पंजाब के जीरकपुर में नगर निकाय चुनावों के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रॉयल एस्टेट के दफ्तर पर छापेमारी की है. जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीम सुबह करीब 7:30 बजे कार्यालय पहुंची और वहां मौजूद दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी. कार्रवाई के दौरान दफ्तर के बाहर सुरक्षा भी बढ़ा दी गई. शुरुआती जानकारी में यह मामला रॉयल एस्टेट और उससे जुड़े कारोबारियों की वित्तीय गतिविधियों से जुड़ा बताया जा रहा है.
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार ईडी की यह कार्रवाई रॉयल एस्टेट के मालिक परवीन रॉकी कांसल और नीरज कांसल से जुड़े मामले में की जा रही है. बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और लेनदेन से संबंधित अहम फाइलों की जांच कर रही हैं. अधिकारियों की कई टीमें एक साथ अलग-अलग ठिकानों पर पहुंचीं और सर्च ऑपरेशन शुरू किया. फिलहाल जांच एजेंसियों की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
सूत्रों के मुताबिक चंडीगढ़ के सेक्टर-20 स्थित परवीन कांसल के घर पर भी ईडी की रेड जारी है. इसके अलावा मोहाली और अन्य जुड़े स्थानों पर भी कार्रवाई चल रही है. बताया जा रहा है कि यह संयुक्त ऑपरेशन चंडीगढ़ और दिल्ली की ईडी टीमों द्वारा मिलकर किया जा रहा है. एक साथ कई ठिकानों पर दबिश देकर एजेंसी पूरे नेटवर्क और संपत्ति से जुड़े लेनदेन की जांच में जुटी हुई है.
जानकारी के अनुसार ईडी की टीमें फिलहाल करीब पांच से छह अलग-अलग परिसरों में तलाशी अभियान चला रही हैं. कार्रवाई के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है. जिन परिसरों में रेड की जा रही है वहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और बाहरी लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है. मामले में अभी और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि जांच लगातार जारी है.
इस मामले में बताया जा रहा है कि रियल एस्टेट कारोबारी प्रवीण कांसिल उर्फ रॉकी पर न्यू चंडीगढ़ में जमीन धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं. पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ कारोबारी साझेदार की शिकायत पर IPC की धारा 420 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया था.
शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रवीण कांसिल और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर फर्जी तरीके से कीमती जमीन के मालिकाना हक में बदलाव कर अपने पार्टनर के साथ धोखाधड़ी की. जांच के दौरान विजिलेंस को कई संदिग्ध दस्तावेज और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड मिले थे.
सूत्रों के मुताबिक इस मामले की पहली शिकायत वर्ष 2023 में दी गई थी, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई. बाद में 2025 में मामला दोबारा खोला गया, जिसके बाद जून 2025 में केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई.