दिल्ली पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए एक बड़े साइबर फ्रॉड मामले में अहम सफलता हासिल की है. पुलिस ने एक बुजुर्ग डॉक्टर दंपति से ठगे गए 14.85 करोड़ रुपए में से 1.9 करोड़ रुपए फ्रीज कर दिए हैं. पुलिस की जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने रकम को छिपाने के लिए कई राज्यों में फैले 700 से ज्यादा म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया है.
पुलिस के मुताबिक, ठगी की रकम सबसे पहले गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तराखंड में मौजूद सात प्राइमरी बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की गई. इसके बाद इन अकाउंट से पैसे को तेजी से 200 से 300 दूसरे खातों में भेजा गया और फिर कई लेयर में अलग-अलग अकाउंट्स में घुमाया गया, ताकि पुलिस को चकमा दिया जा सके.
एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मल्टी-लेयर्ड म्यूल अकाउंट नेटवर्क ने मनी ट्रेल को बेहद जटिल बना दिया है. इसी वजह से रकम को ट्रैक करने में समय लग रहा है. पुलिस की स्पेशल टीमें बैंकों और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट की मदद से ट्रांजैक्शन का बारीकी से विश्लेषण कर रही हैं. 26 दिसंबर को असम के गुवाहाटी के जालुकबारी में 1.99 करोड़ ट्रांसफर किए गए.
इसके बाद 29 और 30 दिसंबर को गुजरात के वडोदरा स्थित समा सावली में लगातार दो-दो करोड़ रुपए भेजे गए. 2 जनवरी को 2 करोड़ रुपए ईस्ट दिल्ली के मयूर विहार पहुंचे, जबकि 5 जनवरी को 2.05 करोड़ रुपए मुंबई के नेपियन सी रोड स्थित अकाउंट में ट्रांसफर किए गए. इस तरह अलग-अलग राज्यों में रकम ट्रांसफर कर म्यूल अकाउंट्स का जाल बनाया गया.
इसकी संख्या 700 से ज्यादा हो चुकी है. फिलहाल पुलिस और लिंक्ड अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें फ्रीज करने की कोशिश में जुटी है. अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. यह मामला 9 जनवरी को तब सामने आया, जब साउथ दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले 81 साल के ओम तनेजा और उनकी 77 साल की डॉक्टर पत्नी इंदिरा तनेजा को ठगी का अहसास हुआ.
पीड़ित दंपति ने बताया कि उन्हें 24 दिसंबर से 9 जनवरी तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और इस दौरान लगातार निगरानी में रखकर कई ट्रांजैक्शन के जरिए पैसे ट्रांसफर कराए गए. जालसाजों ने खुद को टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर दंपति को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी. वेरिफिकेशन के नाम पर डराया गया.
डॉक्टर दंपति को दिए गए अकाउंट में बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया. जांच में सामने आया है कि कई म्यूल अकाउंट टूर एंड ट्रैवल बिजनेस, रिक्रूटमेंट फर्म और चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशन के नाम पर खोले गए थे. कुछ अकाउंट शेल एंटिटी से जुड़े थे, जिनमें कोई वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं थी. कुछ अकाउंट सही मकसद से खुलने के बाद गलत इस्तेमाल किए गए.