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50 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED का बड़ा एक्शन, इंडियन PAC कंसल्टिंग के डायरेक्टर विनेश चंदेल गिरफ्तार

ED ने इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर विनेश चंदेल को 50 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया. साथ ही इस मामले में हवाला नेटवर्क और फर्जी लेन-देन का खुलासा भी हुआ है. कोर्ट ने इस मामले में क्या एक्शन लिया है, जानने के लिए पढ़ें पूरी कहानी.

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ED ने इस मामले की जांच एक पुलिस केस के बाद शुरू की थी (फोटो-ITG)
ED ने इस मामले की जांच एक पुलिस केस के बाद शुरू की थी (फोटो-ITG)

दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर विनेश चंदेल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है. जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन और हवाला नेटवर्क के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है. यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुख्यालय की जांच यूनिट ने 13 अप्रैल 2026 को अंजाम दी. यह गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत की गई है.

ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच के आधार पर हुई. विनेश चंदेल कंपनी के संस्थापक, निदेशक और 33 प्रतिशत हिस्सेदार भी हैं. ED की यह कार्रवाई राजधानी दिल्ली में आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्ती का संकेत मानी जा रही है. जांच एजेंसी ने पहले से जुटाए गए सबूतों के आधार पर यह कदम उठाया.

इस मामले की शुरुआत दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR से हुई थी. उसी के आधार पर ED ने अपनी जांच शुरू की. शुरुआती जांच में ही कंपनी के वित्तीय लेन-देन में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आईं. एजेंसी को शक हुआ कि कंपनी के जरिए अवैध पैसों को वैध बनाने की कोशिश की जा रही थी. इसके बाद ED ने इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू की. जांच के दौरान कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आए, जिनसे मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े खेल का संकेत मिला.

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ED की जांच में सामने आया कि इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड ने अकाउंटेड और अनअकाउंटेड दोनों तरह के फंड्स हासिल किए. इसके अलावा बिना किसी ठोस बिजनेस आधार के अनसिक्योर्ड लोन भी लिए गए. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कंपनी ने फर्जी बिल और इनवॉइस जारी किए. इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए पैसों को इधर-उधर किया गया. कई मामलों में तीसरे पक्ष के जरिए पैसे ट्रांसफर किए गए, जिससे असली स्रोत छिपाया जा सके.

जांच एजेंसी को यह भी पता चला कि कंपनी ने हवाला नेटवर्क का सहारा लिया. इसमें घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाला चैनल का भी इस्तेमाल किया गया. इस नेटवर्क के जरिए बड़ी मात्रा में नकदी का लेन-देन किया गया. हवाला के माध्यम से पैसे को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया गया, जिससे उसका ट्रैक करना मुश्किल हो जाए. यह तरीका मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है. ED अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान कर रही है.

ED के अनुसार, अब तक की जांच में करीब 50 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को सफेद करने का मामला सामने आया है. यह रकम अलग-अलग तरीकों से सिस्टम में डाली गई और फिर उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई. जांच एजेंसी का मानना है कि यह रकम और भी बढ़ सकती है, क्योंकि अभी जांच जारी है. इस मामले में कई अन्य कंपनियों और व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आ सकती है. ED इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है.

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जांच के दौरान ED ने कई लोगों के बयान दर्ज किए हैं, जो इन ट्रांजैक्शनों से जुड़े हुए थे. इसके अलावा विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी भी की गई, जहां से कई अहम दस्तावेज और सबूत मिले. इन सबूतों के आधार पर विनेश चंदेल की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई. कानून के मुताबिक, अगर किसी कंपनी में अपराध निदेशक की सहमति या लापरवाही से होता है, तो उसे जिम्मेदार माना जाता है. इसी आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई है.

गिरफ्तारी के बाद विनेश चंदेल को अदालत में पेश किया गया. यह सुनवाई 13 अप्रैल की रात से शुरू होकर 14 अप्रैल की सुबह तक चली. पटियाला हाउस कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 दिन की ED कस्टडी मंजूर की. अब ED इस दौरान उनसे पूछताछ कर मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के अन्य पहलुओं का खुलासा करने की कोशिश करेगी. आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना है.

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