इस बार गणतंत्र दिवस पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि हैं. दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति की सुरक्षा के दिल्ली से लेकर आगरा तक ऐसे पुख्ता इंतजाम किए गए हैं कि कोई परिंदा भी पर ना मार सके. जमीन से लेकर आसमान तक और पानी से लेकर पाताल तक ओबामा की हिफाजत के ऐसे इंतजाम हैं, जिसकी दुनिया में कोई दूसरी मिसाल ही नहीं है. आलम यह कि अगर गलती से किसी ने मिस्टर प्रेसिडेंट के करीब जोर से सांस भी ली तो एक साथ सैकड़ों कान खड़े हो जाएंगे.
अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के 500 एजेंट. 10 हजार एनएसजी और अर्धसैनिक बल के जवान. 80 हजार दिल्ली पुलिस के जवान. एक एयरफोर्स वन विमान. 3 मरीन वन हेलिकॉप्टर. 6 लड़ाकू विमान. 1600 मेहमानों की फौज. ये वो इंतजाम हैं जो दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति बराक ओबामा के लिए किए गए हैं. दिल्ली को जमीन से लेकर आसमान तक और पानी से लेकर पाताल तक एक किले में तब्दील कर दिया जाएगा. हर वो जगह जहां से किसी भी तरह के आतंकी हमले की आशंका हो सकती है ओबामा की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति की हिफाजत के लिए अमेरिकी और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर ओबामा पर हमले की हर साजिश को नाकाम करने का जबरदस्त इंतजाम किया है.
भारत यात्रा पर आतंकवादी हमले के खतरे को देखते हुए राष्ट्रपति के साथ हर पल अमेरिका से आए पांच सौ कमांडोज मौजूद रहेंगे. ये कमांडो दुनिया के सबसे बेहतरीन कहे जाने वाले यूएस मरीन और आर्मी रेंजर्स से होंगे. इनके अलावा अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और सीक्रेट सर्विस एजेंट्स के जासूस भी राष्ट्रपति के आसपास हर मूवमेंट पर पैनी निगाह रखेंगे. बुनियादी तौर पर राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिकी एजेंसी यूएसएसएस यानी युनाइटिड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस के पास है. इनके एजेंट हमेशा सादी वर्दी में राष्ट्रपति के आसपास मौजूद रहते हैं. काले चश्मे के पीछे इनकी नजरें हमेशा प्रेसिडेंट के आसपास मौजूद लोगों पर रहती है.
अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा की असल जिम्मेदारी होती है सीक्रेट सर्विस, सीआईए और अमेरिकी फौज की उस साझा टीम पर जिनके आदमी जमीन, आसमान और समंदर से हमेशा राष्ट्रपति पर कड़ी नजर रखते हैं. ये सभी सुरक्षाकर्मी एक नेटवर्क के जरिए हमेशा सिक्योरिटी कंट्रोल रूम से संपर्क में रहते हैं और किसी भी आपातकालीन स्थिति में पल भर के अंदर हरकत में आ जाते हैं. इनके पास राष्ट्रपति के खिलाफ किसी भी तरह के रासायनिक, जैविक या फिर परमाणु हमले से निपटने के इंतजाम भी हर वक्त मौजूद रहते हैं.
ओबामा की सुरक्षा में मुंबई और दिल्ली पुलिस के बेहतरीन अफसरों के अलावा, क्यूआरटी यानी क्विक रिएक्शन टीम्स, स्वात, एनएसजी और एसपीजी के कमांडो, पैरामिलिट्री फोर्स, डॉग स्क्वॉड, बम निरोधक दस्ते, सीबीआई, आईबी और खुफिया एजेंसी रॉ के लोग मौजूद रहेंगे. एक अंदाजे के मुताबिक इनकी तादाद नब्बे हजार से ज्यादा है.
कैसा है एयरफोर्स वन
एयरफोर्स वन अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान का नाम है. इसमें तकनीक की ऐसी बाजीगरी है कि आसमान में उड़ान भरते वक्त कोई रडार इसकी परछाई भी नहीं देख सकता. और अगर खुदा ना खास्ता एयर फोर्स वन की पोजीशन कोई जान भी ले तो इसे निशाना बना पाना मुमकिन नहीं. जिस हवाई मार्ग से एयर फोर्स वन गुजरता है, उसे खाली कराने के लिए अमेरिकी एयर फोर्स के दो फाइटर प्लेन आगे-आगे उड़ान भरते हैं. अगर किसी ने पीछे से एयर फोर्स वन पर मिसाइल दागी तो इसके कॉकपिट में मौजूद चौकन्ने पायलट को मिसाइल का सिग्नल मिल जाता है. सिग्नल मिलने के बाद पायलट को बस एक बटन दबाना होता है, जिसके बाद एयर फोर्स वन से निकलता है आग का ऐसा गोला, जो मिसाइल को गच्चा देकर भस्म कर डालता है.
अमेरिका के राष्ट्रपति जब व्हाइट हाउस से बाहर निकलकर एयरफोर्स वन में सवार होते हैं, तब उनका ये विमान मिनी व्हाइट हाउस में तब्दील हो जाता है. इसमें राष्ट्रपति की सहूलियत का सारा सामान मौजूद है. किसी सात सितारा होटल का लग्जरी सुइट भी एयरफोर्स वन के प्रेसिडेंशियल केबिन का मुकाबला नहीं कर सकता. लेकिन, आप इस मुगालते में मत रहिएगा कि राष्ट्रपति ओबामा पलंग पर आराम फरमाते हुए भारत आ रहे हैं. हकीकत ये है कि हवाई सफर में भी उनका ज्यादा वक्त बीतता है विमान के कॉन्फ्रेंस रूम में. जहां से ओबामा अमेरिका की घरेलू राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तक सारे मामलों पर नजर रखते हैं.
उड़नखटोला मरीन वन
एयरफोर्स वन के रनवे पर उतरते ही अगर एयरपोर्ट से मंजिल की दूरी दस किलोमीटर से ज्यादा हो तो मिस्टर प्रेसिडेंट सड़क की बजाए मरीन वन में सवार हो जाते हैं. मरीन वन यानी अमेरिकी एयरफोर्स का वो ताकतवर हेलीकॉप्टर जिसे गोली, गोला या मिजासल कोई नहीं भेद सकता. मरीन वन में अमेरिका के राष्ट्रपति की उड़ान घरेलू दौरों से शुरू हुई और अब तो अमेरिका के राष्ट्रपति विदेश दौरे में भी साथ ले जाते हैं. ओबामा जिस मरीन वन में उड़ते हैं, वो वीएच-थ्री कैटेगरी का हेलीकॉप्टर है, जिसे अमेरिकी नौसेना इस्तेमाल करती है. मरीन वन में भी अमेरिका के राष्ट्रपति का छोटा सा दफ्तर है, जहां वो दो-चार लोगों के साथ मीटिंग कर सकते हैं.
एयरफोर्स वन की तरह मरीन वन भी थर्मल गाइडेड मिसाइलों यानी गर्मी के आधार पर टारगेट तय करने वाली मिसाइलों को गच्चा देने के लिए आग के गोले छोड़ता है. अमेरिका के राष्ट्रपति जब मरीन वन में यात्रा करते हैं, तो काफिले में एक जैसी शक्ल-सूरत वाले कम से कम तीन मरीन वन होते हैं. इन तीनों में राष्ट्रपति किसमें सवार हैं, इसकी जानकारी या तो राष्ट्रपति को होती है, या फिर सीक्रेट सर्विस के चुनिंदा एजेंट्स को.
सड़क की शाही और सुरक्षित सवारी
कैडिलेक लिमोजिन कार को जब 20 जनवरी 2009 को बराक ओबामा की प्रेसिडेंशियल कार का दर्जा दिया गया, तो इसे नाम मिला- द बीस्ट. अमेरिकी राष्ट्रपति की कार का वजन 7 से 8 टन के बीच है. इस कार की बॉडी स्टील, एल्यूमिनियम, टाइटेनियम और सेरामिक से बनी है और इसके दरवाजों का वजन बोइंग 747 विमान के केबिन डोर के बराबर है. कार का फ्लोर इतना मजबूत है कि नीचे बम भी फटे, तो कार का कुछ नहीं बिगड़ सकता. कार के शीशे 5 इंच मोटे बुलेट प्रूफ मैटीरियल के हैं, जिसे मशीनगन भी छेद नहीं सकती. कार में राष्ट्रपति ओबामा के केबिन और ड्राइवर केबिन के बीच भी शीशे की दीवार खड़ी है, जिसका झरोखा सिर्फ राष्ट्रपति खोल सकते हैं या फिर उनकी सुरक्षा में तैनात सीक्रेट सर्विस के एजेंट. डीजल से चलने वाली इस कार की लागत है करीब डेढ़ करोड़ रुपये. ये कार पूरी तरह एयर टाइट है. यानी ओबामा के रास्ते में अगर जहरीली गैस भी फैली हो, तो अंदर बैठे लोगों को उससे रत्ती भर खतरा नहीं.