
महज 38 साल की उम्र. कसरती बदन. पॉलिटिक्स से दूरी और शानो-शौकत से भरी एक शानदार जिंदगी. मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव की जिंदगी में वैसे तो किसी की बात की कोई कमी नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद जिन हालात में रातों-रात उनकी मौत हो गई, उसने प्रतीक और मुलायम परिवार के करीबियों से लेकर हर किसी को सकते में डाल दिया. सुबह सवेरे अचानक उन्हें इमरजेंसी की हालत में लखनऊ के सिविल अस्पताल में लाया गया, लेकिन जब तक डॉक्टर उनकी कोई मदद कर पाते, तब तक उनकी जान जा चुकी थी.
अब सवाल ये है कि आखिर रातों-रात ऐसा क्या हुआ कि अचानक से उनकी जिंदगी ही चली गई? ये सही है कि प्रतीक कुछ समय से बीमार चल रहे थे. लेकिन क्या ये बीमारी ही उनकी मौत वजह बनी? या फिर उनकी मौत अचानक हुए हार्ट फेल के चलते हुई? कहीं ऐसा तो नहीं कि उनकी मौत की वजह कुछ और है? फिलहाल, हालात ये हैं कि प्रतीक के शव का पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद मौत की वजह शुरुआती तौर पर फेफड़ों में खून के थक्के जमने को बताई गई है. लेकिन एक्सपर्ट्स के लिए अभी इस मौत की तह तक पहुंचना जरूरी है.
प्रतीक की मौत को लेकर लखनऊ पुलिस किन-किन एंगल से जांच कर रही है, कौन से लोग उसके रडार पर हैं, आखिर इस मामले में पुलिस इनवेस्टिगेशन की जरूरत क्यों है, इसके बारे में आपको डिटेल में बताएंगे, लेकिन पहले उनकी मौत की पूरी टाइमलाइन को एक बार सिलसिलेवार तरीके से समझ लीजिए.
सुबह 5:55 बजे, सिविल अस्पताल, लखनऊ
प्रतीक को उनके कुछ करीबी और घर वाले बुधवार की सुबह एक एंबुलेंस में लेकर अस्पताल पहुंचते हैं. उन्हें फौरन पहले अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाया जाता है और वहां से सीधे आईसीयू में, जहां डॉक्टर उनकी जांच शुरू करते हैं. इस बीच प्रतीक की पत्नी यानी अपर्णा यादव के भाई अमन सिंह बिष्ट भी अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन कुछ देर की जांच के बाद ही डॉक्टर प्रतीक को ब्रॉट डेड यानी अस्पताल लाए जाने से पहले से ही उनकी मौत की बात कहते हैं.
असल में प्रतीक को जब तक अस्पताल लाया गया था, तब तक उनके शरीर में जीवन के कोई निशान मौजूद नहीं थे. उल्टे तकरीबन वो सारे सिमटम्स मौजूद थे, जो आम तौर पर मौत के मामलों में होते हैं. मसलन उनकी धड़कन रुक चुकी थी, पल्स डाउन थी और यहां तक कि आंख की पुतलियां भी स्थिर हो चुकी थी. वैसे अस्पताल के डॉक्टरों को प्रतीक की मौत की शुरुआती वजह क्या लगी और क्या उनके शरीर पर कोई चोट के निशान थे?
अब अगर प्रतीक को अस्पताल लाए जाने से पहले के सिक्वेंस को समझने की कोशिश करें, तो उनके नजदीकियों का कहना है कि वो घर में रहते हुए किचन में बेहोश होकर गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें उठा कर अस्पताल लाया गया. लेकिन तमाम कोशिश के बावजूद उनकी जिंदगी नहीं बचाई जा सकी. लेकिन ये तो रही घर में ही अचानक प्रतीक के तबीयत बिगड़ने और उन्हें अस्पताल लाए जाने की पूरी कहानी. अब उनकी मौत के बाद आखिर इस मामले की जांच क्यों की जा रही है, आइए उसे समझने की कोशिश करते हैं.
अव्वल तो प्रतीक की उम्र महज 38 साल की है. उनके फौरी तौर पर किसी हादसे का शिकार होने की बात भी सामने नहीं आई है. घर में रहते हुए ही अचानक उनकी तबीयत बिगड़ती है और फिर चंद घंटों के अंदर ही उनकी मौत हो जाती है, तो मामले की जांच जरूरी हो ही जाती है. लिहाजा, इसकी सच्चाई जानने के लिए तफ्तीश भी जरूरी है. कुछ इसी इरादे से मौत के बाद डॉक्टरों की एक खास टीम ने प्रतीक के शव का लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के अस्पताल में पोस्टमार्टम किया. इस पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट में उनकी मौत की वजह फेफड़ों में खून के थक्कों के जमने को बताया गया. जिससे दिल की धड़क और सांस रुक गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से कई अहम बातों पर गौर करें तो, इन्हें कुछ बिंदुओं से समझा जा सकता है-
प्वाइंट नंबर-1
मौत की वजह फेफड़ों में ख़ून के थक्कों का जमना.
प्वाइंट नंबर-2
पोस्टमार्टम में प्रतीक के शरीर पर कुछ एंटी मॉर्टम चोटों के निशान मिले. हालांकि ये निशान उनकी बीमारी की हालत में घर में गिरने की वजह से हो सकते हैं.
प्वाइंट नंबर-3
फॉरेंसिक मेडिसीन के एक्सपर्ट्स ने उसका विसरा सुरक्षित रखा.
प्वाइंट नंबर-4
विसरा के साथ-साथ प्रतीक का हार्ट और लंग यानी फेफड़ा भी प्रिजर्व किया गया
इस बीच पोस्टमार्टम में प्रतीक के शरीर में कम से कम 6 एंटीमॉर्टम चोटों का पता चला है. एंटीमॉर्टम यानी मौत से पहले. इन 6 में से 3 चोटों के बारे में डॉक्टरों की राय है कि ये मौत से महज एक दिन पहले के हो सकते हैं. जबकि बाकी चंद रोज़ पुराने. सवाल ये उठता है कि आखिर प्रतीक के साथ मौत से पहले ऐसा क्या हुआ था कि उन्हें ये चोटें आईं?
प्रतीक को करीब से जानने वाले लोगों के साथ-साथ उनकी मेडिकल जांच करने वाले डॉक्टरों ने भी ये क्लियर किया है कि प्रतीक का वजन काफी बढ़ गया था. ऐसे में अगर मौत की डिटेल मेडिकल इनवेस्टिगेशन के दौरान वजह अगर उनके दिल से जुड़ी लगे, उस सूरत में सच्चाई की तह तक पहुंचने के लिए प्रिजर्व किए गए उनके हार्ट को दोबारा जांचा जा सकता है.
ये और बात है कि उनकी मौत के बाद वजह के तौर पर प्वाइजनिंग की चर्चा इतनी जोर पकड़ी कि सिविल अस्पताल को बाकायदा इसके लिए एक स्पष्टीकरण तक देना पड़ा. सिविल अस्पताल ने बाकायदा एक प्रेस नोट जारी कर बताया कि प्रतीक यादव की मौत के मामले में अस्पताल की ओर कोई सस्पेक्टेड प्वाइजनिंग की बात नहीं कही गई है. उनकी मौत के बाद रिश्तेदारों ने ही पोस्टमार्टम करवाने की इच्छा जाहिर की थी, जिसके बाद उनके शव को केजीएमयू भिजवा दिया गया.
प्रतीक की मौत के मामले पर धुंध तो खैर है ही, उनकी कारोबारी और निजी जिंदगी को लेकर भी उथल-पुथल की बात सामने आई है. आखिर उनकी लाइफ में चल क्या रहा था, ये भी हम आपको बताएंगे, लेकिन पहले ये जान लीजिए कि अब पुलिस की जांच इस मामले को लेकर किस दिशा में जा रही है. पुलिस ने प्रतीक की मौत की बात सामने आने के बाद उनके शव का फॉरेंसिक एग्जामिनेशन तो करवाया ही, पुलिस की एक टीम ने उनके घर पहुंच कर मामले को समझने की कोशिश की.
बुधवार को लखनऊ के डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर प्रतीक और अपर्णा के घर पहुंचे और वहां मौजूद दोनों के करीबियों से बातचीत की. पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर बुधवार की सुबह घर के अंदर क्या हुआ था? प्रतीक की तबीयत अचानक कैसे बिगड़ी और उन्हें किस हालत में अस्पताल ले जाया गया? सूत्रों का कहना है कि फिलहाल, पुलिस की फॉरेंसिक टीम ने प्रतीक यादव का मोबाइल फोन और उनके कुछ पर्सनल गैजेट्स अपने पास रख लिए हैं. ताकि उनकी जांच की जा सके. पुलिस उनकी कॉल डिटेल, आखिरी बातचीत, हेल्थ और डिजिटल एक्टिविटीज को समझने की कोशिश कर रही है.
वैसे तो प्रतीक अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहते थे. यहां तक कि उन्होंने अपना कारोबार भी फिटनेस इंडस्ट्री में फैलाया था. दो अलग-अलग नाम से उनके दो आलीशान जिम भी लखनऊ में थे. लेकिन इतना होने के बावजूद हाल के दिनों में प्रतीक की तबीयत काफी खराब हो गई थी. उनका वजन काफी बढ़ गया था. कुछ खबरों के मुताबिक, उन्हें फेफड़ों से जुड़ी बीमारी पल्मोनरी एम्बोलिज़्म की शिकायत थी. इस बीमारी में ब्लड क्लॉटिंग यानी खून के थक्के जमने की समस्या होती है, जो कई बार ब्लड सर्कुलेश को भी प्रभावित करता है.
इसी कड़ी में उन्हें 30 अप्रैल को लखनऊ के एक ही प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. जहां कुछ दिनों तक उनका इलाज भी चला. लेकिन इसके बाद उन्होंने अचानक ही अस्पताल छोड़ दिया था.

प्रतीक और अपर्णा की कहानी
करीब 8 साल की रिलेशनशिप के बाद प्रतीक और अपर्णा ने साल 2011 में शादी की थी. शादी के बाद कई सालों तक दोनों के रिश्ते बिल्कुल ठीक रहे. दोनों को दो बेटियां भी हुईं. लेकिन कुछ रोज पहले प्रतीक और अपर्णा के बीच विवाद की बात सामने आई थी. दुनिया को इस बात का पता तब चला जब एकाएक इस साल के शुरुआती दिनों में प्रतीक ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट किए. इनमें एक पोस्ट में प्रतीक ने जहां अपर्णा पर इल्जाम लगाते हुए कहा कि उनकी पत्नी ने उनकी जिंदगी को नर्क बना डाला है. इंस्टाग्राम में ऐसे ही एक पोस्ट में प्रतीक ने अपर्णा को परिवार को तबाह करने वाली और यहां तक कि नाम और शोहरत की भूखी महिला भी कहा था.
कुछ समय पहले प्रतीक ने अपनी मेंटल हेल्थ के बारे में लिखा था कि इस समय उनकी मानसिक स्थिति बहुत खराब है और इससे उन्हें यानी अपर्णा को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें सिर्फ अपनी चिंता है. उन्हीं दिनों में प्रतीक ने यहां तक लिख दिया था कि वो अपर्णा से तलाक लेने के बारे में भी सोच रहे हैं. हालांकि इसके बाद मामला ठंडा पड़ गया और लोगों को लगा कि शायद दोनों जिंदगी में फिर से एक दूसरे के करीब आ रहे हैं. तब प्रतीक ने इंस्टा पर अपनी और अपर्णा की तस्वीर शेयर करते हुए ऑल इस गुड भी लिखा था.
कारोबारी धोखा
अब अगर प्रतीक के कारोबारी लाइफ की बात करें, तो ये साफ है कि उनकी पेशेवर जिंदगी में भी इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं था. एक मामला तो प्रतीक के रियल एस्टेट के कारोबार से ही जुड़ा है. प्रतीक ने चिनहट के रहने वाले एक कारोबारी कृष्णानंद पांडेय के रियल एस्टेट का एक काम शुरू किया था. इसमें पांडेय ने कथित तौर पर प्रतीक से करोड़ों रुपये इनवेस्ट करवाए. यहां तक कि प्रतीक को कंपनी का प्रोमोटर भी बनाया गया, लेकिन जमीन की खरीद-बिक्री से लेकर तमाम एग्रिमेंट की जिम्मेदारी पांडेय ने अपने पास रखी. प्रतीक को हिसाब किताब से भी दूर रखा गया.
इसके बाद जब प्रतीक ने रुपये वापस मांगे तो कथित तौर पर उन्हें पॉक्सो एक्ट तक में फंसाने की धमकी गई गई. इल्जाम है फेक ऑडियो तक वायरल कर बदनाम करने की कोशिश हुई. जिसके बाद प्रतीक ने कृष्णानंद और उसके घरवालों के खिलाफ लखनऊ के ही गौतमपल्ली थाने में रंगदारी का केस भी दर्ज करवाया था. जिसकी अभी जांच चल रही है. समझा जाता है कि प्रतीक इन बातों को लेकर भी तनाव में थे और तनाव भी उनकी बीमारी की एक बड़ी वजह थी. उनकी मौत के बाद जब उनके भाई और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव संवेदना जताने पहुंचे, तो मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने प्रतीक को हुए कारोबारी नुकसान की तरफ भी इशारा किया.
(सुप्रतिम बनर्जी के साथ अंकित मिश्रा, आशीष श्रीवास्तव और समर्थ श्रीवास्तव का इनपुट)