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झारखंड: ACB ने जमीन की अवैध दलाली करते 6 सरकारी अमीन दबोचे

झारखंड में सरकारी जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त के कई सनसनीखेज मामला सामने आए हैं. बीते दिन इस मामले में रिश्वत लेते हुए 6 अमीनों को ACB ने गिरफ्तार किया है. कुछ दिन पहले भी पुलिस ने एक शख्स को गिरफ्तार किया था. उसके पास से काफी फर्जी दस्तावेज बरामद हुए थे. फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है.

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जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त का सनसनीखेज मामला
जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त का सनसनीखेज मामला

झारखंड में सरकारी जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त के कई सनसनीखेज मामला सामने आए हैं. बीते दिन इस मामले में रिश्वत लेते हुए 6 अमीनों को ACB ने गिरफ्तार किया है. कुछ दिन पहले भी पुलिस ने एक शख्स को गिरफ्तार किया था. उसके पास से काफी फर्जी दस्तावेज बरामद हुए थे. फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है.

यह मामला हजारीबाग जिले का है. यहां जमीन से जुड़े कई घोटाले सामने आए हैं. बीते दिन, भ्रस्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 1 लाख रुपयों की रिश्वत लेते हुए 6 सरकारी अमीनों को रंगे हाथ धर दबोचा. आरोपियों ने कागजात और जमीन के प्रकार को बदलने के लिए रैयतों से मोटी रकम वसूली थी. हालांकि, आरोपी अपने आप को निर्दोष बता रहे हैं.

इस समय जिले में वास्तविक जमीनों के मलिकों को बेदखल करने में लोग फर्जी दस्तावेजो का सहारा ले रहे हैं. इस गोरखधंधे में सरकारी अफसरों से लेकर बाबुओं तक मिले हुए हैं. आने वाले समय में जिले के अधिकारियों को इन मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रखने की जरूरत है. अमीनों की गिरफ्तारी के बाद कई और खुलासे होने की भी आशा जताई जा रही है.

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बीते दिनों भी पुलिस ने पुलिस ने गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन के अवैध खरीद-फरोख्त के धंधे में लिप्त एक शख्स को गिरफ्तार किया था. आरोपी के पास हुकुमनामा, रजिस्टर, दाखिल-खारिज के पेपर, रसीद, जैसे काफी फर्जी कागजात बरामद हुए थे, जिसमें साल 1926 तक के फर्जी दस्तावेज मौजूद थे.

बताते चलें कि जमीन का यह गोरखधंधा काफी समय से चल रहा है. यदि कोई अधिकारी इसकी जांच शुरू करता है तो उसका ट्रांसफर करा दिया जाता है. कुछ समय पहले जिले के पूर्व डीसी सुनील कुमार पर भी अपनी पत्नी के नाम से सरकारी जमीन के दस्तावेज बनवाकर पेट्रोल पंप खोलने का आरोप लगा था. उसका ट्रांसफर करवा दिया गया.

इसके बाद यहां एक आईएएस शशि रंजन ने भी जमीनों की जांच शुरू की. इसके बाद उनका तबादला भी एक सप्ताह में हो गया. इन तबादलों के बाद पूरा मामला ही ठंडे बस्ते में चला गया. ऐसे मामलों को मुख्यमंत्री जन-संवाद कार्यक्रम तक में उठाया जा चुका है, लेकिन कुछ फायदा नहीं मिल पाया. ऐसे में सरकार को इन मामलों में कड़ी कार्रवाई की जरूरत है.

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