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पटना मॉडल मर्डर: लेडी मास्टरमाइंड और कत्ल की खौफनाक साजिश का खुलासा

पुलिस ने सबसे पहले मोना के मोबाइल फ़ोन की कॉल डिटेल्स निकलवाई और इत्तेफ़ाक से कॉल डिटेल्स निकलवाते ही पुलिस को इस मामले में पहला सुराग मिलने की उम्मीद भी बंध गई. असल में मोना का मोबाइल फ़ोन ये बता रहा था कि वो अपने पति के अलावा भी किसी शख्स से दिन में कई-कई बार काफ़ी लंबी बातें किया करती थी.

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मॉडल मोना राय को मंदिर से लौटते वक्त बदमाशों ने गोली मार दी थी मॉडल मोना राय को मंदिर से लौटते वक्त बदमाशों ने गोली मार दी थी

अमूमन कत्ल के अनसुलझे मामलों के बारे में कहा जाता है कि अगर मरने वाला किसी तरह बच जाता तो पक्का कातिल का नाम खुद बता देता. पर अधिकतर ऐसा नहीं होता है. पटना की एक नामचीन मॉडल और मिसेज बिहार की गोली मारकर हत्या कर दी जाती है. मगर मौत से पहले वो करीब 5 दिन अस्पताल में जिंदा रहती है. इस दौरान पुलिसवाले कई बार उसके पास जाते हैं. उसके बयान दर्ज करते हैं. लेकिन वो कातिल का नाम नहीं बता पाती और पांच दिन बाद उसकी मौत हो जाती है. अब पुलिस को कातिल की तलाश थी. पुलिस ने कातिल को ढूंढ भी लिया. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जिसे पुलिस कातिल समझती रही, असली कातिल तो उसके पीछे था.    

12 अक्टूबर, रात 9 बजकर 25 मिनट, राजीव नगर, पटना
वो नवरात्र का सातवां दिन था. पटना की नामचीन मॉडल और मिसेज बिहार पीजेंट की सेकंड रनर अप मोना राय रात को पास ही के मंदिर से पूजा कर घर लौट रही थी. अभी उन्होंने अपने घर के बाहर स्कूटी रोकी ही थी कि अचानक पीछे से आए क़ातिलों ने उन पर फायर झोंक दिया. उन्हें पीछे से एक के बाद एक कई गोलियां मारी गईं और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, बाइक से आए हमलावर अपना काम पूरा कर फ़रार हो चुके थे. हमलावरों ने जब मोना राय को गोली मारी, तब उनके साथ उनकी छोटी सी बेटी भी मौजूद थीं, जो मोना के साथ ही मंदिर गई थी. इस हमले में वो बच्ची बाल-बाल बच गई. आनन-फ़ानन में घरवालों और पड़ोसियों ने मोना को उठा कर अस्पताल भिजवाया, जहां पूरे पांच दिनों तक वो मौत से दो-दो हाथ करती रही, लेकिन आख़िरकार उसने पांचवे दिन दम तोड़ दिया.

इस बीच मोना कई बार होश में आई और कई बार उसकी डॉक्टरों से लेकर पुलिसवालों तक से बातें हुई, लेकिन अपने जीते-जी मोना ने एक बार फिर खुद पर हुए हमले को लेकर किसी पर शक नहीं जताया. बल्कि मोना बार-बार इसी बात पर ज़ोर देती रही कि उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है. ऐसे में पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली, मामले की छानबीन भी शुरू कर दी, लेकिन लाख कोशिश के बावजूद वो इस मामले की तफ्तीश में आगे नहीं बढ़ पा रही थी. हालांकि पुलिस को इस बात का पूरा यकीन था कि जिस तरह क़ातिलों ने मोना पर घात लगा कर हमला किया, उसके पीछे दुश्मनी के सिवाय कोई दूसरी वजह हो नहीं सकती. कम से कम इसे लूटपाट या ऐसी ही कोई दूसरी घटना से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता था.

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तमाम पहलुओं की पड़ताल करने के बाद पुलिस इस शुरुआती नतीजे पर पहुंच चुकी थी कि ये मामला मिस्टेकेन आइडेंटिटी यानी धोखे में किए गए क़त्ल का भी नहीं था. क्योंकि मोना पर जिस तरह से हमला हुआ था, वो इस बात की तरफ़ इशारा कर रहा था कि मोना पर फायरिंग कोई आनन-फानन में नहीं हुई. बल्कि क़ातिलों ने वार करने से पहले बाकयदा मोना की और उसके घर की रेकी की थी. उसका इंतज़ार किया था और जब उन्हें इस बात का इत्मीनान हो गया कि यही वार करने का सबसे सही वक़्त है, तभी उन्होंने मोना पर गोली चलाई. लेकिन चूंकि मोना बगैर अपने क़ातिलों का कोई सुराग दिए ही इस दुनिया से चली गई, तो पुलिस ने उसकी ज़िंदगी में झांक कर इस वारदात के गुनहगारों तक पहुंचने का फ़ैसला किया.

इस कोशिश में पुलिस ने सबसे पहले मोना के मोबाइल फ़ोन की कॉल डिटेल्स निकलवाई और इत्तेफ़ाक से कॉल डिटेल्स निकलवाते ही पुलिस को इस मामले में पहला सुराग मिलने की उम्मीद भी बंध गई. असल में मोना का मोबाइल फ़ोन ये बता रहा था कि वो अपने पति के अलावा भी किसी शख्स से दिन में कई-कई बार काफ़ी लंबी बातें किया करती थी. 

अब सवाल ये था कि आख़िर कौन था वो शख्स? उसका मोना से क्या रिश्ता था? मोना शादी-शुदा होने के बावजूद इस शख्स से आख़िर इतनी बातें क्यों करती थी? कहीं इस क़त्ल में इसी संदिग्ध शख़्स का तो कोई रोल नहीं था? कहीं ऐसा तो नहीं कि वो मोना से पीछा छुड़ाना चाहता था? अगर हां, तो क्यों? क्या मोना के पति को अपनी बीवी के किसी और शख्स से इतनी लंबी बातें करने की ख़बर थीं? अगर हां तो क्या मोना के पति ने कभी ऐसा करने से उसे रोका नहीं? कहीं ऐसा तो नहीं कि इस क़त्ल में मोना के किसी क़रीबी या फिर उसके पति का ही हाथ था?

कुल मिलाकर, पुलिस के पास अनगिनत सवाल थे और जवाब किसी का नहीं था. और तब पुलिस ने उस शख्स को ढूंढ निकाला, जिससे मोना लंबी बातें किया करती थीं. वो पटना का ही एक नामचीन कारोबारी और बिल्डर था. नाम है राजू बिल्डर. पुलिस को उम्मीद थी कि फुलवारी शरीफ़ के रहनेवाले राजू से पूछताछ करने पर इस मामले का कोई ना कोई ऐसा सुराग़ ज़रूर मिलेगा, जिससे इसे सुलझाने में आसानी हो जाएगी. अब पुलिस ने राजू से पूछताछ शुरू की. एक के बाद एक कई रोज़ गुज़र गए, लेकिन राजू से पूछताछ का पुलिस को रत्ती भर भी फायदा नहीं हुआ. राजू ने ये तो माना कि उसकी मोना से गहरी दोस्ती थी और दोनों एक-दूसरे से लंबी बातें किया करते थे. लेकिन उसके क़त्ल से जुड़े हर सवाल का जवाब राजू ने ना में ही दिया. यानी राजू से लंबी पूछताछ करने के बावजूद पुलिस के हाथ खाली रहे.

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इसके बाद पुलिस ने राजू के घर की तलाशी लेने का फैसला किया. क्योंकि उसे लग रहा था कि राजू से पूछताछ में बेशक उसे इस क़त्ल का कोई सुराग ना मिला हो, लेकिन इस क़त्ल का कोई ना कोई ताल्लुक राजू और मोना के रिश्तों से ज़रूर है. राजू के घर की तलाशी लेने पर इस केस में एक और नया ट्विस्ट आ गया. पुलिस को राजू के घर से शराब की बोतलें मिलीं. बिहार में शराबबंदी है, यानी शराब पीने-पिलाने पर रोक है. ऐसे में राजू बिल्डर के घर शराब मिलने पर पुलिस को उस पर शिकंजा कसने का एक मौका मिल गया. पुलिस ने उसे अवैध तरीक़े से शराब रखने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया. लेकिन इसके बावजूद कोई फायदा नहीं हुआ. 

हालांकि पुलिस ने राजू बिल्डर के इर्द गिर्द अपनी तफ्तीश जारी रखी. पुलिस को पता चला कि राजू और मोना का रिश्ता दस साल से भी ज़्यादा पुराना है और इसके बारे में दोनों के परिवारवालों को भी इस रिश्ते की खबर थी. हाल ही में राजू ने मोना को एक प्लॉट भी गिफ़्ट में दिया था. इसी बीच पुलिस को राजू बिल्डर के नजदीकी लोगों की पड़ताल करते हुए एक ऐसे शख्स का पता चला, जो पेशे से शूटर यानी क्रिमिनल था. अब पुलिस ने बगैर देर किए आरा से भीम नाम के इस शूटर को धर दबोचा. असल में पुलिस ने भीम यादव नाम के इस शूटर को पकड़ने के लिए टेल्कनिकल सर्विलांस की मदद ली. 

पुलिस ने राजीव नगर में क़त्ल वाली जगह और उसके आस-पास के सीसीटीवी फुटेज के अलावा वारदात के वक़्त उस इलाक़े में एक्टिव मोबाइल फ़ोंस के नंबर का भी पता किया और उसकी जांच की. और इसी कोशिश में पुलिस को शूटर भीम यादव के बारे में पता चला. जैसा कि पुलिस को शक था, मामला ठीक वैसा ही निकला. पूछताछ में पहले तो भीम ने पुलिस को बरगलाने की पूरी कोशिश की. लेकिन फिर जल्द ही उसने मान लिया कि वो मोना राय के क़त्ल में शामिल है. भीम असल में उन शूटरों में शामिल था, जिन्होंने 12 अक्टूबर को मोना राय को गोली मारी थी. अब पटना पुलिस को इस हाई प्रोफ़ाइल क़त्ल का एक अहम सिरा मिल चुका था. लेकिन क़त्ल के मास्टरमाइंड तक पहुंचना अभी बाकी था और तब पूछताछ में भीम ने जो बताया, उसका शक पुलिस को पहले से ही हो रहा था. मोना के क़त्ल की सुपारी किसी और ने नहीं बल्कि खुद राजू बिल्डर की पत्नी ने दी थी.

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असल में राजू की पत्नी अपने पति के मोना से बढ़ते नज़दीकियों को लेकर कुछ ज़्यादा ही परेशान थी. वैसे तो ये रिश्ता सालों से चला आ रहा था. लेकिन जब राजू की पत्नी को पता चला कि उसके पति ने अपनी फ्रेंड मोना को गिफ्ट में एक महंगा प्लॉट दे दिया है, तो फिर उससे रहा नहीं गया. उसने अपने जानकार भीम सिंह को बुला कर मोना राय के क़त्ल की सुपारी दे दी. सुपारी पूरे पांच लाख रुपये की दी गई और एडवांस के तौर पर भीम और उसके साथियों को 70 हज़ार रुपये की राशि भी दे दी गई. इसके बाद कई रोज़ गुज़र गए और राजू की पत्नी मोना के क़त्ल के लिए शूटर्स पर दबाव बनाने लगी और तब आख़िरकार शूटर्स ने 12 अक्टूबर को मोना को गोली मार दी.

क़ातिलों की गोली मोना के जिस्म के निचले हिस्से में लगी थी. गोलियों से उसका लिवर डैमेज हो गया था. पहले उसके लिवर ने और फिर जिस्म के दूसरे हिस्सों ने काम करना बंद कर दिया और आख़िरकार 17 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई. फिलहाल, इस मामले को पुलिस ने कागज़ों पर तो सुलझा लिया है. मामले के एक शूटर को गिरफ्तार करने के साथ-साथ पुलिस ने इसकी साज़िश का भी खुलासा कर दिया है, लेकिन इस क़त्ल की मास्टमाइंड राजू बिल्डर की बीवी, कुछ दूसरे रिश्तेदार और बाकी के शूटर्स अभी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं.

 

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