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Explainer: यूपी में कर रहे हैं अंतरधार्मिक शादी तो पहले से कर लें ये काम, वरना होगी मुश्किल

यूपी के धर्म परिवर्तन प्रतिषेध कानून में धर्म परिवर्तन और शादी को लेकर अहम बातें कही गई हैं और नए प्रावधान भी किए गए हैं. आइए आपको बताते हैं कि अगर आप यूपी में अंतरधार्मिक शादी करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए क्या करना होगा.

अंतरधार्मिक शादी करने से पहले आवेदक को जिला प्रशासन को सूचना देनी होगी अंतरधार्मिक शादी करने से पहले आवेदक को जिला प्रशासन को सूचना देनी होगी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अंतरधार्मिक शादी के लिए भी देनी होगी सूचना
  • डीएम के कार्यालय से लेनी होगी अनुमति
  • लखनऊ में पुलिस ने रुकवाई थी शादी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आपसी सहमती से हो रही एक अंतरधार्मिक शादी को पुलिस ने रुकवा दिया. पुलिस ने मीडिया से ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन दोनों पक्षों को थाने बुलाकर यूपी में लागू किए गए उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध कानून की जानकारी दी. और उन्हें डीएम से शादी की अनुमति लेने के लिए कहा. ऐसा इसलिए हुआ कि शादी करने वाले पक्ष को नए कानून की जानकारी नहीं थी. 

यूपी सरकार ने 24 नवंबर को धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश को मंजूरी दी थी. और बाद में राज्यपाल ने इस अध्यादेश को कानून के रूप में मान्यता दे दी. यह नया कानून प्रदेश में लागू हो गया. इसमें धर्म परिवर्तन को लेकर महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं. शादी को लेकर भी अहम बातें कही गई हैं और नए प्रावधान भी किए गए हैं. आइए आपको बताते हैं कि अगर आप यूपी में अंतरधार्मिक शादी करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए क्या तैयारी करनी होगी. 

बिना धर्म परिवर्तन के अंतरधार्मिक विवाह!
लखनऊ की घटना से साफ हो गया कि यदि अलग-अलग धर्मों के बालिग लड़का-लड़की अपने परिवारवालों की आपसी सहमती से भी अंतरधार्मिक शादी (कोर्ट मैरिज या रजिस्टर्ड मैरिज) करना चाहते हैं, तब भी उन्हें जिलाधिकारी (DM) के यहां दो माह पहले आवेदन कर शादी के लिए अनुमति लेनी होगी. यही वो कारण था, जिसकी वजह से गुरुवार को लखनऊ में आपसी सहमति से हो रही शादी को पुलिस ने रुकवा दिया और उन्हें डीएम से विवाह के लिए अनुमति लेने के लिए कहा. हालांकि इस मामले में लखनऊ डीएम अभिषेक प्रकाश का कहना है कि वे चुनाव में व्यस्त होने की वजह से अभी तक नए कानून का अवलोकन नहीं कर पाए हैं. इसे देखने के बाद ही वो इस मामले पर कुछ कह पाएंगे.

शादी के लिए धर्म परिवर्तन अमान्य, शादी मानी जाएगी शून्य
इस कानून के मुताबिकअगर कोई व्यक्ति केवल शादी के लिए किसी लड़की का धर्म परिवर्तन करता है या कराता है, तो ऐसे में वो शादी शून्य की श्रेणी में आएगी. मतलब ये कि वो शादी कानून की नजर में अवैध होगी. ऐसे में नए कानून का उल्लंघन करने पर कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है. साथ ही आर्थिक जुर्माना भी किया जा सकता है.

ये है धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया
नए कानून में धर्म परिवर्तन के इच्छुक लोगों का ख्याल भी रखा गया है. ऐसे व्यक्तियों को तय प्रारूप के मुताबिक दो माह पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को सूचना देनी होगी. उन्हें घोषणा करनी होगी कि बिना किसी लालच, डर और बहकावे में आए वे धर्म परिवर्तन कर रहे हैं. यदि वे ऐसा नहीं करते तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा. दोषी पाए जाने पर 6 माह से 3 साल तक की सजा का प्रावधान है. साथ ही आर्थिक जुर्माना भी होगा.

एक धर्म से अन्य धर्म में परिवर्तन करने के इच्छुक व्यक्ति को विहित प्राधिकारी के समक्ष उदघोषणा करनी होगी कि यह धर्म परिवर्तन बिना किसी लालच, डर, प्रभाव, प्रपीड़न, बिना जोर जबरदस्ती, बिना किसी छल कपट के किया जा रहा है. या यह केवल शादी के लिए नहीं किया गया है.

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नाबालिग और एससी, एसटी महिलाओं के लिए कानून    
नए कानून के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की महिला या किसी नाबालिग लड़की का धर्म परिवर्तन करना या कराना भी इसी अपराध की श्रेणी में गिना जाएगा. नाबालिग लड़कियों, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के साथ किए गए उपरोक्त अपराध के दोषी को कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल कैद की सजा का प्रावधान है. साथ ही कम से कम 25 हजार रुपये का जुर्माना किया जा सकता है.

सामूहिक धर्म परिवर्तन पर अंकुश
इसी प्रकार से सामूहिक धर्म परिवर्तन करने या कराने के मामले में भी यह कानून लागू होगा. जिसके तहत ऐसा करने या कराने वाले सामाजिक संगठनों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा. दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में 3 साल से कम की सजा नहीं होगी लेकिन इस सजा को अधिकतम 10 वर्ष की कैद तक बढ़ाया जा सकता है. ऐसे मामलों में जुर्माने की रकम 50 हजार रुपये से कम नहीं होगी.

सिर्फ प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट करेंगे सुनवाई
इस नए कानून के तहत मिथ्या, बल, प्रभाव, प्रपीड़न, लालच या किसी धोखे से एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए मजबूर किए जाने को संज्ञेय अपराध माना गया है. यह अपराध गैर जमानती है. ऐसे मुकदमों की सुनवाई प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की अदालत में की जाएगी.

 

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