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एंटीलिया केस: कार मालिक मनसुख हिरेन को परेशान कर रहे थे कुछ लोग, पूर्व जांच अधिकारी का खुलासा

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में तैनात एपीआई सचिन वाज़े इस केस के पहले आईओ थे. लेकिन बाद में इस मामले की जांच का जिम्मा एसीपी नितिन अल्कानुर को सौंप दिया गया. आईओ के रूप में वाज़े को इस मामले से हटा दिया गया था.

पहले इस मामले की जांच एपीआई सचिन वाज़े को दी गई थी पहले इस मामले की जांच एपीआई सचिन वाज़े को दी गई थी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुंबई क्राइम ब्रांच के एपीआई हैं सचिन वाज़े
  • संदिग्ध कार के मामले में पहले IO थे सचिन
  • सभी आरोपों को बताया निराधार

मुंबई में मुकेश अंबानी के बहुमंजिला निवास स्थान एंटीलिया के बाहर मिली संदिग्ध स्कॉर्पियो कार का मामला उलझता जा रहा है. शुक्रवार को एक तरफ महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से करवाने की मांग की. वहीं दूसरी ओर संदिग्ध स्कॉर्पियो कार के मालिक मनसुख हिरेन की संदिग्ध मौत हो गई. एंटीलिया के बाहर मिली कार के मामले में पहले जांच अधिकारी रहे सचिन वाज़े ने इस बारे में आजतक/इंडिया टुडे से खास बातचीत की.   

एपीआई सचिन वाज़े इस केस के पहले आईओ थे. लेकिन बाद में इस मामले की जांच का जिम्मा एसीपी नितिन अल्कानुर को सौंप दिया गया. आईओ के रूप में वाज़े को इस मामले से हटा दिया गया था. सचिन वाज़े ने आजतक से बात करते हुए कहा कि मैं मनसुख हिरेन को जानता हूं, क्योंकि वह भी ठाणे से हैं. हाल ही में मेरी उनसे कोई मुलाकात नहीं हुई थी. वह ठाणे से थे, इसलिए हो सकता है मैं उन्हें जानता हूं या फिर कभी उनसे मिला हूं.

सचिन वाज़े के मुताबिक मनसुख हिरेन को वास्तव में शिकायत थी कि कुछ पुलिस अधिकारी और रिपोर्टर हैं, जो उन्हें परेशान कर रहे थे. पुलिसवाले और पत्रकार उन्हें परेशान करते रहे. इससे ज्यादा मैं और कुछ नहीं जानता.

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडनवीस के आरोपों पर सचिन वाज़े ने कहा कि मैं मौके पर पहुंचने वाला पहला व्यक्ति नहीं था. पहले वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर गामदेवी पहुंचे, उनके बाद ट्रैफिक अधिकारी पहुंचे. फिर डीसीपी जोन 2 मौके पर पहुंचे. इसके बाद बीडीडीएस टीम मौके पर पहुंची. इसके बाद मैं अपनी क्राइम ब्रांच की टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचा था.

सचिन वाज़े ने बताया कि मुझे पता चला है कि मनसुख हिरेन ने ठाणे के कमिश्नर और मुंबई के पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी कि कुछ लोग हैं, जो उसे परेशान कर रहे हैं. वाज़े ने साफ कहा कि जब मनसुख हिरेन की कार चोरी हुई थी, तो वो उनसे नहीं मिले थे. आरोप है कि मनसुख क्रॉफर्ड मार्केट में आए थे और मुझसे मिले थे, यह बात पूरी तरह से झूठ है. 

बता दें कि अंबानी के घर के करीब जो संदिग्ध काली कार मिली थी, वो मनसुख हिरेन की कार थी, जिसे चोरी कर लिया गया था. उस कार से जिलेटिन की 20 छड़ें बरामद हुई थीं. जिनका इस्तेमाल विस्फोट के लिए किया जाता है. और उसमें से धमकीभरी चिट्ठी भी मिली थी. चिट्ठी में कहा गया था कि ये सिर्फ ट्रेलर है. नीता भाभी, मुकेश भैया, ये तो सिर्फ एक झलक है. अगली बार ये सामान पूरा होकर तुम्हारे पास आएगा और पूरा इंतजाम हो गया है.

जांच अधिकारियों ने खुलासा किया था कि उस दिन रात 1 बजे के करीब स्कॉर्पियो कार वहां खड़ी की गई थी. वहां दो वाहन देखे गए थे, जिनमें स्कॉर्पियो कार के अलावा एक इनोवा भी थी. स्कॉर्पियो कार का ड्राइवर उसे वहां छोड़कर चला गया था. संदिग्ध कार की सूचना अंबानी के घर की सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने स्थानीय पुलिस को दी थी. 

 

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