प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पणजी ज़ोनल ऑफिस ने अवैध अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई शुरू की है. इस कार्रवाई के तहत ED ने गोवा, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा और दिल्ली समेत कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की. कुल 26 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया. यह कार्रवाई PMLA, 2002 के तहत की गई है.
NDPS एक्ट की FIR से शुरू हुई जांच
ED की यह जांच गोवा पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी. यह FIR NDPS एक्ट, 1985 के तहत दर्ज की गई थी, जिसमें वाणिज्यिक मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी का आरोप है. FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया. शुरुआती जांच में ही अंतरराज्यीय स्तर पर फैले एक संगठित ड्रग नेटवर्क के संकेत मिले, जिसके बाद बड़े स्तर पर तलाशी अभियान की योजना बनाई गई.
इंटरस्टेट ड्रग सिंडिकेट का खुलासा
तलाशी अभियान के दौरान ED को एक सुनियोजित इंटरस्टेट ड्रग तस्करी सिंडिकेट के पुख्ता सबूत मिले हैं. जांच में सामने आया कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय है और नेटवर्क के अलग-अलग सदस्य अलग भूमिकाओं में काम कर रहे थे. कोई सप्लायर था तो कोई डिस्ट्रीब्यूटर, तो कोई फाइनेंशियल चैनल संभाल रहा था. यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और कानून से बचने के लिए लगातार तरीके बदल रहा था.
B2B मॉडल पर हो रहा था नशे का कारोबार
ED की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि मादक पदार्थों की सप्लाई रिटेल नहीं बल्कि बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) मॉडल पर की जा रही थी. गोवा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा और केरल में ड्रग्स की थोक सप्लाई की जाती थी. इससे यह साफ होता है कि यह नेटवर्क सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि एक संगठित व्यापारिक ढांचे की तरह काम कर रहा था.
नकदी, चरस और आपत्तिजनक सामग्री जब्त
तलाशी के दौरान ED ने भारी मात्रा में नकदी जब्त की है. इसके अलावा चरस और अन्य प्रतिबंधित मादक पदार्थ भी बरामद किए गए हैं. ED को कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल डिवाइस भी हाथ लगे हैं. इन डिवाइस में मौजूद डेटा से नेटवर्क की कार्यप्रणाली, संपर्क सूत्र और वित्तीय लेन-देन से जुड़े अहम सुराग मिले हैं.
डिजिटल डिवाइस से चौंकाने वाले खुलासे
जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच में बड़े पैमाने पर ड्रग सप्लाई के सबूत सामने आए हैं. MDMA, एक्स्टेसी, हैश, कुश, शरूम्स, राशोल क्रीम, कोकीन और सुपर क्रीम जैसे नशीले पदार्थों की सप्लाई भारत के कई राज्यों में की जा रही थी. इनका इस्तेमाल पार्टी सर्किट और हाई-प्रोफाइल ग्राहकों तक पहुंचने के लिए किया जाता था.
कूरियर और पोस्टल चैनलों का दुरुपयोग
जांच में यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की सप्लाई के लिए कूरियर और पोस्टल सेवाओं का सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा था. छोटे पैकेट्स में मादक पदार्थ भेजे जाते थे ताकि शक न हो. अलग-अलग फर्जी नाम और पते का इस्तेमाल कर कानून एजेंसियों को गुमराह किया जाता था. यह तरीका नेटवर्क को लंबे समय तक सुरक्षित बनाए रखने में मदद कर रहा था.
UPI, क्रिप्टो और कैश से मनी लॉन्ड्रिंग
ED की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के जटिल तरीके भी उजागर हुए हैं. अपराध की कमाई को UPI, बैंक ट्रांसफर, क्रिप्टोकरेंसी और नकद के जरिए इधर-उधर किया जाता था. कई लेयर्स में रकम को घुमाकर उसके स्रोत को छिपाया जाता था. इससे साफ है कि नेटवर्क को वित्तीय सिस्टम की गहरी समझ थी और वह तकनीक का भरपूर इस्तेमाल कर रहा था.
सप्लायर और सहयोगियों की भूमिका उजागर
जांच में ड्रग सप्लाई चेन से जुड़े कई सप्लायर, सहयोगी और फसिलिटेटर्स की भूमिका सामने आई है. ये लोग न सिर्फ ड्रग्स की सप्लाई में बल्कि अवैध कमाई को ठिकाने लगाने में भी सक्रिय थे. ED अब इन सभी लिंक की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव मानी जा रही हैं.
अन्य एजेंसियों से साझा होगी जानकारी
ED ने साफ किया है कि जांच से जुड़ी अहम जानकारियां अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा की जा रही हैं. इसका उद्देश्य इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है. प्रवर्तन निदेशालय ने दोहराया कि वह संगठित ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे वित्तीय चैनलों को पूरी तरह चोक किया जाएगा.