हरियाणा के पंचकूला नगर निगम से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. इस मामले में आरोपी स्वाति तोमर ने सोमवार को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के मुख्यालय पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया. वह अपने वकील के साथ वहां पहुंचीं और जांच एजेंसी के सामने पेश हुईं. इस केस में पहले ही कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिससे साफ है कि मामला काफी गंभीर और संगठित तरीके से अंजाम दिया गया. हालांकि ACB की ओर से अब तक इस सरेंडर को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के तहत करीब 30 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम स्वाति तोमर के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी. इतनी बड़ी रकम के लेनदेन ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है और पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की जा रही है. फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह रकम किस स्रोत से आई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं. ACB इस पूरे ट्रांजैक्शन की परतें खोलने में जुटी हुई है.
स्वाति तोमर के वकील का दावा है कि उनकी मुवक्किल इस पूरे मामले में फंसी हुई हैं और उन्हें धोखे में रखकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए. वकील के अनुसार, स्वाति को एक प्रोजेक्ट में सब-कॉन्ट्रैक्टर बनाने का झांसा दिया गया था. इसी बहाने उनसे कई जरूरी कागजों पर साइन करवाए गए. इतना ही नहीं, उनके बैंक खाते से जुड़े चेक पर भी हस्ताक्षर करवाए गए, जिसका बाद में गलत इस्तेमाल हुआ.
वकील का यह भी कहना है कि स्वाति के खाते में जो पैसा आया, वह उनके जानकारी के बिना ही अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया. यानी उनका बैंक अकाउंट सिर्फ एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया. इस दावे की सच्चाई की जांच अब ACB कर रही है. अगर यह बात सही पाई जाती है, तो यह मामला और भी बड़ा नेटवर्क होने की ओर इशारा कर सकता है, जिसमें कई लोग शामिल हो सकते हैं.
बताया जा रहा है कि स्वाति तोमर पेशे से एक पूर्व शिक्षिका रही हैं. इस मामले में अब तक कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इससे यह साफ हो जाता है कि यह कोई छोटा-मोटा घोटाला नहीं, बल्कि एक संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है और किन-किन लोगों की इसमें भूमिका रही है.