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एंटीलिया केसः सचिन वाजे के इर्द गिर्द घूम रही है जांच, अभी तक नहीं मिली सोसाइटी की CCTV फुटेज

क्या पीपीई सूट में ये शख्स सचिन वाज़े है? क्या पीपीई सूट पहन कर ख़ुद सचिन वाज़े स्कॉर्पियो चला रहे थे? क्या 17 से 25 फरवरी तक स्कॉर्पियो सचिन वाज़े के घर पर पार्क थी? क्या अपने ही सोसायटी की सीसीटीवी सचिन वाज़े ले गए? क्या मनसुख हीरेन ने कार चोरी की झूठी रिपोर्ट लिखवाई थी? क्या मनसुख हीरेन को साज़िश का सच पता था? इन सब सवालों ने इस मामले को और ज्यादा पेचीदा बना दिया है.

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एंटीलिया मामले में साजिश की सुई सचिन वाज़े की तरफ घूम रही है एंटीलिया मामले में साजिश की सुई सचिन वाज़े की तरफ घूम रही है

क्या कोई पुलिस अफसर किसी साजिश को अंजाम देने के लिए इस हद तक जोखिम उठा सकता है कि जिस कार में उसने विस्फोटक रखा हो उसे वो अपने घर में ही पार्क करे. बाद में वो उस कार को खुद ही ड्राइव करके अंबानी के घर के बाहर खड़ा करके आए. इतना नहीं इसके बाद वो जिस कार से फरार हो, उसे वो पुलिस वर्कशॉप में ले जाकर खड़ा कर दे. एनआईए की मानें तो ये सब मुंबई क्राइम ब्रांच के एपीआई रहे सचिन वाज़े ने खुद किया. एनआईए को एक सीसीटीवी फुटजे मिली है, जिसमें एंटीलिया के बाहर एक शख्स पीपीआई किट में नजर आ रहा है. पुलिस को शक है ये वो शख्स कोई और नहीं बल्कि सचिन वाज़े है.

क्या पीपीई सूट में ये शख्स सचिन वाज़े है? क्या पीपीई सूट पहन कर ख़ुद सचिन वाज़े स्कॉर्पियो चला रहे थे? क्या 17 से 25 फरवरी तक स्कॉर्पियो सचिन वाज़े के घर पर पार्क थी? क्या अपने ही सोसायटी की सीसीटीवी सचिन वाज़े ले गए? क्या मनसुख हीरेन ने कार चोरी की झूठी रिपोर्ट लिखवाई थी? क्या मनसुख हीरेन को साज़िश का सच पता था? इन सब सवालों ने इस मामले को और ज्यादा पेचीदा बना दिया है.

एंटीलिया केस की जांच हर रोज जबरदस्त करवट बदल रही है. एनआईए सूत्रों के मुताबिक बहुत मुमकिन है कि पीपीई सूट पहने ये शख्स जो एंटीलिया के बाहर एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया, वो कोई और नहीं बल्कि असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे है. दरअसल ये तस्वीर 25 फरवरी की रात की है, जब एंटीलिया के बाहर विस्फोटक वाली स्कॉर्पियो कार पार्क की गई थी. हालांकि सीसीटीवी फुटेज में इस शख्स का चेहरा दिखाई नहीं दे रहा है क्योंकि इसने पीपीई सूट पहन रखा है. कोरोना के इस काल में सड़क पर पीपीई सूट पहन कर निकलना कोई शक पैदा नहीं करता. लिहाजा साजिशकर्ता ने इसका भरपूर फायदा उठाया. पर अब सवाल ये है कि ये कैसे साबित होगा कि पीपीई सूट के अंदर सचिन वाजे है? क्योंकि सूट ने चेहरे को छुपा रखा है. बस इसी सच को जानने के लिए एनआईए ने ये तस्वीर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजी है.

फोरेंसिक टीम से कहा गया है कि वो सचिन वाज़े के चलने-फिरने के तौर-तरीक़े, चलने के दौरान उनके हाथ और पांव के मूवमेंट, उनके पूरे शरीर की छोटी से छोटी हरकतें चेक करें, सचिन वाज़े की असली तस्वीरों से. मकसद ये पता लगाना है कि सचिन वाज़े कैसे चलते हैं. चलते वक्त उनके हाथ और पांव का मूवमेंट कैसा होता है. उनका शरीर कितना और किस तरफ़ झुका होता है. यानी कुल मिलाकर, उनके वॉकिंग पैटर्न की जांच करनी है.

अगर वॉकिंग पैटर्न सीसीटीवी की इस तस्वीर से मेल खा गया, तो मान लीजिए कि पीपीई सूट पहने ये शख्स कोई और नहीं बल्कि सचिन वाज़े है. और जैसे ही ये साबित हो गया तो फिर इस सवाल का जवाब अपने आप मिल जाएगा कि 25 फरवरी की रात सौ नंबर पर कॉल करने के बाद लोकल पुलिस से भी पहले सचिन वाज़े मौके पर कैसे पहुंच गए थे. यानी एनआईए के शक के हिसाब से सचिन वाज़े पहले खुद स्कॉर्पियो लेकर आए, स्कॉर्पियो पार्क की, इनोवा में बैठे, थोड़ी दूर गए, फिर पीपीई सूट उतारा और वापस दोबारा सचिन वाज़े बन कर मौके पर आ गए. 

पीपीई सूट के इस पहेली के अलावा एनआईए के हाथ सचिन वाज़े को लेकर एक और बड़ी कामयाबी लगी है. और ये कामयाबी है स्कॉर्पियो की उस पहेली को सुलझाने की कि आखिर 17 से 25 फरवरी के बीच ये स्कॉर्पियो कहां और किसके पास थी? एनआईए सूत्रों के मुताबिक ये स्कॉर्पियो कहीं और नहीं बल्कि खुद सचिन वाज़े के ठाणे में मौजूद घर साकेत कांप्लेक्स में पार्क थी. 25 फरवरी को स्कॉर्पियो एंटीलिया के बाहर मिली और इसके ठीक 48 घंटे बाद 27 फरवरी को सचिन वाज़े के घर यानी साकेत कांप्लेक्स में खुद उन्हीं की टीम का एक पुलिस अफ़सर रियाज़ क़ाज़ी पहुंचता है. असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर रियाज़ काज़ी साकेत सोसायटी के सेक्रेटरी और चेयरमैन को एक लेटर देता है. 

लेटर में लिखा था कि एंटीलिया केस की जांच के सिलसिले में साकेत हाउसिंग सोसायटी परिसर की सीसीटीवी फुटेज की ज़रूरत है. इसके बाद रियाज़ काज़ी सोसायटी से दो डीवीआर लेकर चला जाता है. हालांकि इस लेटर पर रियाज़ काज़ी के नाम और दस्तखत तो हैं, लेकिन पुलिस या डिपार्टमेंट की कोई मुहर नहीं है. इन दोनों डीवीआर में क़रीब महीने भर की तस्वीरें थीं. रियाज़ क़ाज़ी जब सचिन वाज़े के घर का ये डीवीआर अपने साथ ले गया, तब इस केस की जांच क्राइम ब्रांच सीआईयू यूनिट ही कर रही थी और इसके जांच अधिकारी थे खुद सचिन वाज़े.

अब यहां सवाल ये उठता है कि एंटीलिया केस की जांच कर रहे जांच अधिकारी खुद अपने हाउसिंग कांप्लेक्स सीसीटीवी तस्वीरें क्यों कब्ज़े में ले रहे थे. उनके घर का इस केस से क्या लेना-देना था? यहां ये बता दें कि सचिन वाज़े के साकेत हाउसिंग सोसायटी में उनके अलावा ऐसा कोई शख्स नहीं रहता, जो इस केस की जांच से जुड़ा हो, या इस केस में संदिग्ध हो. तो फिर जांच अधिकारी के घर की तस्वीरें सचिन वाज़े की अपनी ही टीम क्यों ले गई? एनआईए सूत्रों की मानें तो ये तस्वीरें एक पुख्ता सबूत हैं.

सबूत ये कि 17 फरवरी से 25 फरवरी तक स्कॉर्पियो गाड़ी खुद सचिन वाज़े के अपने हाउसिंग कांप्लेक्स में पार्क थी. बाद में सचिन वाज़े को लगा कि एंटीलिया केस बड़ा हो गया है, मीडिया इसको प्रमुखता से दिखा रही है. बहुत मुमकिन है कि जांच एजेंसी बदल जाए, फिर तब तक उनका और मनसुख हीरेन के रिश्ते का सच भी सामने आना शुरू हो गया था. लिहाज़ा उन्हें डर था कि इस स्कॉर्पियो की तलाश करते-करते खुद पुलिसवाले उनके घर तक ना पहुंच जाएं.

लिहाज़ा, 27 फरवरी को रियाज़ काज़ी और दो सिपाहियों को अपने ही हाउसिंग सोसायटी भेज कर उन्होंने जांच के नाम पर दोनों डीवीआर अपने कब्ज़े में ले लिए. खबर ये भी है कि इन डीवीआर के साथ छेड़छाड़ भी की जा चुकी है. एनआईए ने इसी सिलसिले में रियाज़ क़ाज़ी से लगातार पूछताछ की, लेकिन रियाज़ क़ाज़ी को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया. 

सूत्रों की मानें तो एनआईए उसे इस केस में वादा माफ़ गवाह बना सकती है. अगर एनआईए की जांच सही है और स्कॉर्पियो सचमुच सचिन वाज़े के घर पर ही 17 फरवरी से 25 फरवरी तक पार्क थी, तो फिर एक बात और साफ़ हो जाती है. और वो ये कि मनसुख हीरेन ने 18 फरवरी को विक्रोली थाने में स्कॉर्पियो की चोरी की जो रिपोर्ट लिखवाई थी, वो झूठी थी. अब सवाल ये है कि मनसुख हीरेन ने ये झूठी रिपोर्ट क्यों लिखाई, किसके कहने पर लिखाई, क्या वो किसी दवाब में थे, या फिर इस साज़िश में उन्हें भी शामिल किया गया था. 

स्कॉर्पियो की जब फॉरेंसिक जांच की गई तब इसमें एक और चौंकानेवाला खुलासा हुआ. फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक स्कॉर्पियो इसलिए चोरी नहीं हो सकती, क्योंकि इसे जबरन किसी और तरीक़े से खोलने की कोई कोशिश नहीं की गई. ये गाड़ी सिर्फ़ और सिर्फ़ चाबी से ही खुली है. अब अगर मनसुख हीरेन की रिपोर्ट के हिसाब से स्कॉर्पियो चोरी हो गई थी, तो सवाल ये है कि चोर के पास गाड़ी की चाबी कहां से आई. चोर को ये चाबी किसने दी. एनआईए को शक ही नहीं बल्कि पूरा यकीन है कि इस पूरी साज़िश में सचिन वाज़े के अलावा कई बड़े अफ़सर भी शामिल हैं. इसी को देखते हुए दिल्ली से एनआईए के सीनियर अफ़सरों की एक टीम भी मुंबई पहुंच गई है.

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