलिस कमिश्नर सबसे बड़ा अफसर होगा. जो स्वंय कई महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई और निपटारा कर सकेगा. अभी तक अधिकांश मामलों में पुलिस डीएम, एसीएम, एसडीएम आदि की संस्तुति से कई मामलों में कार्रवाई करती थी. लेकिन अब माना जा रहा है कि डीएम कई मामलों का निपटारा पहले की अपेक्षा जल्द कर सकेंगे. यहां तक कि इन दोनों जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण भी जल्द होगा.

वर्तमान भारतीय पुलिस अधिनियम जिले के डीएम को प्रशासनिक शक्ति प्रदान करता है. पुलिस एक्ट के भाग चार के अंतर्गत डीएम को पुलिस पर नियंत्रण का अधिकार होता है. सीधे और आसान शब्दों में कहें तो पुलिस के अफसर कई मामलों में खुद से फैसला लेने का अधिकार नहीं रखते. यहां तक कि लाठीचार्ज जैसा फैसला भी मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही लिया जाता है. किसी भी आपात स्थिति में पुलिस डीएम, कमिश्नर, शासन और सरकार के आदेश पर ही काम करती है. लेकिन पुलिस कमिश्नर प्रणाली में डीएम और एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार पुलिस को मिल जाते हैं.

कौन हैं नोएडा के पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह

आलोक सिंह वर्ष 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उन्हें नोएडा का पहला पुलिस कमिश्नर बनाया गया है. वह तेज तर्रार छवि के अधिकारी माने जाते हैं. आलोक सिंह कानपुर के आईजी रह चुके हैं. वर्तमान में वे मेरठ के आईजी थे. लेकिन इसी वर्ष 1 जनवरी को उनका प्रमोशन एडीजी पद के तौर पर हुआ है.

आलोक सिंह मूल रूप से अलीगढ़ के रहने वाले हैं. उन्हें पुलिस सेवा में सराहनीय कार्य करने के लिए डीजीपी सिल्वर और गोल्ड डिस्क से सम्मानित किया जा चुका है. आलोक सिंह ने कैम्ब्रिज यूनिवसिर्टी और इटली से विशेष ट्रेनिंग भी हासिल की है. उन्हें यूपी के नक्सल प्रभावित इलाकों में प्रभावशाली कार्य करने के लिए राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका है. आलोक सिंह रायबरेली, कानपुर, मेरठ, सीतापुर, उन्नाव और बिजनौर समेत 11 जिलों के पुलिस कप्तान रह चुके हैं.

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