मुंबई में एक राजनीतिक बयान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. एडवोकेट पंकज कुमार मिश्रा ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को शिकायत देकर सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भाटी ने ब्राह्मण समाज के खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ और अपमानजनक बयान दिए हैं. इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है.
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने जाति और धार्मिक आधार पर एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर कथित तौर पर नफरत फैलाने का काम किया. शिकायतकर्ता का आरोप है कि ऐसे बयान समाज में तनाव और विभाजन पैदा कर सकते हैं. उन्होंने इसे कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा बताया है. मामले में तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है.
एडवोकेट पंकज कुमार मिश्रा ने अपनी शिकायत में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS 2023 की कई धाराओं का हवाला दिया है. शिकायत के अनुसार, आरोपी के बयान अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले हैं. शिकायत में कहा गया कि यह मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है. इसलिए पुलिस को तुरंत FIR दर्ज करनी चाहिए.
शिकायत में BNS की धारा 196(1) और 196(2) का उल्लेख किया गया है. इन धाराओं के तहत धर्म, जाति, भाषा या समुदाय के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने और सामाजिक शांति को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्य अपराध माने जाते हैं. शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपी के बयान इन धाराओं के दायरे में आते हैं. इस कारण तत्काल कार्रवाई जरूरी है.
इसके अलावा शिकायत में BNS की धारा 197 का भी जिक्र किया गया है. यह धारा राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले आरोपों और बयानों से जुड़ी है. शिकायतकर्ता ने कहा कि किसी समुदाय के खिलाफ सार्वजनिक मंच से कथित भड़काऊ बयान देना देश की सामाजिक एकता के खिलाफ माना जा सकता है. इसीलिए पुलिस जांच जरूरी बताई गई है.
शिकायत में BNS की धारा 299 और 302 का भी हवाला दिया गया है. इन धाराओं में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और जानबूझकर किसी वर्ग की भावनाएं आहत करने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं. शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपी के बयान से ब्राह्मण समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है. इस वजह से कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है.
मामले में BNS की धारा 353 का भी उल्लेख किया गया है. इस धारा के तहत ऐसे बयान अपराध माने जाते हैं जो सार्वजनिक अशांति और अव्यवस्था को बढ़ावा दें. शिकायत में दावा किया गया है कि आरोपी के बयान से समाज में तनाव और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है. इसे सार्वजनिक शांति के लिए खतरा बताया गया है.
शिकायतकर्ता ने BNS की धारा 356 के तहत मानहानि का आरोप भी लगाया है. शिकायत में कहा गया है कि कथित बयान से पूरे ब्राह्मण समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है. किसी समुदाय के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी समाज में गलत संदेश दे सकती है. इसी आधार पर कार्रवाई की मांग की गई है.
शिकायत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम यानी IT Act 2000 का भी जिक्र किया गया है. शिकायतकर्ता ने मांग की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद कथित आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटाया जाए. साथ ही ऐसे कंटेंट की पहुंच को ब्लॉक करने की भी मांग की गई है. उनका कहना है कि ऑनलाइन प्रसार से विवाद और बढ़ सकता है.
शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी एक मौजूदा विधायक और राजनीतिक प्रवक्ता हैं. ऐसे में उनके बयान का असर आम लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है. शिकायत में कहा गया है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की जिम्मेदारी समाज में शांति बनाए रखने की होती है. इसलिए मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है.
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया पर कथित वीडियो और बयान लगातार शेयर किए जा रहे हैं. इससे ब्राह्मण समाज के लोगों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ रहा है. शिकायतकर्ता का दावा है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इससे सांप्रदायिक तनाव और बढ़ सकता है. इसलिए तुरंत रोकथाम संबंधी कदम उठाने की मांग की गई है.
एडवोकेट पंकज कुमार मिश्रा ने पुलिस से मांग की है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और IT Act के तहत निष्पक्ष और समयबद्ध जांच शुरू की जाए. शिकायत में कहा गया है कि कानून के मुताबिक FIR दर्ज कर उचित दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए. फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.