महाराष्ट्र के ठाणे जिले से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है. जहां एक 10 साल की मासूम बच्ची के साथ कथित तौर पर रेप किया गया. इस आरोप में 58 साल के एक बुजुर्ग के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने इस पूरे मामले की जानकारी मंगलवार को साझा की, जिसके बाद से इलाके में आक्रोश और चिंता का माहौल है.
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के उस काले चेहरे को भी उजागर करती है, जहां मासूमियत तक सुरक्षित नहीं रह पाती. पीड़ित परिवार के लोग इस घटना से गहरे सदमे में हैं. पुलिस अब मामले की जांच में जुट गई है और आरोपी की भूमिका को लेकर सख्ती से पड़ताल कर रही है.
यह पूरा मामला ठाणे जिले के भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन क्षेत्र का बताया जा रहा है. पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बच्ची को बहाने से अपने घर बुलाया और वहीं इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया. इस तरह की घटनाएं दिसंबर 2025 से लेकर फरवरी 2026 के बीच भिवंडी के निजामपुरा इलाके में आरोपी के घर पर हुईं.
आरोपी की उम्र 58 साल बताई जा रही है, जो इस घटना को और भी भयावह बना देती है. बच्ची को भरोसे में लेकर उसे घर बुलाना और फिर उसके साथ गलत हरकत करना, इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बना देता है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी और पीड़िता के बीच किसी जान-पहचान की भी संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है.
पीड़िता के परिवार ने जब हिम्मत जुटाई, तब जाकर यह मामला पुलिस तक पहुंचा. परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने रविवार को आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया. इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 और धारा 74 के तहत कार्रवाई की गई है. इसके साथ ही यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत भी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं.
एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि मामले को बेहद संवेदनशीलता के साथ देखा जा रहा है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे. हालांकि इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायत दर्ज कराने में देरी क्यों हुई. परिवार ने इस देरी की कोई ठोस वजह नहीं बताई है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
अक्सर ऐसे मामलों में सामाजिक दबाव, डर और बदनामी का भय परिवारों को चुप रहने पर मजबूर कर देता है. लेकिन जब सच सामने आता है, तो वह समाज को आईना दिखा जाता है. पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है. इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और समाज में जागरूकता की जरूरत को उजागर कर दिया है.