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महोबा के व्यापारी मर्डर केस की जांच में जुटी SIT, जानें क्या है पूरा मामला

व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी की बीते 8 सितंबर को गोली मारी गई थी. जिसके बाद गंभीर हालत में उन्हें महोबा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां से इंद्रकांत त्रिपाठी को कानपुर रेफर किया गया था. कानपुर में इलाज के दौरान 13 सितंबर को इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत हो गई. इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत के बाद हंगामा मच गया और परिजनों की तरफ से एसपी मणिलाल पाटीदार पर इल्जाम लगाए गए. 

महोबा में मौका-ए वारदात पर पुलिस महोबा में मौका-ए वारदात पर पुलिस
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महोबा मर्डर केस की जांच कर रही एसआईटी
  • निलंबित एसपी मणिलाल पाटीदार पर आरोप
  • मृतक ने लगाया था एसपी पर रिश्वत का आरोप

यूपी में महोबा के चर्चित व्यापारी मर्डर केस की जांच तेजी पकड़ रही है. बुधवार को जांच के लिए गठित एसआईटी महोबा पहुंची. इस टीम में वाराणसी के आईजी विजय सिंह मीणा के अलावा तीन वरिष्ठ आईपीएस अफसर मौजूद थे. ये टीम गोलीकांड में निलंबित एसपी मणिलाल पाटीदार की भूमिका की जांच करेगी. 

व्यापारी इंद्रकांत त्रिपाठी की बीते 8 सितंबर को गोली मारी गई थी. जिसके बाद गंभीर हालत में उन्हें महोबा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां से इंद्रकांत त्रिपाठी को कानपुर रेफर किया गया था. कानपुर में इलाज के दौरान 13 सितंबर को इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत हो गई. इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत के बाद हंगामा मच गया और परिजनों की तरफ से एसपी मणिलाल पाटीदार पर इल्जाम लगाए गए. 

इससे पहले जब 8 सितंबर को इंद्रकांत त्रिपाठी के साथ फायरिंग की घटना हुई तो उसके बाद उनके भाई रविकांत त्रिपाठी ने 11 सितंबर की शाम थाना कबरई में एफआईआई लिखाई थी. 

FIR में क्या है

इस एफआईआर में तत्कालीन महोबा एसपी मणिलाल पाटीदार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए थे. शिकायत में लिखा गया कि चंद्रकांत त्रिपाठी क्रेशर चलाते हैं और जून, 2020 से एपसी मणिलाल पाटीदार उनसे हर महीने 6 लाख रुपये की रिश्वत की डिमांड कर रहे हैं, लेकिन ये रिश्वत देने से इनकार कर दिया गया. इसके बाद एसपी मणिलाल ने अपने सहयोगी पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर चंद्रकांत त्रिपाठी को धमकियां देनी शुरू कर दीं. जबरन वसूली की गई. 

3 सितंबर 2020 को चंद्रकांत त्रिपाठी एसपी ऑफिस गए और नुकसान की बात कहकर पैसा देने में असमर्थता जताई. इस पर एसपी मणिलाल ने चंद्रकांत त्रिपाठी को धमकाया और कभी जेल से बाहर न आ सकने की धमकी दी. एफआईआर में ये भी आरोप लगाया गया है कि एसपी ने चंद्रकांत त्रिपाठी को हत्या की धमकी दी. 

एसपी के भ्रष्टाचार का खुलासा करने का किया था ऐलान

एफआईआर में आगे लिखा गया है कि धमकियों से आजिज आकर 5 सितंबर 2020 को चंद्रकांत त्रिपाठी ने यूपी सरकार को पत्र लिखा और सोशल मीडिया पर भी शिकायती पत्र शेयर कर दिया. इससे एसपी आगबबूला हो गए और अपने मातहत अफसरों से धमकी दिलवाने लगे. एफआईआर में लिखा गया है कि चंद्रकांत त्रिपाठी ने 7 सितंबर की दोपहर 12 बजे और 8 सितंबर को सुबह 10 बजे वीडियो वायरल किया और उसमें दावा किया कि महोबा एसपी किसी भी वक्त मेरी हत्या करवा सकते हैं. एसपी मुझसे हर महीने 6 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं और मैं देने में असमर्थ हूं. 

एफआईआर में आरोप लगाया कि इस वीडियो के वायरल होने पर चंद्रकांत त्रिपाठी को फिर धमकियां आने लगीं जिस पर उन्होंने 9 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसपी मणिलाल पाटीदार के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत सार्वजनिक करने की बात कही. इस ऐलान के बाद चंद्रकांत त्रिपाठी 8 सितंबर को ही दोपहर करीब 2.30 बजे कबरई-बांदा मार्ग पर वो अपनी गाड़ी के अंदर घायल अवस्था में मिले. 

इसके बाद चंद्रकांत त्रिपाठी को पहले महोबा में भर्ती कराया गया है, लेकिन वहां से सीधे कानपुर रेफर किया गया. जहां 13 सितंबर को उनकी मौत हो गई. 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटना पर यूपी की योगी सरकार को घेरा तो डीजीपी ने जांच के लिए एक एसआईटी का गठन कर दिया. दूसरी तरफ एसपी को निलंबित कर दिया गया और मुकदम के धारा 307 से धारा 302 में तब्दील कर दिया गया. हालांकि, अभी तक मणिलाल पाटीदार की गिरफ्तारी नहीं हुई है. 
 



 

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