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दिल्ली हिंसा के केस में शरजील इमाम पर लगा UAPA, जानिए क्या हैं सजा के प्रावधान

शरजील पर दिल्ली दंगों के मामले में यूएपीए लगाया गया है. इससे पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे असम से गिरफ्तार किया था. यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) केंद्र सरकार और एनआईए को कई तरह के अधिकार प्रदान करता है.

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दिल्ली पुलिस ने शरजील को असम से गिरफ्तार किया था
दिल्ली पुलिस ने शरजील को असम से गिरफ्तार किया था
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जेएनयू का छात्र है शरजील इमाम
  • दिल्ली पुलिस ने असम से किया गिरफ्तार
  • दिल्ली हिंसा की साजिश में शामिल होने का आरोप

हाल ही में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्र शरजील इमाम को औपचारिक तौर पर दिल्ली पुलिस ने UAPA के तहत गिरफ्तार कर लिया है. शरजील पर दिल्ली दंगों के मामले में यूएपीए लगाया गया है. इससे पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे असम से गिरफ्तार किया था. यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) केंद्र सरकार और एनआईए को कई तरह के अधिकार प्रदान करता है.

इस कानून के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) किसी भी संगठन को आतंकी संगठन और किसी भी शख्स को आतंकी घोषित कर सकती है, अगर आतंक से जुड़े किसी भी मामले में उसकी सहभागिता या किसी तरह का कोई कमिटमेंट हो. वो संगठन आतंकवाद की तैयारी में लगा हो या आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा हो. या फिर आतंकी गतिविधियों में उसकी किसी भी प्रकार की संलिप्तता पाई जाए.

पहले ऐसे किसी भी मामले की जांच डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) या असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) रैंक के अधिकारी ही कर सकते थे. लेकिन अब संशोधित कानून के मुताबिक एनआईए के अफसरों को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं. अब ऐसे किसी भी मामले की जांच इंस्पेक्टर रैंक या उससे ऊपर के अफसर कर सकते हैं.

यह कानून राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को असीमित अधिकार देता है. अब तक के नियम के मुताबिक एक जांच अधिकारी को आतंकवाद से जुड़े किसी भी मामले में संपत्ति सीज करने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से अनुमति लेनी होती थी, लेकिन अब यह कानून इस बात की अनुमति देता है कि अगर आतंकवाद से जुड़े किसी मामले की जांच एनआईए का कोई अफसर करता है तो उसे इसके लिए सिर्फ एनआईए के महानिदेशक से अनुमति लेनी होगी.

जांच के संबंध में भी एनआईए (NIA) के पास अब ताकत और बढ़ गई है. अब तक के नियम के अनुसार, ऐसे किसी भी मामले की जांच डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) या असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) रैंक के अधिकारी ही कर सकते थे. लेकिन अब नए नियम के मुताबिक एनआईए के अफसरों को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं. अब ऐसे किसी भी मामले की जांच इंस्पेक्टर रैंक या उससे ऊपर के अफसर कर सकते हैं.

यूएपीए में नए बदलाव के तहत एनआईए के पास असीमित अधिकार आ गए हैं. वह आतंकी गतिविधियों में शक के आधार पर लोगों को उठा सकती है. साथ ही संगठनों को आतंकी संगठन घोषित कर उन पर कार्रवाई कर सकती है. साथ ही जांच के लिए एनआईए को पहले संबंधित राज्य की पुलिस से अनुमति लेना पड़ती थी, लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं पड़ती. 

कड़ी सजा का प्रावधान
अनलॉफुल एक्टिविटी प्रीवेंशन एक्ट (UAPA) के तहत यदि कोई शख्स आतंकी गतिविधियां करता है और अगर इस दौरान किसी की मौत हो जाती है तो आरोपी व्यक्ति को मृत्युदंड या उम्रकैद हो सकती है. अगर पीड़ित शख्स की मौत नहीं होती, तो दोषी पाए गए शख्स को पांच साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है. इसी प्रकार अगर कोई शख्स आतंकी गतिविधि के लिए षड्यंत्र रचता है तो इस दोष साबित होने पर ऐसे शख्स को पांच साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.

जानकारों के अनुसार आतंकी गतिविधियों में शामिल संगठन का सदस्य होना ऐसे आतंकी संगठन का सदस्य होना यदि साबित हो जाता है, तो ऐसे में दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाने का प्रावधान है. इसी प्रकार अगर किसी शख्स के कब्जे से अवैध बम, डाइनामाइट, अन्य विस्फोटक या घातक हथियार बरामद हुए हों या उस विस्फोटक हथियार की वजह से ज्यादा लोगों की मौत हुई हो, तो ऐसे में दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.

बताते चलें कि सरकार ने जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी की सफुरा जर्गर और छात्र राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य मीरान हैदर सह‍ित जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद पर भी UAPA के तहत मामला दर्ज किया था. उमर खालिद पर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली समेत दो जगह भड़काऊ भाषण देने का आरोप था. 

 

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