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WhatsApp पर निवेश का झांसा, 14 दिन में 4 करोड़ का खेल... दिल्ली में इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश

दिल्ली पुलिस ने साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसका कंट्रोल कंबोडिया से किया जा रहा था. ऊंचे रिटर्न का लालच देकर लोगों से करोड़ों की ठगी की गई. म्यूल बैंक खातों के जरिए सिर्फ 14 दिनों में करीब 4 करोड़ रुपए इधर-उधर किए गए. पुलिस ने 8 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है.

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कंबोडिया से ऑपरेट हो रहा था करोड़ों का साइबर फ्रॉड, दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा. (Photo: X/@DelhiPolice)
कंबोडिया से ऑपरेट हो रहा था करोड़ों का साइबर फ्रॉड, दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा. (Photo: X/@DelhiPolice)

दिल्ली पुलिस ने एक इंटरस्टेट इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 8 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है. इस पूरे नेटवर्क का हैंडलर कंबोडिया में बैठकर ऑपरेशन चला रहा था, जबकि भारत में मौजूद उसके सहयोगी म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी के पैसों को घुमा रहे थे. शुरुआती जांच में सामने आया है कि महज 14 दिनों के भीतर करीब 4 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए हैं.

पुलिस उपायुक्त दक्षिण-पश्चिम अमित गोयल ने बताया कि तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में एक साथ छापेमारी कर आरोपियों को पकड़ा गया है. यह कार्रवाई वसंत कुंज की रहने वाली 42 वर्षीय महिला की शिकायत के बाद की गई. पीड़ित महिला ने बताया कि उसको व्हाट्सऐप के जरिए स्टॉक मार्केट में ऊंचे रिटर्न और एक्सपर्ट गाइडेंस का लालच दिया गया था. 

पीड़िता का भरोसा जीतने के बाद आरोपियों ने उससे अलग-अलग खातों में कुल 15.58 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए. जांच में सामने आया कि पीड़ितों से संपर्क करने के लिए जिन व्हाट्सऐप नंबरों का इस्तेमाल हो रहा था, वे कंबोडिया से ऑपरेट किए जा रहे थे. भारत में मौजूद आरोपी कमीशन के बदले फर्जी और म्यूल बैंक खाते खोलने और उन्हें चलाने का काम कर रहे थे.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वनपतला सुनील कुमार, साकिनाला शंकर, मनोज यादव, संदीप सिंह, आदित्य प्रताप सिंह, राहुल, शेरू और सोमपाल के रूप में हुई है. पुलिस ने इनके पास से 10 हाई-एंड मोबाइल फोन और 13 सिम कार्ड बरामद किए हैं. इनका इस्तेमाल कई म्यूल बैंक खातों के संचालन और विदेशी हैंडलर से संपर्क के लिए किया जाता था.

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पुलिस के अनुसार, तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल फोरेंसिक के जरिए पैसों के लेन-देन की कड़ियां जोड़ी गईं. जांच में तेलंगाना निवासी सुनील कुमार को फर्जी बैंक खातों का मुख्य सप्लायर पाया गया. उसने कीसारा में एक फर्जी फर्म बनाकर प्राइवेट बैंक में करंट अकाउंट खुलवाया था, ताकि साइबर ठगी की रकम को रूट किया जा सके.

पुलिस की पूछताछ के दौरान सुनील कुमार ने साकिनाला शंकर और मनोज यादव की भूमिका का खुलासा किया. इसके बाद संत कबीर नगर से मनोज यादव और बनारस से संदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया, जो लखनऊ में खातों का संचालन संभालता था. आगे की कार्रवाई में राजस्थान के कोटा से आदित्य प्रताप सिंह को पकड़ा गया. उस पर देशभर में फर्जी खाते खुलवाने का आरोप है.

ठगी की रकम कई बैंक खातों से घुमाई गई, जिनमें सोमपाल और राहुल द्वारा संचालित खाते भी शामिल थे, ताकि ट्रांजैक्शन का पता न चल सके. सोमपाल MBA ग्रेजुएट है. वो पहले एक सॉफ्टवेयर कंपनी चलाता था. उसने बिजनेस बंद होने के बाद बड़े ट्रांजैक्शन के लिए अपना कॉर्पोरेट अकाउंट इस्तेमाल होने दिया. अकेले सोमपाल के खाते से 51 साइबर क्राइम की शिकायतें जुड़ी मिली हैं.

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