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हैदराबाद: रेलवे स्टेशन से 10 किलो गांजे के साथ नाबालिग गिरफ्तार, ऐसे हुआ मुंबई ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़

एक रेलवे स्टेशन से 10 किलो गांजे के साथ नाबालिग की गिरफ्तारी की गई है. इसी के बाद मुंबई ड्रग सिंडिकेट का खुलासा हुआ है. इस कार्रवाई को EAGLE फोर्स ने अंजाम दिया है. इस मामले में NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है.

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पकड़े गांजे की कीमत लाखों में बताई जा रही है (सांकेतिक चित्र)
पकड़े गांजे की कीमत लाखों में बताई जा रही है (सांकेतिक चित्र)

हैदराबाद में EAGLE फोर्स ने मंगलवार को नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक नाबालिग को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी रेलवे स्टेशन से की गई, जहां 17 वर्षीय किशोर कथित तौर पर 10 किलो गांजा मुंबई ले जाने की कोशिश कर रहा था. जब्त गांजे की कीमत करीब 5 लाख रुपये आंकी गई है. यह ऑपरेशन ड्रग तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है. EAGLE फोर्स ने साफ किया कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. नाबालिग की गिरफ्तारी ने ड्रग माफिया की नई रणनीति को उजागर कर दिया है.

गुप्त सूचना पर संयुक्त ऑपरेशन
पुलिस को पहले से ही विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली थी कि रेलवे स्टेशन के जरिए गांजे की तस्करी की जा रही है. इसके बाद Elite Action Group for Drug Law Enforcement (EAGLE) फोर्स ने S R Nagar पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन चलाया. 5 जनवरी को नेचर क्योर हॉस्पिटल रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी. इसी दौरान नाबालिग को हिरासत में लिया गया. तलाशी लेने पर उसके पास मौजूद बैग से पांच पैकेट गांजा बरामद हुआ.

मुंबई के ड्रग सिंडिकेट का कनेक्शन
जांच में सामने आया कि यह नाबालिग मुंबई स्थित ड्रग सिंडिकेट के लिए काम कर रहा था. पुलिस के मुताबिक, अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी में अब नाबालिगों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. ड्रग माफिया जानबूझकर बच्चों को मोहरा बना रहे हैं ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके. यह मामला इसी नई कार्यप्रणाली का उदाहरण है. EAGLE फोर्स ने इसे युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया है.

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नाबालिगों का इस्तेमाल, नई रणनीति
पुलिस बयान में कहा गया कि नाबालिगों का ड्रग तस्करी में इस्तेमाल एक गंभीर अपराध है. इससे न केवल कानून व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि देश के युवाओं का भविष्य भी बर्बाद होता है. ड्रग सिंडिकेट अब पुलिस की सख्ती से बचने के लिए बच्चों को आगे कर रहे हैं. यह तरीका कानून से बचने की साजिश का हिस्सा है. पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी.

NDPS और जेजे एक्ट के तहत केस दर्ज
इस पूरे मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. नाबालिग पर NDPS एक्ट के साथ-साथ जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट, 2015 के तहत कार्रवाई की जा रही है. चूंकि आरोपी नाबालिग है, इसलिए उसे जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम के तहत पेश किया जाएगा. पुलिस का कहना है कि कानून के मुताबिक आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी.

टेंपो क्लीनर था नाबालिग
जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार नाबालिग मुंबई में टेंपो क्लीनर के तौर पर काम करता था. ड्रग सप्लायर्स ने उसकी आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाया. उसे आसान काम और पैसे का लालच देकर इस जाल में फंसाया गया. पुलिस का मानना है कि ऐसे कई और बच्चे ड्रग नेटवर्क का शिकार बन रहे हैं. यह मामला उसी शोषण की कहानी बयां करता है.

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ओडिशा भेजने की साजिश
पिछले साल दिसंबर के आखिरी हफ्ते में मुख्य आरोपी ने नाबालिग को ओडिशा भेजा. उसे बताया गया कि टेंपो ट्रांसपोर्ट का काम है और इसके बदले 1,500 रुपये दिए जाएंगे. भरोसा करके नाबालिग ओडिशा के मलकानगिरी पहुंचा. वहां उसकी मुलाकात एक ड्रग सप्लायर से कराई गई. इसके बाद उसे आगे के निर्देश दिए गए.

रेलवे स्टेशन पर बैग सौंपा गया
मलकानगिरी में ड्रग सप्लायर से मिलने के बाद नाबालिग को नेचर क्योर हॉस्पिटल रेलवे स्टेशन बुलाया गया. यहां उसे एक ट्रैवल बैग दिया गया, जिसमें गांजे के पांच पैकेट थे. उसे ट्रेन से मुंबई जाने और वहां दूसरे आरोपी को बैग सौंपने को कहा गया. लेकिन 5 जनवरी को ट्रेन पकड़ने से पहले ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया. इस तरह पूरी तस्करी की योजना नाकाम हो गई.

फरार आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस ने बताया कि इस मामले में कई आरोपी अभी फरार हैं. उनकी पहचान कर ली गई है और उन्हें पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. EAGLE फोर्स और स्थानीय पुलिस की टीमें अलग-अलग जगहों पर दबिश दे रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा. ड्रग तस्करी के खिलाफ यह अभियान और तेज किया जाएगा.

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