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लखनऊ गोलीकांडः सांसद पुत्र ने क्यों रची खुद पर गोली चलवाने की साजिश, तफ्तीश जारी

सवाल ये है कि क्या आखिर ये पहेली है क्या? यूपी पुलिस पिछले दो दिन से खुद पर खुद से हमला करवाने वाले यूपी के मोहनलालगंज से बीजेपी सांसद कौशल किशोर के बेटे आयुश की तलाश कर रही है. हमलावर साला गिरफ्तार है, मगर पीड़ित सांसद-पुत्र फरार है. मगर सवाल ये कि आखिर कोई खुद पर खुद से हमला करवाएगा क्यों?

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शातिर सांसद पुत्र आयुष किशोर अभी तक फरार है शातिर सांसद पुत्र आयुष किशोर अभी तक फरार है

क्या आपने कभी सुना है कि किसी को गोली लगे, गोली लगने से वो जख्मी हो जाए, इसके बाद वो अस्पताल जाए, मगर पुलिस उसे ही ढूंढना शुरू कर दे, आप यकीन करें, न करें, लेकिन लखनऊ में यही कुछ हुआ है. एक सांसद के बेटे पर गोली चलाई जाती है, गोली उसे लगती भी है, वह जख्मी भी होता है, अस्पताल भी जाता है, लेकिन वहां से गायब हो जाता है, क्योंकि पुलिस उसे ही ढूंढ रही थी. सवाल ये है कि क्या आखिर ये पहेली है क्या?

यूपी पुलिस पिछले दो दिन से खुद पर खुद से हमला करवाने वाले यूपी के मोहनलालगंज से बीजेपी सांसद कौशल किशोर के बेटे आयुश की तलाश कर रही है. हमलावर साला गिरफ्तार है, मगर पीड़ित सांसद-पुत्र फरार है. मगर सवाल ये कि आखिर कोई खुद पर खुद से हमला करवाएगा क्यों?

उस शख्स ने खुद ही खुद पर हमले का प्लान बनाया. उसने खुद पर खुद के साले से ही गोली चलवाई. उसने खुद ही खुद का इलाज भी करवा लिया और फिर साले को फंसाकर खुद फरार हो गया. वो कोई और नहीं बल्कि एक सांसद-पुत्र है. जिसने इस हमले को अंजाम दिया. पुलिस पिछले दो दिन से खुद पर खुद से हमला करवाने वाले आयुष किशोर को पुलिस तलाश रही है. वो यूपी के मोहनलालगंज से बीजेपी सांसद कौशल किशोर का बेटा है. हमलावर साला तो इस मामले में गिरफ्तार है, मगर पीड़ित सांसद-पुत्र फरार है. मगर सवाल ये कि आखिर कोई खुद पर खुद से हमला करवाएगा क्यों? इसका जवाब सवाल में ही छुपा हुआ है. 

2 मार्च 2021, रात 2.30 बजे
सबसे पहले पूरी कहानी को शुरुआत से समझते हैं. जिस वक्त लखनऊ नींद के आगोश में सो रहा था. उस वक्त पुलिस महकमें में हड़कंप मचा हुआ था. देर रात करीब ढाई बजे लखनऊ की मोहनलालगंज संसदीय सीट से बीजेपी सांसद कौशल किशोर के बेटे आयुष को अज्ञात हमलावर ने गोली मार दी थी. गोली लगने से आयुष को मामूली चोट आई थी. जिसे ट्रामा सेंटर लाया गया. गोली लगने से आयुष को मामूली चोट आई थी. इसलिए कुछ ही देर में प्राथमिक इलाज के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया. अब चूंकि मामला बीजेपी सांसद के बेटे से जुड़ा हुआ था, लिहाज़ा पुलिस में हड़कंप मच गया और फौरन छानबीन शुरू की गई. 

सुबह पुलिस को बीजेपी सांसद कौशल किशोर ने बताया कि देर रात उनके तीस साल के बेटे आयुष अपने साले आदर्श के साथ घर के बाहर टहल रहे थे. तभी लखनऊ के मड़ियाव इलाके के छठामील चौराहे पर अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दी. उनका बेटा किसी आरोपी को पहचान नहीं पाया और आरोपी गोली मारकर वहां से फरार हो गए.
  
मामला यूपी की राजधानी लखनऊ का था. गोली बीजेपी के सांसद के बेटे पर चली थी. तो ऐसे में हड़कंप तो मचना ही था. लेकिन पुलिस का माथा तब ठनका जब मामले को लेकर ना ही सांसद की ओर से कोई केस दर्ज कराया गया और ना ही शिकायत की गई. महज कुछ घंटे के इलाज के बाद जब सांसद के बेटे को ट्रामा सेंटर से छुट्टी मिल गई. तो ये संदेह और भी गहरा गया. आरोपियों की तलाश शुरू हुई तो पूरा केस ही बदल गया. पुलिस ने मौका-ए-वारदात के आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो उसमें आयुष के साले की हरकत संदिग्ध लगी. पुलिस ने आयुष के घर की तलाशी ली तो वो पिस्टल बरामद हो गई, जिससे हमला किया गया था. 

अब पूरी कहानी में नया मोड़ आ चुका था. जिस जीजा और साले पर गोली चलाने की बात कही जा रही थी. वो साजिश उन्होंने खुद ही रची थी. लखनऊ पुलिस ने अब मामले की सबसे अहम कड़ी को पकड़ा. आयुष का साला आदर्श. जिससे जब पूछताछ की गई तो चौंकाने वाली बात सामने आई. साले के मुताबिक आयुष कुछ लोगों को फंसाना चाहता था. ऐसे में आयुष ने साले को उस पर हमला करने के लिए तैयार किया. साले के मुताबिक वो डरा हुआ था. उसने साजिश में शामिल होने से इनकार किया लेकिन आयुष ने उस पर दबाव बनाया. जिसके बाद वो तैयार हो गया.

आदर्श के मुताबिक आयुष ने उसे भरोसा दिलाया कि अगर मामले में कुछ गड़बड़ हुई तो वो मैनेज कर लेगा. आदर्श और आयुष ने पूरी प्लानिंग के साथ इस साजिश को अंजाम दिया. लेकिन 7 घंटे के अंदर ही उनके प्लान की पोल खुल गई. हालांकि पुलिस आयुष के साले आदर्श के बयान को ही सौ फीसदी सही मानकर नहीं चल रही. सांसद के फरार बेटे का अभी पकड़ा जाना और उसका बयान आना बाकी है. जिससे साले के बयान का मिलान कराया जाएगा.

पुलिस की तरफ से करीब 14 घंटे बाद एफआईआर दर्ज की गई है. छठामील चौकी इंचार्ज राधेश्याम मौर्य की तरफ से धोखाधड़ी, साजिश रचने और आर्म्स एक्ट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है. वहीं सांसद के बेटे को गोली मारने के आरोपी आदर्श को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस सांसद के बेटे आयुष की तलाश कर रही है. 

इस गोलीकांड ने 7 घंटे के अंदर जिस तरह से यू टर्न लिया. वो अभी भी उतना आसान नहीं हैं. इस मामले में कई पेच हैं. शुरुआती घंटों में जो आयुष क्राइम थ्रिलर का पीड़ित था वो बाद में खुद ही इस गोलीकांड का मास्टरमाइंड निकला. बीजेपी सांसद के बेटे आयुष को लेकर जो कहानी सामने आई है, वो किसी फैमिली ड्रामे से कम नहीं. पिछले साल जब पिता कोरोना के चलते अस्पताल में एडमिट हुए तो आयुष ने अपने से दो साल बड़ी लड़की से लव मैरिज कर ली. आयुष का परिवार शादी के खिलाफ था. क्योंकि आयुष के बड़े भाई की ही शादी अभी तक नहीं हुई थी. मगर शादी ना करवाने पर आयुष लगातार अपने सांसद पिता को खुदकुशी करने की धमकी दे रहा था. 

शादी से नाराज़ बीजेपी सांसद कौशल किशोर ने आयुष को घर से अलग रहने का फरमान सुना दिया. परिवार ने रिश्ते तोड़ लिए. लिहाज़ा आयुष छठा मील इलाके में किराए के मकान में रह रहा था. जहां आयुष का साला भी रहता था.  पुलिस ने उस घर में छापा मारा तो वहां से पुलिस को वो पिस्टल भी बरामद हो गई जिससे आयुष पर हमला किया गया था. आयुष ने शादी तो कर ली लेकिन परिवार ने ना उसकी पत्नी और ना ही उसके ससुराल वालों से कोई रिश्ता रखा. उल्टे आयुष के परिवार और ससुरालवालों में विवाद चल रहा था. हालांकि आयुष अपने घर कभी कभी मिलने ज़रूर आता था. बकौल घरवाले के आयुष ने शादी ज़रूर कर ली थी लेकिन वो अपनी पत्नी से परेशान था. 

पूरी कहानी नाटकीय उतार चढ़ाव से भरी हुई है. अगर साले आदर्श के बयान में सच्चाई है, तो अब सवाल ये खड़ा होता है आखिर वो कौन लोग थे, जिनको आयुष फंसाना चाहता था. मामला काफी पेचीदा है. कहानी में कई ट्विस्ट हैं. जिसकी कड़ियों को जोड़ने का काम चल रहा है. लेकिन इतना साफ है कि ये कहानी अभी भी अधूरी हैं. जिसमें अभी कई और खुलासे होने बाकी हैं. जो आयुष की गिरफ्तारी के बाद ही मुमकिन है.  

 

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