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Kanpur Shootout: सीओ देवेंद्र मिश्रा को बेरहमी से मारकर विकास दुबे ने लिया था बदला

उस रात विकास दुबे के ठिकाने पर दबिश डालने गई पुलिस पर विकास दुबे और उसका गैंग पुलिस टीम पर बहुत भारी पड़े थे. दुबे ने सिर्फ़ आठ पुलिस वालों की जान ही नहीं ली बल्कि जिस तरीक़े से जान ली, वैसी बर्बरता और वैसा दुस्साहस कम ही लोगों में देखने को मिलता है.

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विकास दुबे के साथियों ने सीओ मिश्रा के पैर तक काट दिए थे
विकास दुबे के साथियों ने सीओ मिश्रा के पैर तक काट दिए थे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • विकास दुबे ने लाशों पर भी बरसाईं थी गोलियां
  • डीएसपी देवेंद्र मिश्रा से नफरत करता था विकास
  • गोली मारने के बाद काट दिए थे सीओ के दोनों पैर

कानपुर के बिकरू गांव में उस रात विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस टीम का नेतृत्व सीओ देवेंद्र मिश्रा कर रहे थे. जिन्हें घेर कर बेरहमी के साथ मारा गया था. देवेंद्र मिश्रा को कुल चार गोलियां मारी गई थीं और चारों ही गोलियां बेहद करीब से मारी गई. इतना ही नहीं गोली मारने के बाद विकास दुबे ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक आरी से उनके दोनों पैर तक काट डाले थे. ये तमाम खुलासे उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुए हैं.

2-3 जुलाई की दरम्यानी रात को विकास दुबे के ठिकाने पर दबिश डालने गई पुलिस पर विकास दुबे और उसके गैंग के लोग बहुत भारी पड़े थे. दुबे ने सिर्फ़ आठ पुलिस वालों की जान ही नहीं ली बल्कि जिस तरीक़े से जान ली, वैसी बर्बरता और वैसा दुस्साहस कम ही लोगों में देखने को मिलता है. अब बिकरू गांव में शहीद हुए पुलिसवालों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद इस बात का खुलासा हो गया है कि विकास दुबे और उसके साथियों ने सिर्फ आत्मरक्षा में ही पुलिसवालों पर गोली नहीं चलाई, बल्कि वो पुलिस से खुंदक पाले हुए थे और उन्हें सबक सिखाना चाहते थे. खास कर डीएसपी देवेंद्र मिश्रा को.

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक ज़्यादातर लाशों पर सिर्फ़ गोली के नहीं, बल्कि तेज़ धार हथियारों से काटे जाने के भी निशान मिले हैं. जो इस बात का सबूत हैं कि दुबे और उसका गैंग पुलिस से कितना खार खाए बैठा था. जबकि आपको याद होगा कि उज्जैन से पकड़े जाने के बाद विकास दुबे से हुई पहली पूछताछ में उसने एसटीएफ के सामने कहा था कि उसने इतने पुलिसवालों को जानबूझ कर नहीं मारा, बल्कि वो तो पुलिस से बचना चाहता था और उसे लगा था गोलियों से पुलिसवाले घायल हुए होंगे.

लेकिन इतने लोगों की जान चली गई, इसका पता उसे बाद में चला. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद ये भी साफ़ हो गया है विकास दुबे पकड़े जाने के बाद भी झूठ बोल रहा था. मारे गए पुलिसवालों में विकास दुबे ने सबसे ज़्यादा बर्बरता सीओ देवेंद्र मिश्रा के साथ ही की थी. फॉरेंसिक के एक्सपर्ट्स ने अपनी जांच में पाया है कि विकास ने देवेंद्र मिश्रा के जिस्म पर ना सिर्फ़ तेज़धार हथियारों से सबसे ज़्यादा हमला किया, बल्कि उनके दोनों पैर भी काट डाले थे. दुबे ने सीओ मिश्रा को कुल चार गोलियां मारी थीं. दो पेट में, एक सीने पर और एक सिर में.

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सीओ मिश्रा को ये चारों की चारों गोलियां बिल्कुल प्वाइंट ब्लैंक रेंज से यानी सटा कर मारी गई थीं. जो इस बात का सबूत है कि वो मिश्रा की जान ही नहीं लेना चाहता था, बल्कि उनसे बदला भी लेना चाहता था. सीओ देवेंद्र मिश्रा को मारने का विकास दुबे का ये तरीक़ा काफी हद तक नक्सलियों के हत्या करने के तौर तरीक़े से मिलता जुलता है. असल में सीओ मिश्रा शुरू से ही दुबे और उस जैसे बदमाशों का विरोध किया करते थे. उन्होंने कई बार दुबे से अपने मातहतों की नज़दीकी को लेकर अपने आला अफसरों से शिकायत भी की थी.

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यही वजह थी कि विकास दुबे सीओ देवेंद्र मिश्रा से ज़्यादा ही तपा रहता था. और तो और दुबे की सीओ के साथ कई बार कहासुनी भी हो चुकी थी. बताते हैं कि दुबे की एक टांग टूटी होने की वजह से उसमें रॉड लगी थी और वो थोड़ा लंगड़ा कर चलता था. सीओ भी कुछ इसी वजह से दुबे को अपमानित किया करते थे. बताया जाता है कि इसी वजह से विकास दुबे ने सबसे पहले अपने लोगों को देवेंद्र मिश्रा की दोनों टांगें की काटने का हुक्म दिया था. इसके बाद उन्हें बिल्कुल करीब से चार-चार गोलियां मारी गईं.

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उज्जैन में गिरफ्तारी के बाद विकास दुबे ने पूछताछ में खुलासा किया था कि चौबेपुर के एसओ विनय तिवारी ने उसे बताया था कि सीओ देवेंद्र मिश्रा उसे पसंद नहीं करते. विकास ने ये भी कबूला था कि देवेंद्र मिश्रा उसके सही गलत रास्तों के आड़े आते थे. जब विनय तिवारी ने उसे लेकर देवेंद्र मिश्रा की सोच के बारे में उसे बताया, तो उसका गुस्सा देवेंद्र मिश्रा को लेकर और ज़्यादा बढ़ गया था.

उधर, जांच में ये भी पता चला है कि 2-3 जुलाई की रात पुलिसवालों का क़त्ल करने के बाद विकास दुबे और उसके गैंग के लोग सभी लाशों को एक साथ एक कुएं में डाल कर जलाना भी चाहते थे, ताकि उनके गुनाहों का कोई सबूत ना बचे, लेकिन ये मुमकिन नहीं हो सका. लाशें जलाने के लिए विकास दुबे ने पहले से ही गैलनों में भर कर केरोसिन जैसे किसी ज्वलनशील पदार्थ का इंतज़ाम भी कर रखा था. लेकिन आठ-आठ पुलिसवालों का क़त्ल करते ही पुलिस की बैकअप टीम मौके पर आ गई और विकास दुबे और उसके गैंग के बाकी बदमाशों को रातों-रात गांव छोड़कर भागना पड़ा था.

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