Ranchi Police ED Probe: रांची में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के जोनल ऑफिस का मामला गुरुवार को उस वक्त सुर्खियों में आ गया, जब रांची पुलिस की एक टीम वहां पहुंची और CCTV फुटेज जुटाए. यह कार्रवाई एक पूर्व झारखंड सरकारी कर्मचारी द्वारा ED अधिकारियों पर मारपीट के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद की गई. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, CCTV फुटेज को जांच के अहम सबूत के तौर पर सुरक्षित किया गया है. इस घटनाक्रम ने केंद्रीय एजेंसी और राज्य पुलिस के बीच संभावित टकराव की आशंका को भी जन्म दिया है. फिलहाल यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील माना जा रहा है.
पूर्व कर्मचारी ने लगाए गंभीर आरोप
जानकारी के अनुसार, पीने के पानी और स्वच्छता विभाग के एक पूर्व कर्मचारी ने 12 जनवरी को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में उसने आरोप लगाया कि कथित जल आपूर्ति घोटाले की पूछताछ के दौरान ED अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट की. पीड़ित का दावा है कि पूछताछ के नाम पर उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया. इसी शिकायत के आधार पर रांची पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ED कार्यालय की CCTV रिकॉर्डिंग खंगालनी शुरू की. इस मामले ने मानवाधिकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
DSP रैंक का अफसर कर रहा टीम की अगुवाई
सूत्रों के मुताबिक, रांची पुलिस की जो टीम ED ऑफिस पहुंची, उसमें DSP रैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे. उनके साथ एयरपोर्ट थाना प्रभारी भी मौजूद थे. पुलिस टीम ने सुबह के वक्त ED कार्यालय का दौरा किया और CCTV फुटेज को कब्जे में लिया. यह संकेत माना जा रहा है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और जांच उच्च स्तर पर चल रही है. हालांकि पुलिस ने अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
पुलिस की चुप्पी, कई सवाल बाकी
रांची पुलिस की ओर से अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई औपचारिक प्रेस बयान सामने नहीं आया है. पुलिस की चुप्पी के चलते अटकलों का बाजार गर्म है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल एक आपराधिक शिकायत की जांच है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक संदेश छिपा है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आधिकारिक रुख स्पष्ट किया जाएगा.
टकराव से जुड़ा ताजा घटनाक्रम
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में पश्चिम बंगाल में भी ED और राज्य पुलिस के बीच टकराव देखा गया था. वहां राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दफ्तर और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के दौरान जबरन घुसने और दस्तावेज चोरी के आरोप लगे थे. रांची की घटना को भी उसी कड़ी में देखा जा रहा है, जहां केंद्रीय एजेंसियों और राज्य प्रशासन के रिश्तों में तनाव बढ़ता दिख रहा है.
CCTV फुटेज की गहन जांच
रांची पुलिस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ED कार्यालय के CCTV फुटेज को बारीकी से खंगाला जा रहा है. यह देखा जा रहा है कि पूछताछ के दौरान क्या कोई अनियमितता या मारपीट हुई. फुटेज के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी. यह जांच ED अधिकारियों के लिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकता है.
ED ऑफिस के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ED कार्यालय के बाहर CISF के जवानों को तैनात किया गया है. सुरक्षा बढ़ाने का उद्देश्य किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया जा रहा है. केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी से साफ है कि हालात को गंभीर माना जा रहा है. इससे यह भी संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में मामला और तूल पकड़ सकता है.
बाबूलाल मरांडी का बड़ा आरोप
इस बीच झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई की आड़ में ED कार्यालय में मौजूद अहम सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश हो सकती है. मरांडी का कहना है कि ED दफ्तर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार मामलों के महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद हैं.
X पर पोस्ट कर जताई आशंका
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ED रीजनल ऑफिस को पुलिस घेर रही है. उन्होंने आशंका जताई कि पुलिस कार्रवाई के बहाने सबूतों को नष्ट या उनमें हेरफेर की जा सकती है. उनके इस बयान के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है.
हेमंत सोरेन बनाम ED, पुराना विवाद
यह पहली बार नहीं है, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और ED आमने-सामने आए हों. जनवरी 2024 में सोरेन ने खुद वरिष्ठ ED अधिकारियों के खिलाफ SC/ST थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. यह शिकायत दिल्ली स्थित उनके आवास पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई छापेमारी से जुड़ी थी. उस वक्त भी ED की कार्रवाई पर सवाल उठे थे.
‘समुदाय को बदनाम करने’ का आरोप
FIR के मुताबिक, हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया था कि ED ने उन्हें और उनके पूरे समुदाय को बदनाम करने और परेशान करने के उद्देश्य से छापेमारी की. उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था.इस शिकायत ने ED और राज्य सरकार के बीच तनाव को और गहरा कर दिया था.
जमीन घोटाले की जांच का एंगल
ED ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से झारखंड में जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण और माफिया नेटवर्क से जुड़े एक बड़े रैकेट के सिलसिले में पूछताछ की थी. एजेंसी का दावा था कि यह जमीन घोटाला बेहद संगठित तरीके से अंजाम दिया गया. इसी जांच के तहत ED की कई कार्रवाइयां हुईं, जिन पर बाद में सवाल उठे.
SC/ST एक्ट उल्लंघन का मामला कोर्ट में
हेमंत सोरेन ने ED अधिकारियों पर SC/ST एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए झारखंड हाईकोर्ट में CBI जांच की मांग की थी. उनका कहना था कि जांच एजेंसी के कुछ अधिकारियों ने कानून का उल्लंघन किया. इस मामले में उन्होंने मानसिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक उत्पीड़न की बात भी FIR में दर्ज कराई थी.
कोर्ट में लंबित मामला
फिलहाल, यह पूरा मामला अदालत में लंबित है और किसी भी पक्ष को अभी राहत नहीं मिली है. रांची पुलिस की ताजा कार्रवाई, ED के आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को और गरमा दिया है. आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी लड़ाई के साथ-साथ बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले सकता है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से मना कर दिया है और हाई कोर्ट को संबंधित दिशा निर्देश दिए हैं.