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Goa Nightclub Fire Case: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की बड़ी छापेमारी, 22 करोड़ की कमाई जांच के घेरे में

गोवा के ब्रिच बाय रोमियो लेन (Birch by Romeo Lane) नाइटक्लब से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. ईडी की टीम ने 9 ठिकानों पर छापेमारी की और 22 करोड़ की अवैध कमाई का पता लगाया है. साथ ही फर्जी लाइसेंस और विदेशी लेन-देन की जांच भी तेज हो गई है.

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ED ने 22 करोड़ की कमाई का पता लगाया है (फोटो-ITG)
ED ने 22 करोड़ की कमाई का पता लगाया है (फोटो-ITG)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पणजी जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने गोवा, नई दिल्ली और गुरुग्राम में कुल 9 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत की गई. छापेमारी में अरपोरा-नागाओ पंचायत के सरपंच और सचिव के ठिकाने भी शामिल रहे. यह जांच गोवा के चर्चित नाइटक्लब Birch by Romeo Lane से जुड़े मामलों में की जा रही है.

मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
ईडी की यह कार्रवाई गोवा के अरपोरा में मौजूद नाइटक्लब ब्रिच बाय रोमियो लेन के मालिक सौरभ लुथरा और अन्य के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है. यह वही नाइटक्लब है, जहां आग लगने की एक भीषण घटना में 25 लोगों की मौत हो गई थी. जांच एजेंसियों को शक है कि क्लब का संचालन गैरकानूनी तरीके से किया जा रहा था. इसी अवैध संचालन से जुड़े पैसों को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इधर-उधर किया गया.

दो FIR के आधार पर जांच
ईडी ने इस मामले में जांच गोवा पुलिस द्वारा दर्ज की गई दो FIR के आधार पर शुरू की है. इन FIR में ऐसे अपराध शामिल हैं, जो PMLA के तहत ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ की श्रेणी में आते हैं. इसका मतलब है कि इन अपराधों से अर्जित धन को ‘अपराध की आय’ यानी Proceeds of Crime माना जा सकता है. इसी आधार पर ईडी ने मनी ट्रेल की जांच शुरू की.

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लाइसेंस लेने के लिए बड़ा फर्जीवाड़ा
छापेमारी के दौरान ईडी को गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. जांच में पाया गया कि नाइटक्लब के लिए जरूरी वैधानिक लाइसेंस फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल किए गए थे. कई विभागों से जरूरी एनओसी (No Objection Certificate) लिए बिना ही क्लब का संचालन किया जा रहा था. सक्षम प्राधिकरणों की अनुमति के बिना व्यावसायिक गतिविधियां लंबे समय तक जारी रहीं.

बिना वैध मंजूरी चलता रहा नाइटक्लब
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि क्लब के पास कई अनिवार्य अनुमतियां मौजूद ही नहीं थीं. इसके बावजूद नाइटक्लब का संचालन खुलेआम किया जा रहा था. यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा था. इसी लापरवाही का नतीजा आग की भयावह घटना के रूप में सामने आया, जिसमें 25 लोगों की जान चली गई.

दो साल में करीब 22 करोड़ की कमाई
जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि 2023–24 और 2024–25 के दौरान नाइटक्लब ने लगभग 22 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया. ईडी का प्राथमिक आकलन है कि यह पूरी राशि अवैध गतिविधियों से कमाई गई. चूंकि क्लब जरूरी लाइसेंस के बिना और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चल रहा था, इसलिए इस कमाई को अपराध की आय माना जा रहा है.

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फर्जी NOC के आधार पर कारोबार
ईडी के मुताबिक, अलग-अलग विभागों से मिलने वाली एनओसी और लाइसेंस जाली पाए गए हैं. इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के सहारे नाइटक्लब का संचालन किया गया और भारी मुनाफा कमाया गया. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने और मंजूरी दिलाने में कौन-कौन लोग शामिल थे.

विदेशी लेन-देन के सबूत
छापेमारी के दौरान विदेशी रेमिटेंस से जुड़े अहम सबूत भी ईडी के हाथ लगे हैं. जांच में सामने आया कि ग्रुप की अन्य कंपनियों के जरिए विदेशों से धन का लेन-देन किया गया. इस बात की जांच की जा रही है कि क्या इन लेन-देन में विदेशी मुद्रा कानूनों का उल्लंघन हुआ है. ईडी अब सभी संबंधित कानूनों के तहत संभावित अपराधों की जांच कर रही है.

निजी खातों में भेजी अवैध कमाई
ईडी की आगे की जांच में यह भी पता चला कि नाइटक्लब से अर्जित अवैध धन को अलग-अलग व्यक्तियों के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया. इसके अलावा, ग्रुप की अन्य इकाइयों के खातों में भी करोड़ों रुपये भेजे गए. यह पूरा लेन-देन मनी लॉन्ड्रिंग के पैटर्न की ओर इशारा करता है.

दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त
सर्च ऑपरेशन के दौरान ईडी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं. इनमें मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं. इन सभी को जांच के लिए फॉरेंसिक जांच में भेजा जाएगा. ईडी को उम्मीद है कि इन डिजिटल सबूतों से मनी ट्रेल और साजिश की पूरी तस्वीर सामने आएगी.

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संदिग्ध खाते फ्रीज
PMLA, 2002 के तहत ईडी ने उन व्यक्तियों और संस्थाओं के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिन पर अपराध की आय रखने का संदेह है. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि जांच के दौरान धन को इधर-उधर न किया जा सके. इससे पहले भी ईडी ऐसे मामलों में खातों को फ्रीज कर चुकी है.

भ्रष्टाचार एंगल की भी जांच
ईडी की जांच अब भ्रष्टाचार के संभावित एंगल पर भी केंद्रित है. यह पता लगाया जा रहा है कि क्या सरकारी तंत्र से जुड़े कुछ लोगों की मिलीभगत से फर्जी लाइसेंस और एनओसी जारी की गई. गोवा पुलिस इस मामले में दो लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. ईडी ने साफ किया है कि इस मामले में आगे भी जांच जारी रहेगी.

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