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क्राइम न्यूज़

फायर‍िंग से नरसंहार के बाद भी न‍िर्ममता से काट दी गई थी बॉडी, 'खूनी होली' से दहल गया ब‍िहार

'खूनी होली' से दहल गया ब‍िहार
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बिहार के मधुबनी ज‍िले में होली के दिन एक ही जाति के 5 लोगों की निर्मम हत्या पर जमकर राजनीत‍ि शुरू हो गई. इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस हत्याकांड के बाद फिर बिहार में जातीय संघर्ष शुरू होने की आशंका जताई जा रही है.

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दरअसल, 6 महीने पहले तालाब में मछली मारने को लेकर गैबीपुर गांव के दबंगों और महमदपुर गांव के पीड़ित परिवार के बीच जो विवाद शुरू हुआ था उसका इतना रक्त रंजित अंत होगा यह किसी ने भी नहीं सोचा था. इस विवाद में महमदपुर गांव के संजय सिंह और गैबीपुर गांव के मुकेश साफी ने एक दूसरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. 

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एक तरफ जहां संजय सिंह ने गैबीपुर गांव के प्रवीण झा समेत गांव के अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. वहीं, मुकेश साफी ने संजय सिंह समेत महमदपुर गांव के अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. संजय सिंह इस मामले में फिलहाल जेल में बंद है. 

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आरोप है कि होली के दिन प्रवीण झा ने हथियारों से लैस अपने 30-40 समर्थकों के साथ महमदपुर गांव पर हमला बोल दिया और हत्याकांड को अंजाम दिया. इस घटना में 2 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि तीन अन्य की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हुई.

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आज तक की पड़ताल में ये बात सामने आई कि इस गांव में साल 1993 में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी. तब अभी के हत्याकांड में जान गंवाने वाले महंत रूद्र नारायण दास के पिता की हत्या हुई थी. दावा है कि इसके बदले में अभी के हत्याकांड में अपने तीन बेटों को खोने वाले BSF में रहे सुरेंद्र सिंह ने गांव के 3 लोगों की हत्या कर दी थी, जो मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है.

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मृतक रुद्र नारायण की मां से भी पिछले हत्याकांड से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सब गांव के ही लोग थे, अब उन्हें कुछ याद नहीं. लेकिन अभी वो बोल ही रही थीं कि कुछ स्थानीय लोगों ने आकर हमें रोक दिया और 28 साल पहले की घटना से जुड़े सवाल न पूछने का दबाव बनाया. वहां मौजूद लोग उस पुरानी घटना के जिक्र पर गुस्से में नजर आए और दावा करते रहे कि दोनों घटनाओं का कोई रिश्ता नहीं है. महंत की पत्नी ने बताया कि उनको झगड़े के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

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इस हत्याकांड में एक BSF के जवान राणा प्रताप सिंह की भी मौत हुई है, उनकी बेटियों ने भी बताया कि घटना के दिन उनके पिता घर पर ही मौजूद थे तभी झगड़े की आवाज आई. आवाज सुनकर वो झगड़ा सुलझाने गए कि 5 मिनट में ही गोलियों की आवाज आई. जब वो घटनास्थल पर पहुंचे तो देखा कि सभी लोगों को गोलियां लगी हुई हैं, उनके शरीर पर कई जगहों पर कट के निशान हैं. लेकिन घटनास्थल पर कोई लाश भी उठाने वाला नहीं था, पुलिस भी 4 घंटे बाद पहुंची जबकि पुलिस को पहले ही कॉल कर दिया गया था.

राणा प्रताप की बेटियों ने किसी भी तरह की पुरानी लड़ाई से इंकार किया. उनकी मांग है कि दोषियों को फांसी की सजा मिले. साथ ही सरकार उनकी पढ़ाई और नौकरी का इंतजाम करे. पीड़ित परिजनों की शिकायत है कि घटना से काफी पहले ही पुलिस को जानकारी दे दी गई थी लेकिन पुलिस हत्याकांड के कई घंटे बाद मौके पर पहुंची.

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इस हत्याकांड को लेकर सबसे पहले नीतीश कुमार सरकार में वन एवं पर्यावरण विभाग के मंत्री नीरज कुमार बबलू ने अपनी आवाज उठाई और इसे नरसंहार करार दिया. मंत्री नीरज कुमार बबलू ने बिहार पुलिस को निकम्मा बताया और इस पूरे हत्याकांड में पुलिस और आरोपियों की मिलीभगत की बात भी कही.

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वहीं, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा क‍ि ये नरसंहार है. मैं पीड़ित परिवार की बातें सुनकर हैरान हूं कि घटना कैसे हुई? पूरे गांव में डर का माहौल है, हत्या के बाद भी शरीर को काटा गया. इस नरसंहार में बड़े-बड़े लोगों का हाथ है, रावण सेना चलाने वाले प्रवीण झा को पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा का संरक्षण मिला हुआ है.

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मधुबनी हत्याकांड का मामला बेहद पेचीदगियों से भरा नजर आता है. गांव में कोई भी कैमरे पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहा है. पीड़ित परिवार और आरोपियों के परिजनों ने आजतक से बातचीत में एक बार भी किसी तरह के जातीय संघर्ष का जिक्र नहीं किया. हालांकि, उनकी बातचीत से आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई साफ झलकती है. स्थानीयों के मुताबिक, दोनों ही पक्षों के लोग अपराधिक छवि के रहे हैं.