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गुरुग्राम: NSG के नाम पर 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी, मास्टरमाइंड प्रवीण यादव गिरफ्तार

एसआईटी ने प्रवीण की पत्नी ममता यादव और बहन रितु यादव के अलावा एक अन्य शख्स को भी गिरफ्तार किया है. इन सभी आरोपियों ने एनएसजी कैम्पस में कॉन्ट्रैक्ट दिलवाने के नाम पर 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी की वारदात को अंजाम दिया.

पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रवीण यादव को गिरफ्तार कर लिया है पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रवीण यादव को गिरफ्तार कर लिया है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मानेसर के NSG कैंपस को बनाया केंद्र
  • एक्सिस बैंक में खुलवाया था फर्जी अकाउंट
  • कंपनियों से उसी बैंक खाते में जमा कराए पैसे

गुरुग्राम में मौजूद एनएसजी कैंपस में कॉन्ट्रैक्ट दिलवाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने के मामले में मास्टरमाइंड पुलिस के हत्थे चढ़ गया है. ठगी के मास्टरमाइंड प्रवीण यादव को एसआईटी ने उसकी पत्नी और बहन के साथ गिरफ्तार कर लिया. शातिर ठग प्रवीण यादव ने खुद को डिप्टी कमांडेंट बताकर करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया. इस काम में उसके साथ उसकी पत्नी, बहन और जीजा भी शामिल थे.

एसआईटी ने प्रवीण की पत्नी ममता यादव और बहन रितु यादव के अलावा एक अन्य शख्स को भी गिरफ्तार किया है. इन सभी आरोपियों ने एनएसजी कैम्पस में 16 किलोमीटर लंबी पैरिफिल रोड और एसटीपी बनाने के साथ-साथ सेंट्रल वेयर हाउस के कॉन्ट्रैक्ट दिलवाने के नाम पर 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी की वारदात को अंजाम दिया था.

गुरुग्राम पुलिस के मुताबिक प्रवीण यादव की पत्नी ममता यादव के साथ पकड़ में आई प्रवीण की बहन रितु यादव एक्सिस बैंक में मैनेजर है. रितु यादव और उसके पति नवीन यादव समेत एक्सिस बैंक के खिलाफ भी मानेसर थाने में 3 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं. 

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पुलिस ने अलग-अलग पीड़ितों की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 406, 419, 420, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया है. आरोप है कि प्रवीण यादव ने अपनी बहन रितु की मदद से एक्सिस बैंक में एनएसजी हेडक्वॉर्टर के नाम से फ़र्ज़ी अकाउंट खुलवाकर करोड़ों रुपये की ठगी की. 

इस मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों की निशानदेही पर 18 करोड़ रुपये की रकम और 4 लग्जरी गाड़ियां भी बरामद की हैं. पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि प्रवीण यादव उनकी कंपनियों के संपर्क में जून 2020 में आया और खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर एनएसजी में ऑन डेपुटेशन डिप्टी कमांडेंट होने की बात भी कही. इसके बाद पीड़ित उसके झांसे में आते चले गए.
 
एसीपी क्राइम की मानें तो प्रवीण यादव ने एनएसजी परिसर में ही कई मीटिंग कर पीड़ित कंपनियों को विश्वास में लिया और करोड़ों रुपये एनएसजी हेडक्वॉर्टर के नाम से बनाए गए फर्ज़ी अकाउंट्स में ट्रांसफर करवा लिए. इसके बाद वो पीड़ितों को चक्कर कटवाने लगा. और बाद में उसकी पोल खुल गई.

 

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