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कोलकाता में CBI की बड़ी कार्रवाई, ₹7.25 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में स्वाति माइनिंग से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ₹7.25 करोड़ के यूको बैंक फ्रॉड मामले में कोलकाता के न्यू अलीपुर और न्यू टाउन में छापेमारी की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया. यह छापेमारी स्वाति माइनिंग से जुड़े ठिकानों पर की गई. यह मामला फंड डायवर्जन की जांच से जुड़ा है.

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यह छापेमारी स्वाति माइनिंग के ठिकानों पर की गई (फाइल फोटो)
यह छापेमारी स्वाति माइनिंग के ठिकानों पर की गई (फाइल फोटो)

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को कोलकाता में अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. यह कार्रवाई एक माइनिंग कंपनी से जुड़े बड़े बैंक फ्रॉड मामले में की गई है. जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित धोखाधड़ी से यूको बैंक को करीब 7.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. CBI की यह कार्रवाई सुनियोजित और समन्वित तरीके से अंजाम दी गई. अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी का उद्देश्य अहम दस्तावेज और सबूत जुटाना है. इस मामले में लंबे समय से जांच चल रही थी. अब CBI ने जांच को तेज कर दिया है.

न्यू अलीपुर और न्यू टाउन में सर्च ऑपरेशन
CBI की टीमें कोलकाता के न्यू अलीपुर इलाके में एक व्यवसायी के आवास पर पहुंचीं. इसके अलावा न्यू टाउन इलाके में भी तलाशी ली गई. अधिकारियों ने बताया कि ये सभी स्थान जांच के दायरे में पहले से थे. माना जा रहा है कि इन ठिकानों से कंपनी से जुड़े अहम वित्तीय रिकॉर्ड बरामद हो सकते हैं. छापेमारी के दौरान इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. स्थानीय पुलिस भी मौके पर मौजूद रही. पूरी कार्रवाई गोपनीय तरीके से की गई.

पांच CBI टीमों की रेड
CBI की कुल पांच टीमों ने न्यू अलीपुर स्थित एक बहुमंजिला आवासीय परिसर में छापेमारी की. यह परिसर प्लॉट नंबर 28 पर स्थित है. टीमें इमारत की पांचवीं मंजिल पर पहुंचीं और कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया. अधिकारियों ने फ्लैट के अंदर मौजूद दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की गहन जांच की. यह छापेमारी बेहद अहम मानी जा रही है. क्योंकि इसी स्थान से कंपनी के प्रमोटर्स के जुड़े होने की जानकारी मिली है.

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स्वाति माइनिंग से जुड़ा है परिसर
CBI सूत्रों के अनुसार, जिस परिसर में छापेमारी हुई वह स्वाति माइनिंग कंपनी के प्रमोटर्स और गारंटर अमित कुमार केजरीवाल और सरवन कुमार केजरीवाल से जुड़ा हुआ है. दोनों पर बैंक फ्रॉड मामले में अहम भूमिका निभाने का आरोप है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कर्ज की राशि कहां और कैसे खर्च की गई. प्रमोटर्स की संपत्तियों और लेन-देन की जांच की जा रही है. इस कार्रवाई से नए खुलासे होने की उम्मीद है.

दस्तावेजी सबूत जुटाने पर फोकस
CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह समन्वित ऑपरेशन जांच से जुड़े दस्तावेजी सबूत जुटाने के लिए किया गया है. एजेंसी बैंक स्टेटमेंट, लेजर, ईमेल और अन्य रिकॉर्ड खंगाल रही है. इन दस्तावेजों से फंड के डायवर्जन का पूरा नेटवर्क सामने आ सकता है. अधिकारी ने कहा कि जांच बेहद संवेदनशील है. इसलिए हर पहलू को बारीकी से देखा जा रहा है. CBI इस केस में मजबूत चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है.

30 दिसंबर 2025 को दर्ज हुआ नया केस
CBI ने इस मामले में 30 दिसंबर 2025 को नया केस दर्ज किया था. यह एफआईआर यूको बैंक की शिकायत पर दर्ज की गई. केस में कंपनी, उसके निदेशक गिरिजा ठाकुर और सम्राट चक्रवर्ती को आरोपी बनाया गया है. इसके अलावा प्रमोटर और गारंटर अमित कुमार केजरीवाल और सरवन कुमार केजरीवाल के नाम भी शामिल हैं. बैंक का आरोप है कि कंपनी ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया. इसी आधार पर CBI ने जांच शुरू की.

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बैंक ऑफ इंडिया केस में भी जांच
स्वाति माइनिंग कंपनी पहले से ही एक अन्य बैंक फ्रॉड मामले में CBI की जांच का सामना कर रही है. यह केस बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज किया गया था. दोनों मामलों में आरोपों का पैटर्न काफी हद तक समान बताया जा रहा है. इससे एजेंसी को शक है कि यह एक संगठित वित्तीय धोखाधड़ी हो सकती है. CBI दोनों मामलों को जोड़कर जांच के एंगल तलाश रही है. इससे कंपनी के पूरे फाइनेंशियल नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सकती है.

₹7.25 करोड़ का नुकसान
यूको बैंक केस में दर्ज एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने बैंक को 7.25 करोड़ रुपये का गलत नुकसान पहुंचाया. यह राशि 30 जून 2019 तक कंपनी के खाते में एनपीए के रूप में बकाया थी. बैंक का कहना है कि कंपनी ने कर्ज चुकाने की मंशा नहीं दिखाई. इसके चलते खाते को एनपीए घोषित करना पड़ा. CBI अब यह जांच कर रही है कि यह नुकसान किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किसकी कितनी जिम्मेदारी है.

यूको बैंक से लिया गया था लोन
जांच में सामने आया है कि यह कंपनी 2004 से यूको बैंक से विभिन्न क्रेडिट सुविधाएं ले रही थी. कंपनी का कारोबार आयरन ओर और अन्य खनिजों के थोक व्यापार से जुड़ा था. बैंक ने कंपनी को वर्किंग कैपिटल सहित कई सुविधाएं दी थीं. शुरुआती वर्षों में खाते सामान्य बताए जाते हैं. लेकिन बाद में लेन-देन संदिग्ध होता चला गया. इसी के बाद बैंक को गड़बड़ी का शक हुआ.

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वर्किंग कैपिटल का गलत इस्तेमाल
एफआईआर में आरोप है कि कंपनी ने वर्किंग कैपिटल सुविधा का दुरुपयोग किया. यह राशि जिस उद्देश्य के लिए स्वीकृत की गई थी, उसका इस्तेमाल उस काम में नहीं किया गया. इसके बजाय पैसा दूसरी जगहों पर डायवर्ट कर दिया गया. बैंक को इसकी जानकारी काफी देर से मिली. जब तक कार्रवाई होती, तब तक बड़ा नुकसान हो चुका था. यही इस केस का मुख्य आधार है.

फर्जी संड्री क्रेडिटर्स को पैसा ट्रांसफर
CBI के अनुसार, कंपनी ने रकम को कुछ संड्री क्रेडिटर्स के नाम पर ट्रांसफर किया. जांच में सामने आया कि ये असली लेनदार नहीं थे. इन्हें सिर्फ कागजों में दिखाया गया था. इस तरीके से बैंक को गुमराह किया गया. एजेंसी अब इन फर्जी लेनदारों की पहचान कर रही है. ताकि पूरे फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हो सके.

ग्रुप कंपनियों में भी फंड डायवर्जन
एफआईआर में यह भी आरोप है कि बड़ी रकम को ग्रुप कंपनियों या उससे जुड़ी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया. ये कंपनियां सीधे या परोक्ष रूप से उसी उधारकर्ता से जुड़ी थीं. CBI अब इन सभी कंपनियों के खातों की जांच कर रही है. फंड का अंतिम उपयोग कहां हुआ, यह पता लगाया जा रहा है. यही जांच का मुख्य उद्देश्य बताया गया है.

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सेंट्रल फोर्स की तैनाती
CBI की इस कार्रवाई के दौरान केंद्रीय बलों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई थी. अधिकारियों ने बताया कि यह व्यवस्था किसी भी तरह की बाधा से बचने के लिए की गई. पूरी छापेमारी शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई. CBI ने साफ किया है कि जांच अभी जारी है. आने वाले दिनों में और भी ठिकानों पर कार्रवाई हो सकती है. इस केस में जल्द बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है.

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