उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पांच साल की मासूम बच्ची के साथ रेप और मर्डर केस मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. साल 2019 में हुई इस जघन्य अपराध के लिए दोषी को उम्रकैद (आखिरी सांस तक जेल) की सजा सुनाई गई है. इसके साथ ही अदालत ने अपराधी पर 1.30 लाख रुपए का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है.
यह पूरी घटना गाजियाबाद के मुरादनगर इलाके की है. स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के जज नीरज गौतम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया कि जुर्माने के तौर पर वसूली गई 1.30 लाख की राशि में से 1 लाख रुपए पीड़ित बच्ची के पिता को मुआवजे के रूप में दिए जाए. पुलिस जांच में यह बात साफ हुई थी कि अपराधी पीड़िता का पड़ोसी था.
अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि 7 अप्रैल, 2019 को मुरादनगर पुलिस स्टेशन में बच्ची की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी. परिजनों ने बताया था कि उनकी पांच साल की बेटी घर के पास से अचानक लापता हो गई है. पुलिस और परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन उस दिन बच्ची का कुछ पता नहीं चला. 8 अप्रैल को बच्ची का शव मिला.
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (ग्रामीण) सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि शव मिलने के बाद मामला बेहद संवेदनशील हो गया था. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया. मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि हत्या से पहले बच्ची का यौन उत्पीड़न किया गया था. इसके बाद पुलिस ने इलाके के सभी CCTV फुटेज खंगालने शुरू किए.
उसमें आरोपी महाजन बच्ची का हाथ पकड़कर ले जाते हुए दिखाई दिया. इसी पुख्ता सबूत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर आरोपी को जेल भेजा था. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आज अदालत ने दोषी को उसके किए की सख्त सजा सुनाई है.