Operation Gang Bust: दिल्ली पुलिस ने राजधानी में बढ़ते गैंगस्टर नेटवर्क और संगठित अपराध पर लगाम कसने के लिए ‘ऑपरेशन गैंग बस्ट’ चलाया. यह ऑपरेशन लगातार 48 घंटे तक चला, जिसमें स्पेशल सेल, वेस्ट और नॉर्थ रेंज की टीमें शामिल थीं. पुलिस ने शहर के अलग-अलग इलाकों में एक साथ छापेमारी कर अपराधियों को चौंकाने की रणनीति अपनाई. इस कार्रवाई का मकसद गैंग मॉड्यूल को तोड़ना और हिंसक अपराधों पर नियंत्रण पाना था. सीनियर अधिकारियों की सीधी निगरानी में यह ऑपरेशन अंजाम दिया गया. बड़े स्तर पर गिरफ्तारियां की गईं. लेकिन बदमाशों ने ठीक 24 घंटे बाद फिर दिल्ली को दहला दिया.
हाई-इंटेंसिटी ऑपरेशन
शुक्रवार रात 8 बजे से रविवार रात 8 बजे तक चले दिल्ली पुलिस के खास ऑपरेशन में करीब 9000 पुलिसकर्मी तैनात रहे. क्राइम ब्रांच, डिस्ट्रिक्ट पुलिस और स्पेशल सेल की संयुक्त टीमों ने दिल्ली के हर कोने में दबिश दी. यह अब तक का सबसे बड़ा समन्वित पुलिस ऑपरेशन माना जा रहा है. लगातार दो दिन तक पुलिस की मौजूदगी से अपराधियों में हड़कंप मच गया.
एक साथ हजारों छापेमारी
ऑपरेशन के दौरान दिल्ली और उससे जुड़े हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब तक पुलिस ने छापेमारी की. कुल 4299 जगहों पर रेड की गई. इन छापों में गैंगस्टरों के ठिकानों, उनके सहयोगियों और संदिग्धों को निशाना बनाया गया. आउटर डिस्ट्रिक्ट और गैंग हॉटस्पॉट इलाकों पर खास फोकस रहा.
हजारों संदिग्ध राउंडअप
पुलिस की कार्रवाई के दौरान कुल 6494 लोगों को राउंडअप किया गया. इनमें से कई लोग पहले से दर्ज गंभीर मामलों में वांछित थे. लंबी पूछताछ और दस्तावेज़ी जांच के बाद आरोपियों की पहचान की गई. इसके बाद बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गईं.
854 गिरफ्तार, 690 नए केस दर्ज
दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन गैंग बस्ट के तहत कुल 854 अपराधियों को गिरफ्तार किया. इन आरोपियों के खिलाफ 690 नए मामले दर्ज किए गए हैं. गिरफ्तार बदमाश हत्या, हत्या की कोशिश, फिरौती, लूट और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन मामलों में शामिल थे. पुलिस का कहना है कि इससे अपराध नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है.
कुख्यात गैंग्स पर सीधा वार
इस ऑपरेशन में गोगी, टिल्लू ताजपुरिया, काला जठेड़ी और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े शूटर और बदमाश पकड़े गए. ये गैंग दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय से सक्रिय थे. पुलिस के मुताबिक इन गैंग्स की आपसी रंजिश और गैंगवार राजधानी की कानून व्यवस्था के लिए खतरा बनी हुई थी.
हथियारों का जखीरा और कैश बरामद
पुलिस ने ऑपरेशन के दौरान 300 से ज्यादा अवैध हथियार बरामद किए हैं. इसके अलावा करीब 25 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए. 117 मोबाइल फोन भी कब्जे में लिए गए, जिनका इस्तेमाल गैंग ऑपरेशन और फिरौती के लिए किया जा रहा था. इस बरामदगी से गैंगस्टरों के नेटवर्क की गहराई सामने आई है.
ऑपरेशन का मकसद
दिल्ली पुलिस का साफ कहना है कि ऑपरेशन गैंग बस्ट का उद्देश्य गैंग मॉड्यूल को जड़ से खत्म करना था। साथ ही फिरौती की घटनाओं, गैंगवार और खुलेआम फायरिंग जैसी वारदातों पर रोक लगाना भी लक्ष्य था। पुलिस लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों को भी इस ऑपरेशन में पकड़ना चाहती थी।
सीनियर अफसरों की निगरानी
इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग खुद सीनियर पुलिस अधिकारी कर रहे थे. हर जिले और यूनिट को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि कार्रवाई तेज, सटीक और समन्वित हो. अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है.
ऑपरेशन खत्म होते ही पुलिस को मिली चुनौती
ऑपरेशन गैंग बस्ट खत्म होने के महज 24 घंटे के भीतर ही गैंगस्टरों ने पुलिस को खुली चुनौती दे डाली. राजधानी दिल्ली में ताबड़तोड़ फायरिंग की घटनाएं सामने आईं हैं. इससे साफ हो गया कि गैंगस्टर नेटवर्क अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. और ना ही पुलिस के खास ऑपरेशन का कुछ असर दिखाई दिया.
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का दावा
सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से दावा किया गया कि दिल्ली में फायरिंग उन्होंने ही की है. पोस्ट के जरिए गैंग ने पुलिस कार्रवाई को ठेंगा दिखाने की कोशिश की. इस दावे के बाद सुरक्षा एजेंसियां और अलर्ट हो गई हैं.
पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
ऑपरेशन के बावजूद फायरिंग की घटनाएं पुलिस के लिए नई चुनौती बन गई हैं. अधिकारियों का कहना है कि गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई और तेज की जाएगी. सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों की भी जांच की जा रही है.
आगे क्या होगा?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन गैंग बस्ट सिर्फ शुरुआत है. आने वाले दिनों में गैंगस्टरों और उनके नेटवर्क पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी. पुलिस ने साफ किया है कि राजधानी में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.