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वायरल वीडियो, इंजेक्शन और मौत के बाद सुसाइड नोट... 25 साल की साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमय मौत का सच!

राजस्थान की युवा साध्वी प्रेम बाईसा की जोधपुर में संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. मौत से पहले उन्हें लगाया गया इंजेक्शन, 6 महीने पुराना वायरल वीडियो और मौत के 3 घंटे बाद पोस्ट हुआ उनका सुसाइड नोट... ये महज इत्तेफाक है या कोई साजिश? पढ़ें पूरी कहानी.

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साध्वी का एक आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुआ था (फोटो-ITG)
साध्वी का एक आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुआ था (फोटो-ITG)

Jodhpur Sadhvi Mysterious Death: राजस्थान की जानी-मानी युवा साध्वी प्रेम बाईसा के कथावाचन और भजन के प्रोग्राम में अक्सर हजारों की भीड़ इकट्ठा होती थी. लेकिन बुधवार, 28 जनवरी की शाम एकाएक कुछ ऐसा हुआ कि महज 25 साल की साध्वी प्रेम बाईसा की जोधपुर में रहस्यमयी हालात में मौत हो गई. अपनी मौत से कुछ देर पहले ही उन्हें एक इंजेक्शन लगाया गया था और इसी के बाद उनकी तबीयत कुछ ऐसी बिगड़ी कि फिर वो रिकवर ही नहीं कर सकी. आश्रम से बीमार हालत में जब लोग साध्वी को लेकर अस्पताल पहुंचे, तब तक उनकी जान जा चुकी थी.

अब साध्वी प्रेम बाईसा की मौत सवालों के घेरे में है. शक जताया जा रहा है कि उनकी मौत सामान्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई गहरी साजिश है. और साध्वी की मौत को लेकर जताए जा रहे इस शक के पीछे मोटे तौर पर तीन वजहें हैं.

वजह नंबर 1 
मौत के करीब 3 घंटे बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया उनका सुसाइड नोट.

वजह नंबर 2 
करीब 6 महीने पहले सामने आया साध्वी का एक आपत्तिजनक वीडियो.

वजह नंबर 3 
मौत से ठीक पहले साध्वी प्रेम बाईसा को लगाया गया रहस्यमयी इंजेक्शन.

फिलहाल, साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध हालत में हुई मौत पर जोधपुर की बोरानाडा पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली है, लेकिन समझा जाता है कि उनकी मौत का राज़ इन्हीं 3 वजहों के इर्द-गिर्द कहीं छुपा है. तो भली चंगी साध्वी के महज दो दिन पहले मामूली रूप से बीमार पड़ने और फिर एक इंजेक्शन के बाद एकाएक उनकी मौत हो जाने के इस मामले का सच जानने के लिए आपको पूरे वाकये को सिलसिलेवार तरीके से समझने की दरकार है. जिसकी शुरुआत होती है, जुलाई 2025 से.

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13 जुलाई 2025
यही वो तारीख थी, जब साध्वी प्रेम बाईसा का एक प्राइवेट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इस वीडियो को लेकर तरह-तरह के सवाल उठाए जाने लगे. उस वीडियो की तस्वीरों के मंज़र के बारे में बताएं तो ये वीडियो जोधपुर के उसी कुटीर आश्रम का बताया जाता है, जहां साध्वी प्रेम बाईसा की रिहायश थी. वीडियो की तारीख के मुताबिक ये तस्वीरें 8 जनवरी 2021 की रात दस बज कर 22 मिनट की हैं. 

वीडियो में साध्वी एक कमरे में बिस्तर पर लेटी नजर आ रही हैं, जबकि कमरे में आती-जाती एक महिला उनसे बातचीत कर रही है. इसी बीच भगवा वस्त्र पहने, सिर पर पगड़ी लगाए एक शख़्स सीधे साध्वी के कमरे में पहुंचता है और साध्वी के गालों को छू कर उन्हें पुचकारने लगता है. इसके बाद साध्वी बिस्तर से उठती है और उस आदमी के गले लग जाती हैं. वो शख्स भी साध्वी को आलिंगन करते हुए थोड़ी देर के लिए उन्हें गोद में उठा लेता है.

बस, इसी वीडियो के बहाने सोशल मीडिया पर लोग साध्वी और उनके साथ नजर आ रहे शख्स को जज करने लगते हैं और उनके आचरण पर सवाल उठाए जाने लगते हैं. असल में वीडियो में नजर आ रहा ये शख्स कोई और नहीं बल्कि साध्वी का गुरु वीरमनाथ है, जिसे साध्वी अपना पिता मानती हैं. लेकिन पिता के साथ साध्वी की इन निजी तस्वीरों ने साध्वी और उनके गुरु के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए थे. 

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ये और बात है कि तब साध्वी ने इस वीडियो के लीक होने पर ना सिर्फ आश्रम के ही कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी, बल्कि इसे लेकर अपनी सफाई भी दी थी. साध्वी ने तब बताया था कि ये तस्वीरें तब की हैं, जब वो गहरे अवसाद में थीं और उनके पिता उनसे गले लग कर उन्हें ढांढस बंधा रहे थे.

साध्वी ने इस वीडियो को लेकर जो शिकायत दी थी, उसमें उन्होंने बताया कि उन्हें बदनाम करने के इरादे से उनके आश्रम के ही कुछ लोगों ने साजिशन इस वीडियो को वायरल किया था और इसे वायरल होने से रोकने के लिए उनसे 20 लाख रुपये की मांग की थी. साध्वी ने जिन तीन लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया था, उसमें उनके आश्रम में काम करने वाले जोगाराम, उसकी पत्नी कृष्णा और ड्राइवर रमेश के अलावा दो और लोग शामिल थे. 

साध्वी ने तब बताया था कि इन्हीं लोगों ने आश्रम में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज चोरी से निकलवाई और उस फुटेज को उन्हें बदनाम करने के इरादे से वायरल कर दिया और ऐसा करने से पहले उनसे अवैध वसूली की कोशिश भी हुई. इस वीडियो के वायरल होने के बाद साध्वी, उनके गुरु वीरमनाथ और आश्रम की साख को बट्टा तो लगा ही, साध्वी के कई असाइनमेंट भी कैंसल हो गए. 

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इस वीडियो ने उनकी जिंदगी में कितना असर डाला, इसका अंदाजा आप बस इसी बात से लगाइए कि साध्वी ने इस वीडियो के सामने आने के बाद कथित तौर पर शंकराचार्य समेत दूसरे बड़े संतों से बात की थी और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा तक देने की बात कही थी, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं और अब साध्वी की मौत के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए उनके सुसाइड नोट उनकी मौत को साध्वी के इसी वायरल वीडियो से जोड़ कर रख दिया.

अब इससे पहले कि हम और आगे बढ़ें, साध्वी प्रेम बाईसा के इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए उनके सुसाइड नोट के बारे में आपको बताते हैं, जिसने इस मामले को बुरी तरह उलझा दिया है. क्योंकि उनका ये सुसाइड नोट उनकी मौत के करीब तीन घंटे बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया है. ऐसे में सवाल है, आखिर कैसे? लेकिन इस सवाल का जवाब जानने से पहले आइए साध्वी की पोस्ट पर नजर डालते हैं-

"मैंने हर एक क्षण सनातन प्रचार के लिए जीया. दुनिया में सनातन धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है. आज अंतिम श्वास तक मेरे दिल में सनातन ही है. मेरा सौभाग्य है कि मैंने सनातन धर्म में जन्म लिया और अंतिम श्वास भी सनातन के लिए ली, मेरे जीवन में आदि जगतगुरु शंकराचार्य भगवान, विश्व योग गुरुओं व पूज्य संत महात्माओं का हर पल आशीर्वाद रहा. मैंने आदि गुरु शंकराचार्य और देश के कई महान संत महात्माओं को लिखित पत्र लिखा. अग्निपरीक्षा के लिए निवेदन किया लेकिन प्रकृति को क्या मंजूर था? मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा लेकिन ईश्वर और पूज्य संत महात्माओं पर पूर्ण भरोसा है. मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा."

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जाहिर है, इस सुसाइड नोट में वो अपनी मौत की बात भी लिख रही हैं और साथ अग्निपरीक्षा देने की पेशकश करने का भी जिक्र कर रही हैं. वो पेशकश, जो वो पहले भी वायरल वीडियो के सामने आने के बाद कर चुकी थी. यानी उनकी मौत का कनेक्शन उस वायरल वीडियो से भी जुड़ता है, जिसने उनकी और उनके गुरु की जिंदगी में भूचाल ला दिया था. 

मगर, सबसे बड़ा पेच ये है कि उनकी मौत शाम करीब साढ़े 5 बजे के आस-पास हुई और इंस्टाग्राम पर ये पोस्ट रात करीब साढ़े 9 बजे किया गया. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये वाकई उनका सुसाइड नोट है या फिर किसी ने मामले को उलझाने के लिए उनकी मौत के बाद इसे सोशल मीडिया में पोस्ट किया है.

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को लेकर जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक वो पिछले 2 दिनों से बीमार चल रही थी और उन्होंने बुधवार की शाम को आश्रम में ही एक कपाउंडर को बुलवा कर एक इंजेक्शन लगवाया था, लेकिन इस इंजेक्शन के बाद ही उनकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई और उनके हाथ-पांव ढीले पड़ गए. जिसके बाद उनके गुरु वीरमराम और आश्रम के सेवादार उन्हें लेकर एक प्राइवेट अस्पताल में पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें ब्रॉट डेड यानी मुर्दा करार दिया.

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अभी मौत से पहले उन्हें लगाए गए उस इंजेक्शन की बात होती, इससे पहले ही साध्वी का तथाकथित सुसाइड नोट सामने आ गया. ऐसे में सवाल उठने लगे कि क्या ये सुसाइड नोट वाकई साध्वी ने ही लिखा था, जिसे उन्होंने रात साढ़े 9 बजे कि लिए शेड्यूल कर दिया था? या फिर उनकी जान लेकर किसी ने इसे सुसाइड बताने के लिए उनके सोशल मीडिया हैंडल से खुद ही इसे पोस्ट कर दिया? जाहिर है फिलहाल पुलिस को इसी सच का पता लगाना है.

फिलहाल, शक के घेरे में साध्वी को इंजेक्शन लगाने वाला शख्स भी है. और इंजेक्शन के जरिए दी गई दवाई भी. पुलिस ने साध्वी के शव को कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम करवाया है, उम्मीद की जाती है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद मौत की असली वजह भी साफ होगी. ये पता चल जाएगा कि साध्वी को इंजेक्शन के जरिए जानबूझ कर कोई जहरीली दवा दी गई या फिर बीमारी के दौरान दी गई कोई दवा रिएक्शन कर गई? जिस तरह से साध्वी का सुसाइड नोट सामने आया है, उसे देख कर शक ये भी है कि कहीं साध्वी ने जान देने के लिए ही तो खुद को कोई जहरीला इंजेक्शन नहीं लगवा लिया? सवाल कई हैं. जिनका जवाब पुलिस को ढूंढना है.

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इस बीच साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को लेकर रहस्य तब और भी गहरा गया, जब पता चला कि साध्वी के साधना कुटीर आश्रम से अब सारे सीसीटीवी कैमरे हटा दिए गए हैं. सवाल ये हैं कि ये कैमरे क्यों हटाए गए और इसके लिए आदेश किसने दिया? इस वक्त जब मामले का इनवेस्टिगेशन चल रहा है, आश्रम से कैमरों को हटाया जाना क्या सबूत मिटाने की कोशिश नहीं है? पुलिस इस पहलू पर भी जांच कर रही है.

लोगों की शिकायत है कि साध्वी की मौत के बाद खुद साध्वी के पिता ने पहले उनके शव का पोस्टमार्टम करवाने से इनकार कर दिया था, लेकिन जब समाज के लोगों ने सच्चाई सामने लाने के इरादे से उन पर दबाव बनाया, तो फिर वो राजी हुए. साध्वी के पिता और गुरु वीरमनाथ के साथ इस मामले पर साध्वी के अनुयायियों के बीच कहासुनी भी हुई. जाहिर है, ये सारे तथ्य इस तरफ इशारा करते हैं कि दाल में कुछ काला जरूर है. कुछ तो ऐसा जरूर है, जिसे छुपाने की कोशिश हो रही है.

(जोधपुर से डॉ. अशोक शर्मा का इनपुट)

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