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दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, रोडसाइड असिस्टेंस के नाम पर चल रहा था ठगी का खेल, ऐसे हुआ खुलासा

दिल्ली के गुरु अर्जुन नगर में फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश हुआ है. जहां आरडी सर्विसेज़ के नाम पर रोडसाइड असिस्टेंस पॉलिसी बेचकर लोगों से ठगी की गई. इसके बाद जब मामला पुलिस तक पहुंचा तो 12 आरोपी गिरफ्तार किए गए. पढ़ें पूरी कहानी.

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पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है (फोटो-ITG)
पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है (फोटो-ITG)

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर रैकेट का पर्दाफाश किया है. यह गिरोह लोगों को रोडसाइड असिस्टेंस पॉलिसी के नाम पर ठग रहा था. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के संचालकों और टेली-कॉलर्स को गिरफ्तार किया है. जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिससे पता चला कि यह ठगी पिछले कई महीनों से चल रही थी.

दिल्ली पुलिस ने गुरु अर्जुन नगर इलाके में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 2 मुख्य संचालकों और 10 टेली-कॉलर्स को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस को लंबे समय से इस तरह की ठगी की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर यह छापेमारी की गई. छापेमारी के दौरान कॉल सेंटर पूरी तरह से सक्रिय हालत में मिला, जहां से देशभर के लोगों को कॉल किए जा रहे थे. पुलिस ने तुरंत सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी.

जांच में सामने आया कि आरोपी आरडी सर्विसेज़ के नाम पर फर्जी रोडसाइड असिस्टेंस पॉलिसी बेच रहे थे. वे लोगों को फोन करके दावा करते थे कि उनकी कंपनी पूरे भारत में वाहन खराब होने, पंचर या किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में तुरंत मदद उपलब्ध कराएगी. उनकी बातों में आकर कई लोग इस सेवा को असली मान लेते थे. आरोपी अपनी स्क्रिप्ट इतनी पेशेवर तरीके से बोलते थे कि ग्राहकों को शक नहीं होता था. इस तरह वे रोजाना कई लोगों को अपने जाल में फंसा रहे थे.

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आरोपी ग्राहकों से 3000 से 4000 रुपये तक वसूलते थे और भुगतान के लिए कैश ऑन डिलीवरी (COD) का तरीका अपनाते थे. पैसे मिलने के बाद ग्राहकों को एक फर्जी प्लास्टिक पॉलिसी कार्ड भेजा जाता था, जिससे उन्हें लगता था कि सेवा असली है. हालांकि, यह कार्ड पूरी तरह नकली होता था और किसी भी अधिकृत संस्था से इसका कोई संबंध नहीं था. इस तरीके से आरोपी लोगों का भरोसा जीतकर ठगी को अंजाम देते थे. पुलिस का कहना है कि यह गिरोह बड़े स्तर पर ठगी कर रहा था.

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जब ग्राहक परेशानी में हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करते थे, तो आरोपी जानबूझकर कॉल्स को नजरअंदाज कर देते थे. यानी, पैसे लेने के बाद कोई भी सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती थी. कई पीड़ितों ने शिकायत की कि जरूरत के समय उन्हें कोई मदद नहीं मिली. इससे साफ हो गया कि यह पूरा सेटअप सिर्फ लोगों से पैसे ऐंठने के लिए बनाया गया था. पुलिस अब पीड़ितों की पहचान कर उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रही है.

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से बड़ी मात्रा में सबूत भी बरामद किए हैं. इनमें फर्जी प्लास्टिक पॉलिसी कार्ड, ग्राहकों का डेटा, मोबाइल फोन, कंप्यूटर सिस्टम और अटेंडेंस रजिस्टर शामिल हैं. इन दस्तावेजों से यह पता चला है कि आरोपी पिछले करीब 6 महीनों से इस फर्जी कॉल सेंटर को चला रहे थे. साथ ही, उनके पास इस तरह की सेवा चलाने के लिए कोई वैध लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन भी नहीं था. पुलिस इन सबूतों के आधार पर आगे की जांच कर रही है.

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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस गिरोह का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है, जिसकी जांच जारी है. संभावना जताई जा रही है कि इस कॉल सेंटर के जरिए देशभर में सैकड़ों लोगों को ठगा गया है. पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर उनके अन्य साथियों और संभावित कनेक्शनों का पता लगाने में जुटी है. साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे इस तरह की कॉल्स से सावधान रहें और किसी भी अनजान कंपनी पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें.

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