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दिल्ली में इंटरनेशनल ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़, 5 करोड़ की ड्रग्स जब्त, 2 नाइजीरियाई तस्कर गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने इंटरनेशनल ड्रग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. नाइजीरियाई नागरिकों द्वारा चलाए जा रहे इस सिंडिकेट से करीब 5 करोड़ रुपए की कोकीन और MDMA बरामद की गई है. कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन में दो विदेशी नागरिक गिरफ्तार किए गए हैं, जिनसे पूछताछ जारी है.

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नाइजीरियाई नागरिकों द्वारा चलाए जा रहे ड्रग सिंडिकेट की जड़े बहुत गहरी हैं. (Photo: X/@CrimeBranchDP)
नाइजीरियाई नागरिकों द्वारा चलाए जा रहे ड्रग सिंडिकेट की जड़े बहुत गहरी हैं. (Photo: X/@CrimeBranchDP)

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नाइजीरियाई नागरिकों द्वारा संचालित एक इंटरनेशनल ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई में दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है. इसके साथ ही करीब 5 करोड़ रुपए की कोकीन और MDMA जब्त की गई है. यह ऑपरेशन दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में अंजाम दिया गया.

पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान 418 ग्राम कोकीन और 925 MDMA टैबलेट, जिन्हें एक्स्टेसी के नाम से जाना जाता है, बरामद की गईं. पुलिस पिछले कुछ समय से एक्टिव ड्रग सप्लायरों की गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए थी. 2 दिसंबर को इनपुट मिला कि एक नाइजीरियाई नागरिक साइकोट्रॉपिक ड्रग्स की सप्लाई कर रहा है.

आरोप पहले भी NDPS मामलों में शामिल रह चुका है. जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम ने टेक्निकल और मैनुअल सर्विलांस शुरू किया. आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था, ताकि पुलिस की पकड़ से बच सके. वह दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के इलाकों में सक्रिय था. निगरानी के बाद पुलिस ने छापा मारकर उसको गिरफ्तार कर लिया. 

उसका नाम फ्रैंक विटस उमे बताया गया. उसके कब्जे से बड़ी मात्रा में कोकीन और MDMA टैबलेट बरामद की गईं. इसके बाद NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई. पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह दिल्ली और आसपास के राज्यों में फैले एक संगठित ड्रग सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा है. 

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उसके मोबाइल फोन के टेक्निकल एनालिसिस के जरिए पुलिस एक अन्य नाइजीरियाई नागरिक संडे ओटू तक पहुंची. उसको महरौली इलाके में किराए के मकान से गिरफ्तार किया गया. उसके पास से 15 एक्स्टेसी टैबलेट बरामद की गईं. ओटू उमे को ड्रग्स सप्लाई करता था. लोकल डिस्ट्रीब्यूटर और नाइजीरिया में बैठे किंगपिन के बीच कड़ी था.

जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट विदेश में रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबरों का इस्तेमाल करता था. कानून-प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए हैंडलर और कूरियर के बीच सीधे संपर्क से परहेज किया जाता था. ड्रग्स की सप्लाई बिचौलियों के जरिए होती थी, जिनमें दिल्ली में रहने वाली एक विदेशी महिला भी शामिल थी.

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी कई साल पहले बिजनेस वीजा पर भारत आए थे. लेकिन बाद में आर्थिक परेशानियों के चलते वे ड्रग तस्करी के धंधे में शामिल हो गए. फिलहाल पुलिस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान और नशीले पदार्थों के सोर्स का पता लगाने में जुटी हुई है. नाइजीरिया में बैठे किंगपिन का भी पता लगाया जा रहा है.

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