इसके अलावा हाई कोर्ट ने यूजीसी को भी इस मामले में प्रोफेसर खुल्लर कमेटी की रिपोर्ट को सील बंद लिफाफे में कोर्ट में दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने यूजीसी को कहा है कि वह साफ करे कि उसकी गाइडलाइंस के तहत क्या असाइनमेंट बेस्ड एग्जाम करवाए जा सकते हैं.
गांव में इंटरनेट नेटवर्क है समस्या
दरअसल याचिकाकर्ताओं द्वारा इस बात की चिंता जताई गई थी कि पूरे देश में खासतौर से ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की सुविधा बेहद बुरी हालत में है. कोर्ट ने भी माना कि राजधानी दिल्ली में भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए कोर्ट को इंटरनेट की परेशानी झेलनी पड़ती है. इसलिए छोटे कस्बों और गांव में ऑनलाइन एग्जाम कराना छात्रों की परेशानी को ज्यादा बढ़ाने वाला हो सकता है
छात्रों की तकनीकी परेशानियां पर हो गौर
सुनवाई के दौरान बुधवार को एक सर्वे का जिक्र भी किया गया, जिसमें छात्रों की परेशानी और ऑनलाइन एग्जाम को लेकर उनकी जिज्ञासाओं के बारे में तकरीबन एक दर्जन सवाल पूछे गए थे. ज्यादातर छात्रों ने कहा कि वह चाहते हैं कि अगस्त में ऑनलाइन परीक्षाएं हो जाएं लेकिन कुछ सवाल ऐसे भी थे जो तकनीकी स्तर पर आने वाली समस्याओं से जुड़े हुए थे. दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को कहा है कि वह छात्रों की तकनीकी परेशानियों के हल को भी ढूंढे.
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24 जुलाई को दोबारा सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले में 24 जुलाई को दोबारा सुनवाई करेगा, जिसमें यूजीसी और दिल्ली यूनिवर्सिटी दोनों को कोर्ट के द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देने होंगे. इससे पिछली सुनवाई में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कोर्ट को कहा था कि वह अगस्त में परीक्षाएं कराने के लिए तैयार है, जबकि मॉक परीक्षाओं को कराने के लिए 27 जुलाई से शुरुआत करने की बात की गई थी.
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इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की थी लेकिन मॉक परीक्षाओं के दौरान ही पोर्टल पर कई दिक्कतों का सामना छात्रों को करना पड़ा.
इसके बाद छात्रों ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी समस्याओं को लेकर याचिकाएं भी दाखिल कर दी. इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी ने आनन-फानन में 10 जुलाई को होने वाली परीक्षाओं को रद्द कर दिया था. अब दिल्ली हाई कोर्ट छात्रों की इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है.