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Law and Order: जंगल में खूनी खेल, 3 पुलिसवालों के कातिल शिकारियों की खौफनाक कहानी

उस रात 7 शिकारी चोरी छुपे गुना के आरौन जंगल से शिकार कर वापस लौट रहे थे, तभी पुलिस से उनका सामना हो गया. इस मुठभेड़ में एक शिकारी मारा गया लेकिन एमपी पुलिस के 3 जवान भी शहीद हो गए. जानिए उन शिकारियों की पूरी कहानी..

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शिकारियों ने 5 काले हिरण और 1 मोर का शिकार किया था शिकारियों ने 5 काले हिरण और 1 मोर का शिकार किया था
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दो बाइकों पर सवार होकर जंगल पहुंचे थे शिकारी
  • शादी में बारातियों को परोसना चाहते थे काले हिरण का मांस
  • जंगल में अभी भी जारी है सर्च ऑपरेशन

मध्य प्रदेश के गुना जिले से एक खौफनाक खबर आई. शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात सात शिकारी चोरी छुपे गुना के आरौन जंगल में शिकार करने जा पहुंचे. उस जंगल में शिकारी अमूमन काले हिरण और मोर का शिकार करते हैं. वो सात शिकारी भी जब शिकार कर वापस लौट रहे थे, तभी पुलिस से उनका सामना हो गया. इस मुठभेड़ में एक शिकारी मारा गया लेकिन एमपी पुलिस के 3 जवान भी शहीद हो गए.  

गुना- 14 मई, तड़के 2 बजे, आरौन का जंगल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 160 किलोमीटर दूर गुना जिले के सागाबरखेड़ी गांव के करीब आरौन थाना की पुलिस की एक टीम नाइट पेट्रोलिंग पर थी. पुलिस की गाड़ी में हेड कांस्टेबल नीरज भार्गव और सिपाही संतराम मीना थे. जबकि गाड़ी एक प्राइवेट ड्राइवर लखन गिरी चला रहा था.

आरौन थाने में ही तैनात सब इंस्पेक्टर राजकुमार जाटव भी नाइट पेट्रोलिंग पर थे. देर रात करीब दो बजे राजकुमार जाटव को सूचना मिली कि छह-सात लोग शहरोक गांव की पुलिया से आगे मौनवाड़ा के जंगल में काले हिरन और मोर का शिकार करने पहुंचे हैं. खबर मिलते ही एसआई जाटव, प्रदीप मीनल और हेड कांस्टेबल दिनेश गौतम के साथ शहरोक गांव के करीब जंगल का रुख करते हैं. 

मुखबिरों की सूचना के हिसाब से जंगल में शिकारी जहां शिकार कर रहे थे, वहां से करीब सौ मीटर पहले एसआई जाटव गौतम और मीनल को गाड़ी से उतार देते हैं. ताकि अगर शिकारी भागने की कोशिश करें तो वो उन्हें खबर कर सकें.

गुना- 14 मई, तड़के 4 बजे, आरौन का जंगल 
गौतम एसआई जाटव को खबर देता है कि करीब छह-सात लोग दो मोटरसाइकिल पर जंगल से बाहर निकले हैं. खबर मिलते ही एसआई जाटव उसी तरफ भागते हैं और फिर पुलिस की गाड़ी से रोड ब्लॉक कर देते हैं. इस दौरान नाइट प्रेट्रोलिंग कर रहे हेड कांस्टेबल नीरज भार्गव और सिपाही संतराम मीना को भी उसी जगह बुला लिया जाता है.

इधर, दो मोटर साइकिल पर सवार सात शिकारी पुलिस की इस घेरेबंदी से बेखबर जैसे ही वहां पहुंचते हैं तो पुलिस टीम को देखकर घबरा जाते हैं. उन्हें लगा कि वो फंस गए हैं. बस इसी के बाद वो अचानक पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर देते हैं. पुलिस टीम अचानक हुए इस हमले से जब तक संभल पाती तब तक शिकारियों की गोली लगने से 28 साल के सब इंस्पेक्टर राजकुमार जाटव, 36 साल के हेड कांस्टेबल नीरज भार्गव और 25 साल के सिपाही संतराम मीना मौके पर दम तोड़ देते हैं. जबकि पुलिस की गाड़ी चला रहा ड्राइवर गिरी गोली लगने से घायल हो जाता है.

इस बीच पुलिस भी जवाबी फायरिंग करती है. जवाबी कार्रवाई में एक शिकारी को गोली लग जाती है और वो वहीं मोटर साइकिल से गिर पड़ता है. बाद में उसकी भी मौके पर ही मौत हो जाती है. बाकी छह शिकारी मोटरसाइकिल पर भाग निकलने में कामयाब हो जाते हैं. हालांकि भागते हुए दो बैग मोटर साइकिल से नीचे गिर पड़ते हैं. तलाशी लेने पर इन दो बैग के अंदर से काले हिरन के पांच सिर, दो बॉडी और एक मुर्दा मोर मिलता है.

देर रात हुई इस वारदात की खबर भोपाल पहुंचते ही हडकंप मच जाता है. तीन पुलिस वालों की मौत से पूरा पुलिस महकमा सदमे में आ जाता है. मुख्यमंत्री से लेकर राज्य के गृह मंत्री तक फौरन कड़ी कार्रवाई की बात करते हैं. मौके पर देर से पहुंचने के लिए ग्वालियर रेंज के आईजी अनिल शर्मा को हटा दिया जाता है. मुख्यमंत्री तीनों पुलिस वालों को शहीद का दर्जा देते हुए उनके परिवार को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने का एलान करते हैं.

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री का कहना है कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. जिस शिकारी की जवाबी कार्रवाई में मौत हुई थी, उसकी शिनाख्त नौशाद के तौर पर हुई. पुलिस के मुताबिक नौशाद की पहचान के साथ ही उसके बाकी छह साथियों की भी पहचान कर ली गई है. ये सभी इस जंगल से करीब बीस किलोमीटर दूर बिदुरिया गांव के रहने वाले हैं. पहली कार्रवाई के तौर पर इन शिकारियों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया. 

बाकी आरोपियों की तलाश के लिए एक साथ कई टीमें अलग-अलग छापे मार रही हैं. इस बीच नौशाद की पत्नी ने आजतक को बताया कि उसका पति रेत का काम करता था. घटना के बाद वन विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है और आरौन के जंगल में भी तलाशी जारी है. अंदेशा है कि शिकारी जंगल में भी छुपे हो सकते हैं. इलाके के लोगों और पुलिस के मुताबिक आरौन के जंगल में अकसर लोग चोरी-छुपे शिकार करने आते हैं. मगर ऐसा पहली बार है, जब शिकारियों ने सीधे पुलिस को निशाना बनाया है.

घटना के बाद पुलिस ने पता लगाया कि आरोपियों की कुल संख्या 8 थी. जिनमें से एक आरोपी पुलिस की कार्रवाई में पहले ही मारा जा चुका था. दूसरा पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया. जबकि 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. लेकिन पुलिस अब बाकी के फरार 4 आरोपियों की तलाश कर रही है. 

ये थी शिकार की वजह
छानबीन के बाद एमपी पुलिस को पता चला कि एक शादी में बारातियों को काले हिरण का मांस खिलाने की तैयारी थी. उसी के लिए आरोपियों ने इस वारदात को अंजाम दिया. दरअसल बिदोरिया गांव के आरोपी नौशाद के घर उसकी भतीजी की शादी थी. बारात में तमाम खास मेहमान आने थे और उनको लजीज पकवान खिलाने की तैयारी हुई. बारातियों को काले हिरण का मांस भी परोसा जाना था. इसी के लिए नौशाद अपने भाई शहजाद समेत अन्य परिजनों के साथ शहरोक-मौनबाड़ा के जंगल पहुंचा. क्योंकि वह इस इलाके से वाकिफ था. गुना के आरोन थाना इलाके में आने वाले इस जंगल में शनिवार तड़के उन्होंने 4 काले हिरण, एक मादा हिरण और एक मोर का शिकार किया था. 

वन्य जीवों के शिकार किए जाने की खबर पर स्थानीय थाने के पुलिसकर्मी जंगल पहुंचे. जहां रात के अंधेरे में उनकी शिकारियों से मुठभेड़ हुई. दोनों तरफ से हुई फायरिंग में तीन पुलिसकर्मियों एसआई राजकुमार जाटव, कॉन्स्टेबल नीरज भार्गव और संतराम मीणा मौके पर ही शहीद हो गए थे. वहीं हमले में पुलिस की गाड़ी का ड्राइवर घायल हो गया था.

 

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